कानपुर में ‘गो ग्रीन कानपुर’ अभियान हुआ शुरू, पौधरोपण के साथ स्वस्थ और खुशहाल समाज का लिया संकल्प

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Digital UP News

कानपुर। पर्यावरण संरक्षण, सकारात्मक जीवनशैली और सामुदायिक खुशहाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कानपुर में ‘गो ग्रीन कानपुर’ कैंपेन का शुभारंभ किया गया। मुस्कुराए कानपुर की इस पहल की शुरुआत आरोहम हैप्पीनेस सेंटर में पौधारोपण के साथ हुई। वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य एवं कानपुर हेल्थ कमेटी की संरक्षिका डॉ. वंदना पाठक, हैप्पीनेस होम के संस्थापक डॉ. उमेश पालीवाल और मुस्कुराए कानपुर के संस्थापक डॉ. सिधांशु राय ने संयुक्त रूप से पौधा रोपित कर अभियान की शुरुआत की।

इस अवसर पर आयोजित हैप्पीनेस टॉक में पर्यावरण, मानसिक स्वास्थ्य, वरिष्ठजनों के साथ संवाद, सकारात्मक सोच और सामुदायिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए केवल भौतिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव, सकारात्मक सोच और आपसी अपनापन भी जरूरी है।

पौधारोपण से हुआ अभियान का शुभारंभ

‘गो ग्रीन कानपुर’ अभियान की शुरुआत पौधारोपण के जरिए की गई। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई। अभियान का उद्देश्य हरित पर्यावरण के साथ-साथ लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है।

इस मौके पर ‘एक पेड़ मां के नाम, एक पेड़ परिवार के नाम’ की भावना के साथ भी पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पौधारोपण को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखते हुए पौधों की देखभाल और संरक्षण का संकल्प लेने पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि पेड़ पर्यावरण को संतुलित रखने के साथ मानव जीवन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए अधिक से अधिक पौधे लगाना और उन्हें संरक्षित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आयुर्वेद और पेड़ों के संबंध पर डॉ. वंदना पाठक ने रखे विचार

हैप्पीनेस टॉक के दौरान वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य एवं कानपुर हेल्थ कमेटी की संरक्षिका डॉ. वंदना पाठक ने पेड़ों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पेड़ आयुर्वेदिक औषधियों का महत्वपूर्ण आधार हैं और प्रकृति मानव जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्होंने खुशी और मानसिक संतुलन को भी आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। डॉ. पाठक ने कहा कि परिवार में रह रहे वरिष्ठजनों के लिए समय निकालना और उनसे बातचीत करना भी खुशी देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि परिवार के बुजुर्गों के साथ संवाद बढ़ाया जाए। उनके साथ कुछ समय बिताना और उनकी बात सुनना उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इस तरह परिवार के भीतर सकारात्मक वातावरण बनाने में भी मदद मिलती है।

प्रकृति से जुड़कर खुशहाल नागरिक बनाने का उद्देश्य

हैप्पीनेस होम के संस्थापक डॉ. उमेश पालीवाल ने कहा कि हैप्पीनेस सेंटर का उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ते हुए उन्हें खुशहाल और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में काम करना है।

उन्होंने कहा कि आज किया गया पौधारोपण इसी सोच की दिशा में एक कदम है। उनके मुताबिक, प्रकृति के साथ जुड़ाव व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे और कम से कम एक पौधे की देखभाल का संकल्प ले, तो शहर के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

दूसरों को खुशी देना भी एक कला: डॉ. सिधांशु राय

मुस्कुराए कानपुर के संस्थापक डॉ. सिधांशु राय ने कहा कि दूसरों को खुशी देना भी एक कला है और इससे व्यक्ति को स्वयं भी खुशी मिलती है। उन्होंने समाज में सकारात्मकता और अपनापन बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि समाज के अधिकांश लोग सकारात्मक और अच्छे भाव रखते हैं, लेकिन वर्तमान समय में लोगों को अपनापन और संवाद की आवश्यकता है। ऐसे में सामुदायिक पहल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ. राय ने पर्यटन की दृष्टि से आरोहम को विकसित करने की बात भी कही। उनका मानना है कि यदि ऐसे केंद्रों को पर्यावरण, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ा जाए तो शहर के लोगों के लिए यह उपयोगी स्थान बन सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक खुशहाली पर जोर

कार्यक्रम के दौरान मुकेश पालीवाल ने हैप्पीनेस सेंटर की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र कानपुर में मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मकता और सामुदायिक खुशहाली से जुड़े प्रयासों के लिए एक अनूठा मंच है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों के जीवन में तनाव और व्यस्तता बढ़ी है। ऐसे में सकारात्मक गतिविधियों, प्रकृति से जुड़ाव और आपसी संवाद के लिए स्थान उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक खुशहाली से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

दिव्यांबर वैलनेस सेंटर का किया भ्रमण

कार्यक्रम के अवसर पर मुस्कुराए कानपुर की टीम ने प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री विमल झाझरिया द्वारा बेंगलुरु और हरिद्वार की तर्ज पर विकसित किए जा रहे दिव्यांबर वैलनेस सेंटर का हैप्पीनेस विजिट किया।

इस दौरान टीम के सदस्यों ने सेंटर की परिकल्पना और वहां विकसित की जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मुस्कुराए कानपुर की ओर से कहा गया कि संगठन दिव्यांबर वैलनेस सेंटर के सामाजिक सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा।

वक्ताओं के अनुसार, ऐसे केंद्र लोगों को स्वास्थ्य, प्रकृति और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही, इनके माध्यम से शहर में वेलनेस और पर्यटन से जुड़े अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।

‘गो ग्रीन कानपुर’ को लेकर लोगों ने साझा किए विचार

कार्यक्रम में मौजूद रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रतन श्रीवास्तव और अमित अग्रवाल ने ‘गो ग्रीन कानपुर’ को मुस्कुराए कानपुर की प्रमुख पहल बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

वहीं, राजेश ग्रोवर ने कहा कि अभियान का उद्देश्य हरित पर्यावरण और खुशहाल जीवन का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी या संस्थागत जिम्मेदारी न मानकर प्रत्येक नागरिक को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।

नजम हमराज ने दिव्यांबर वैलनेस सेंटर को शहर के लिए एक उपयोगी सौगात बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रयास कानपुर में स्वास्थ्य, प्रकृति और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।

कई लोगों ने किया पौधारोपण

अभियान के दौरान कई गणमान्य लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पौधे लगाए। इस अवसर पर अमित अग्रवाल, डॉ. हेमंत मोहन, अनूप द्विवेदी, डॉ. ओम प्रकाश आनंद, डॉ. जीएल श्रीवास्तव, अखिल त्यागी, दिनेश वाष्र्णेय, मीना मेहरोत्रा, अरविंद शुक्ला, आरिफ मार्टिन, शाहिद और कामरान सहित अन्य लोगों ने पौधारोपण में भाग लिया।

कार्यक्रम में पौधों को परिवार और मातृभाव से जोड़ते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम, एक पेड़ परिवार के नाम’ का संदेश दिया गया। इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक जुड़ाव से जोड़ने का प्रयास किया गया।

स्वस्थ समाज के लिए पर्यावरण और खुशी दोनों जरूरी

कुल मिलाकर, ‘गो ग्रीन कानपुर’ अभियान के शुभारंभ के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक खुशहाली को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ समाज के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण के साथ मानसिक सकारात्मकता और पारिवारिक संवाद भी जरूरी है।

पौधारोपण से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करने के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है। वहीं, हैप्पीनेस सेंटर और वैलनेस सेंटर जैसी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य, सकारात्मकता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

आने वाले समय में यदि ‘गो ग्रीन कानपुर’ अभियान के तहत अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ा जाता है और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाती है, तो यह पहल शहर के हरित वातावरण को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। साथ ही, प्रकृति और खुशी को एक-दूसरे से जोड़ने वाला यह संदेश कानपुर में स्वस्थ और जिम्मेदार समाज की दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

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