स्वतंत्रता दिवस से पहले शहजाद भट्टी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 14 राज्यों में 253 लोग हिरासत में

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले देश में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बहु-राज्यीय कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अभियान के तहत 14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि नेटवर्क से जुड़े मामलों में अब तक 80 से अधिक FIR और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज की गई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ कार्रवाई कर नेटवर्क के मंसूबों को नाकाम किया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान हथियारों और अन्य संदिग्ध सामग्री की बरामदगी भी हुई है।

हालांकि, हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका एक जैसी है या नहीं, यह जांच का विषय है। इसलिए किसी व्यक्ति को केवल हिरासत या पूछताछ के आधार पर दोषी मानना उचित नहीं होगा। अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई

सरकारी जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय करते हुए बहु-राज्यीय अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित सुरक्षा खतरों को रोकना और नेटवर्क से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जानकारी जुटाना था।

बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8, उत्तराखंड में 5, जबकि कर्नाटक, गुजरात और बिहार में तीन-तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में दो-दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही दिल्ली और कर्नाटक में नए मामले दर्ज किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इन मामलों को पहले से दर्ज मामलों के साथ जोड़कर नेटवर्क की व्यापक गतिविधियों की जांच कर रही हैं।

80 से अधिक FIR और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अब तक 80 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।

इन मामलों में अलग-अलग कानूनों के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट, NDPS एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी कानूनी धाराएं शामिल हैं।

इन धाराओं का इस्तेमाल मामले की प्रकृति और आरोपों के आधार पर किया जाता है। जांच एजेंसियां आरोपों से जुड़े डिजिटल, वित्तीय और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं।

शहजाद भट्टी से जुड़े मामलों में भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी सामने आ चुकी है। जून 2026 में NIA ने पंजाब और हरियाणा में 18 स्थानों पर तलाशी लेते हुए भट्टी से जुड़े तीन मामलों की जांच आगे बढ़ाई थी। एजेंसी ने डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों सहित विभिन्न सामग्री जब्त कर उसे तकनीकी और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था।

बरामद सामग्री को लेकर क्या कहा गया?

गृह मंत्री अमित शाह के बयान के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरों समेत अन्य सामग्री बरामद की है।

इन बरामदगी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बरामद सामग्री का वास्तविक स्रोत, उसका इस्तेमाल और उससे जुड़े लोगों की भूमिका जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क पर भारत में हिंसक गतिविधियों की साजिश और स्थानीय स्तर पर सहयोगियों को जोड़ने के आरोपों की जांच की जा रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित नेटवर्क ने अलग-अलग राज्यों में किस तरह संपर्क और सहयोग का तंत्र विकसित किया।

पहले भी सामने आ चुका है नेटवर्क का नाम

शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क को लेकर पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई सामने आती रही है। दिल्ली पुलिस ने जुलाई में भी कथित ISI-समर्थित नेटवर्क से जुड़े चार लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, संदिग्धों के पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क की जांच की गई थी।

इसी तरह महाराष्ट्र ATS ने जुलाई में शहजाद भट्टी से जुड़े कथित ऑनलाइन नेटवर्क की जांच के तहत राज्यभर में कार्रवाई की थी। एजेंसी ने ऐसे लोगों की गतिविधियों की जांच की थी, जिन पर सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क से संपर्क में आने का संदेह था।

असम में भी पुलिस की विशेष शाखा ने जुलाई में पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी। पुलिस के मुताबिक, मामले में डिजिटल संचार और कथित भर्ती गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।

इससे संकेत मिलता है कि एजेंसियां अलग-अलग राज्यों में सामने आए मामलों को एक व्यापक नेटवर्क के संभावित हिस्से के रूप में भी देख रही हैं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा पर विशेष ध्यान

15 अगस्त को देशभर में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए जाते हैं। राजधानी दिल्ली समेत राज्यों के प्रमुख शहरों में बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही संभावित खतरों की पहचान और रोकथाम पर विशेष ध्यान देती हैं।

इस बार भी स्वतंत्रता दिवस से पहले अलग-अलग राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। इसी क्रम में खुफिया सूचनाओं को राज्य पुलिस के साथ साझा करके संयुक्त कार्रवाई की गई।

ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य किसी संभावित घटना के होने का इंतजार करने के बजाय पहले से उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकना होता है। हालांकि, जांच पूरी होने तक आरोपों और संदिग्धों की भूमिका को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।

सीमा-पार आतंकवाद पर सरकार का सख्त रुख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है। उनके मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां देश में आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत होने से रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

भारत पहले भी पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई करता रहा है। शहजाद भट्टी से जुड़े मामलों में भी NIA, दिल्ली पुलिस, राज्य ATS और STF जैसी एजेंसियां अपने-अपने मामलों की जांच कर रही हैं।

इस तरह अलग-अलग एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना और राज्यों के साथ समन्वय करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क पर भी नजर

शहजाद भट्टी से जुड़े मामलों की जांच में सोशल मीडिया और डिजिटल संपर्क भी महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आया है। महाराष्ट्र ATS समेत कई एजेंसियों ने कथित ऑनलाइन संपर्कों की जांच की है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्धों के बीच किस तरह संपर्क हुआ, क्या किसी प्रकार की भर्ती या उकसावे की गतिविधि हुई और क्या डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया गया।

हालांकि, किसी सोशल मीडिया संपर्क मात्र को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्यों की पुष्टि और उनकी कानूनी प्रासंगिकता स्थापित करनी होगी।

आगे भी जारी रह सकती है कार्रवाई

सरकारी जानकारी में कहा गया है कि नेटवर्क को देशभर में खत्म करने के लिए समन्वित कार्रवाई जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में भी संदिग्ध गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ सकती है।

जांच के दौरान नए लोगों की भूमिका सामने आने पर संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। साथ ही, पहले से हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की संरचना और उसके कथित संपर्कों को समझने की कोशिश की जा सकती है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े मामलों ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि आधुनिक दौर में सीमा-पार आपराधिक और आतंकी नेटवर्क किस तरह डिजिटल माध्यमों और स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।

ऐसे नेटवर्क से निपटने के लिए केवल एक एजेंसी की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों, राज्य पुलिस, खुफिया तंत्र और साइबर सुरक्षा इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

इसके अलावा, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संपर्क और हथियारों की अवैध आपूर्ति जैसे पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि मौजूदा कार्रवाई को केवल गिरफ्तारियों तक सीमित न रखते हुए पूरे नेटवर्क की जांच के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ा सुरक्षा संदेश

स्वतंत्रता दिवस से पहले शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ हुई बहु-राज्यीय कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया है और 80 से अधिक FIR के साथ 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज की गई हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने इसे आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया है। वहीं, अलग-अलग राज्यों में पहले से चल रही जांचों से भी इस नेटवर्क के संभावित विस्तार की तस्वीर सामने आई है।

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मामलों में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका तय करना, उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करना और किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को समय रहते रोकना है। इसके साथ ही, स्वतंत्रता दिवस समारोहों को सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

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