कानपुर में महिलाओं ने मनाया हरियाली तीज उत्सव, सावन के गीतों से भक्तिमय हुआ केशव मधुवन
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: पवित्र श्रावण मास के अवसर पर कानपुर के केशव नगर स्थित रामेष्ट धाम केशव मधुवन वाटिका में महिलाओं ने हरियाली तीज उत्सव उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया। केशव मधुवन सेवा समिति, केशव नगर की महिला सदस्यों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सावन की कजरी, हरियाली गीत और भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का आयोजन श्रीमती राजेश्वरी दुबे के मार्गदर्शन में किया गया।
हरियाली तीज भारतीय संस्कृति और सावन की परंपराओं से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से हरे रंग के परिधान पहनकर, हरी चूड़ियां धारण कर और मेहंदी लगाकर उत्सव में शामिल होती हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने हरे परिधानों और हरी चूड़ियों के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
सावन के गीतों से गूंजा पूरा परिसर
कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल के बीच हुई। इसके बाद महिलाओं ने युगल सरकार के भजनों के साथ सावन की कजरियां और पारंपरिक हरियाली गीत प्रस्तुत किए। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, महिलाओं की सामूहिक प्रस्तुतियों से केशव मधुवन वाटिका का वातावरण और अधिक उल्लासपूर्ण हो गया।
महिलाओं ने सावन ऋतु से जुड़े पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति देकर प्रकृति, भक्ति और भारतीय लोक संस्कृति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। गीतों में सावन की बारिश, झूले, धार्मिक आस्था और प्रकृति के मनोहारी स्वरूप का वर्णन देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए पारंपरिक गीतों ने उपस्थित महिलाओं को सावन की लोक परंपराओं से जोड़े रखा। भजनों और गीतों की स्वर लहरियों के बीच महिलाओं ने उत्सव का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं।
हरे परिधानों में नजर आईं महिलाएं
हरियाली तीज की विशेषता के अनुरूप कार्यक्रम में अधिकांश महिलाएं हरे रंग के परिधान में पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने हरी चूड़ियां पहन रखी थीं और हाथों में लाल रंग की मेहंदी सजाई थी। इस पारंपरिक श्रृंगार ने कार्यक्रम की सुंदरता को और बढ़ा दिया।
महिलाओं का कहना था कि हरियाली तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा उत्सव भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी भारतीय लोक संस्कृति और पर्वों की परंपराओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।
हरे रंग को सावन, हरियाली और प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए तीज के अवसर पर हरे परिधान पहनने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। कार्यक्रम में भी इस परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली।
भक्ति और लोक संस्कृति का रहा संगम
हरियाली तीज उत्सव के दौरान धार्मिक भजनों के साथ लोकगीतों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। महिलाओं ने शिव शंकर से जुड़े भजनों के साथ सावन की रिमझिम फुहार और झूलों से जुड़े गीत प्रस्तुत किए।
इसके अलावा काशी, सरयू और सावन ऋतु से संबंधित पारंपरिक गीतों ने कार्यक्रम में धार्मिक और सांस्कृतिक रंग भर दिया। गीतों के माध्यम से महिलाओं ने सावन की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
एक ओर जहां भजनों से वातावरण में आध्यात्मिकता का भाव दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर कजरी और हरियाली गीतों ने कार्यक्रम में लोक संस्कृति की रंगत बढ़ा दी। इस प्रकार पूरा आयोजन भक्ति, संगीत और सामाजिक मेलजोल का सुंदर उदाहरण बन गया।
महिलाओं ने साझा कीं सावन की खुशियां
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने सामूहिक रूप से सावन की खुशियां मनाईं। इस दौरान एक-दूसरे से संवाद करने के साथ पारंपरिक गीतों और भजनों में सहभागिता की। महिलाओं ने उत्सव को यादगार बनाने के लिए सामूहिक रूप से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था। बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सावन से जुड़े रीति-रिवाजों को जीवंत बनाए रखने का संदेश भी दिया गया।
आयोजन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिला सहभागिता समाज में परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा
हरियाली तीज जैसे त्योहार भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मानव जीवन के बीच संबंध को भी दर्शाते हैं। सावन के महीने में हरियाली बढ़ने के साथ वातावरण में नई ऊर्जा दिखाई देती है। ऐसे में तीज का पर्व महिलाओं के लिए उत्सव, भक्ति और सामाजिक मेलजोल का अवसर लेकर आता है।
कार्यक्रम में महिलाओं का पारंपरिक परिधान, मेहंदी, चूड़ियां और सावन के गीत इस सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर रहे थे। आयोजकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने और पारंपरिक लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
आयोजन में महिलाओं की रही प्रमुख भूमिका
केशव मधुवन सेवा समिति की महिला सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। श्रीमती राजेश्वरी दुबे के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने अपनी प्रस्तुतियों और सहभागिता से पूरे आयोजन को विशेष बनाया।
कार्यक्रम में श्रीमती राजेश्वरी दुबे के साथ रेनू अवस्थी, प्रेमलता सिंह, बेबी शुक्ला, पूनम कुमार, जया त्रिपाठी, प्रीती, कनिका, मधु मिश्रा, विजय लक्ष्मी, पिंकी त्रिवेदी, रेखा गुप्ता, जयंती बाजपेई, सीमा शुक्ला, मुन्नी अवस्थी, मोहनी बाजपेई, प्रिया, कपूरी, बीना, अंजू भदौरिया सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
सभी ने उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सावन के पारंपरिक गीतों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
सांस्कृतिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक सहभागिता
इस तरह के आयोजन स्थानीय स्तर पर सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। धार्मिक पर्वों के अवसर पर सामूहिक कार्यक्रम आयोजित होने से लोगों को एक साथ आने और अपनी परंपराओं को साझा करने का अवसर मिलता है।
हरियाली तीज उत्सव में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से भाग लेकर सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश दिया। साथ ही, पारंपरिक गीतों और भजनों की प्रस्तुति के जरिए लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया गया।
कुल मिलाकर, केशव मधुवन वाटिका में आयोजित हरियाली तीज उत्सव श्रद्धा, संगीत, लोक संस्कृति और महिला सहभागिता का सुंदर संगम रहा। सावन के गीतों और भजनों से सजा यह आयोजन महिलाओं के लिए आनंद और सांस्कृतिक जुड़ाव का विशेष अवसर बना। कार्यक्रम ने भारतीय परंपराओं और सावन की लोक संस्कृति को एक साथ प्रस्तुत करते हुए उत्सव के माहौल को यादगार बना दिया।

