UGC-NET की 3 परीक्षाएं रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- छात्रों को भुगतनी पड़ती है सजा
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नई दिल्ली: UGC-NET जून 2026 की तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दोबारा आयोजित कराने के फैसले को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि गलती NTA करती है, लेकिन उसकी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ती है।
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र से जुड़ी खामियां सामने आने के बाद NTA ने तीन विषयों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इन विषयों में अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र शामिल हैं। NTA के अनुसार, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषाई और अनुवाद संबंधी खामियां सामने आई थीं। इसके बाद इन तीन विषयों की परीक्षा को दोबारा कराने का फैसला किया गया।
तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला
NTA ने UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ समिति ने मूल प्रश्नपत्रों की समीक्षा के दौरान कई तरह की गड़बड़ियां पाईं। इनमें तथ्यात्मक गलतियां, भाषा संबंधी त्रुटियां, अनुवाद की समस्याएं और प्रश्नों की पुनरावृत्ति जैसी शिकायतें शामिल थीं।
NTA का कहना है कि इन खामियों को केवल कुछ प्रश्न हटाकर या उत्तर कुंजी में सुधार करके दूर करना पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए संबंधित तीन विषयों के अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन विषयों की पुनर्परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रभावित अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
राहुल गांधी ने उठाए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
तीन विषयों की परीक्षाएं दोबारा कराने के फैसले के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की गलती का असर उन छात्रों पर पड़ता है, जिन्होंने महीनों तक तैयारी की होती है।
राहुल गांधी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यवस्था की जिम्मेदारी एजेंसी और सरकार की होती है। ऐसे में यदि प्रश्नपत्र या परीक्षा संचालन में खामी सामने आती है, तो उसका असर सीधे अभ्यर्थियों की तैयारी और उनके भविष्य पर पड़ता है।
उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया। राहुल गांधी के मुताबिक, छात्रों को बार-बार परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है, जबकि परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था को अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
छात्रों की तैयारी पर पड़ता है असर
UGC-NET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं। कई उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा असिस्टेंट प्रोफेसर बनने, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) पाने या पीएचडी से जुड़े अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण होती है। NTA के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार UGC-NET का उपयोग JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर पद की पात्रता और कुछ श्रेणियों में पीएचडी प्रवेश से जुड़ी पात्रता निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
ऐसे में परीक्षा की तारीख में बदलाव या किसी विषय की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त तैयारी और समय की चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखना भी जरूरी है। इसी वजह से NTA ने तीन विषयों के प्रश्नपत्रों की समीक्षा के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है।
प्रश्नपत्रों में मिलीं कई खामियां
UGC-NET के तीन प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से भी शिकायतें सामने आई थीं। अंग्रेजी विषय में कुछ प्रश्नों के दोहराए जाने की बात सामने आई, जबकि समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र को लेकर भाषा और वर्तनी संबंधी सवाल उठे थे। इन शिकायतों के बाद मामले की समीक्षा की गई।
विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद NTA ने माना कि तीन विषयों में सामने आई समस्याओं की प्रकृति ऐसी थी कि केवल उत्तर कुंजी में बदलाव से स्थिति को ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए पुनर्परीक्षा को उचित विकल्प माना गया।
इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को एक और मौका मिलेगा, लेकिन साथ ही परीक्षा की तैयारी कर चुके छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा में शामिल होना अतिरिक्त जिम्मेदारी भी होगी।
NTA की भूमिका पर लगातार चर्चा
UGC-NET का आयोजन NTA की जिम्मेदारी है। एजेंसी देश में कई महत्वपूर्ण प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। ऐसे में किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र से जुड़ी खामियां सामने आने पर एजेंसी की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर UGC-NET जून 2026 से जुड़े परीक्षा कार्यक्रम, एडमिट कार्ड और अन्य सूचनाएं जारी की जाती रही हैं।
हालांकि, इस मामले में NTA ने समीक्षा के बाद तीन विषयों के लिए पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य प्रभावित अभ्यर्थियों को समान अवसर देना और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
सरकार पर भी राहुल गांधी ने साधा निशाना
राहुल गांधी ने केवल NTA तक अपनी आलोचना सीमित नहीं रखी, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाते रहे हैं। UGC-NET के ताजा मामले में भी उन्होंने छात्रों की परेशानी को केंद्र में रखते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
उनका तर्क है कि छात्र अपनी पढ़ाई और तैयारी में लंबा समय लगाते हैं। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में होने वाली किसी भी गंभीर गड़बड़ी का प्रभाव केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों की आगे की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
दोबारा परीक्षा से प्रभावित छात्रों को मिलेगा अवसर
NTA के फैसले के अनुसार अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रभावित अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा।
वहीं, UGC-NET के बाकी 84 विषयों की परीक्षा इस फैसले से प्रभावित नहीं होगी। यानी पुनर्परीक्षा का निर्णय केवल उन तीन विषयों तक सीमित रखा गया है, जिनके प्रश्नपत्रों में विशेषज्ञ समीक्षा के दौरान गंभीर खामियां सामने आईं।
इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जिन्हें दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। हालांकि, अब उनकी नजर नई परीक्षा तारीख और उससे जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर रहेगी।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बनाए रखना चुनौती
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और समय पर सही सूचना उपलब्ध कराना इसके प्रमुख हिस्से हैं।
UGC-NET मामले में पुनर्परीक्षा का फैसला इसी दिशा में एक सुधारात्मक कदम के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, इसके साथ यह भी जरूरी है कि भविष्य में ऐसी खामियां दोबारा सामने न आएं।
इसके लिए प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी समीक्षा, अनुवाद, प्रूफरीडिंग और अंतिम स्तर की जांच तक प्रत्येक चरण में गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना आवश्यक होगा। इससे परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
छात्रों के हित को लेकर बहस तेज
UGC-NET की तीन परीक्षाएं रद्द होने के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गलती का खामियाजा छात्रों को क्यों उठाना पड़े। राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए NTA और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
दूसरी ओर, NTA ने विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के आधार पर प्रभावित तीन विषयों की पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अब इस फैसले का अगला चरण सितंबर में होने वाली परीक्षाओं और उनके परिणामों से जुड़ा होगा।
कुल मिलाकर, UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों की परीक्षाओं को लेकर सामने आई गड़बड़ियों ने परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और जवाबदेही पर चर्चा को फिर से सामने ला दिया है। राहुल गांधी ने जहां इसे लेकर केंद्र सरकार और NTA को घेरा है, वहीं NTA ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनर्परीक्षा का रास्ता चुना है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि दोबारा होने वाली परीक्षा निष्पक्ष और सुचारु तरीके से आयोजित हो तथा अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी समय पर मिलती रहे।

