कानपुर में आयोजित किया गया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, प्रतिभा शुक्ला ने विस्थापित परिवारों को किया नमन
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले परिवारों तथा जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही, विभाजन से प्रभावित परिवारों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार की बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला रहीं। इस दौरान विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों की स्मृतियों को सामने लाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उस दौर की ऐतिहासिक और मानवीय परिस्थितियों से परिचित कराना रहा। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को याद करने का उद्देश्य समाज में वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और संवेदनशीलता को मजबूत करना है।
रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर किया नमन
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रतिभा शुक्ला सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। सभी ने वीरांगना को नमन कर उनके योगदान को याद किया।
इसके बाद अतिथियों ने राजकीय अभिलेखागार द्वारा संरक्षित दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में वर्ष 1947 के विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और चित्रों को प्रदर्शित किया गया था।
इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन और विभाजन के दौर से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
लघु फिल्म के जरिए सामने आया विस्थापन का दर्द
कार्यक्रम में एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इसमें विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों की कठिनाइयों, पलायन के दौरान सामने आई चुनौतियों और परिवारों के संघर्ष को दर्शाया गया।
फिल्म के माध्यम से उन लोगों की परिस्थितियों को सामने लाने का प्रयास किया गया, जिन्हें विभाजन के बाद अपना घर-बार छोड़कर नए स्थानों पर जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे इतिहास के मानवीय पक्ष को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
प्रदर्शनी में तत्कालीन घटनाओं से जुड़े अभिलेखों और दुर्लभ तस्वीरों को भी प्रदर्शित किया गया। इन तस्वीरों के माध्यम से विस्थापन और उस दौर की सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी दी गई।
विभाजन केवल भूभाग का बंटवारा नहीं था : प्रतिभा शुक्ला
मुख्य अतिथि प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि विभाजन का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन केवल भूभाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने असंख्य परिवारों को उनकी जड़ों, घरों और परिचित परिवेश से अलग कर दिया।
उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा सहने वाले लोगों का संघर्ष, धैर्य और विपरीत परिस्थितियों में खुद को फिर से स्थापित करने का प्रयास देश के लिए प्रेरणा है। इसलिए इतिहास के इस अध्याय से सीख लेते हुए सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास की जानकारी देने के साथ यह भी समझाना जरूरी है कि देश की एकता और सामाजिक समरसता कितनी महत्वपूर्ण है।
लाखों लोगों को करना पड़ा विस्थापन
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्ष 1947 का विभाजन मानव इतिहास की बड़ी विस्थापन त्रासदियों में शामिल रहा। उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर और परिचित परिवेश छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना पड़ा।
वक्ताओं ने कहा कि विस्थापन के दौरान लोगों ने अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। परिवार बिखरे और लोगों को नए स्थानों पर जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। इसके बावजूद विस्थापित परिवारों ने मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित किया।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विस्थापन के बाद भारत आए परिवारों ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नई पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराना जरूरी : सुरेंद्र मैथानी
विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी में लाखों लोगों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उनके संघर्ष और साहस को याद करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को जानने से नई पीढ़ी को देश की एकता और सामाजिक समरसता के महत्व को समझने में मदद मिलती है। इसलिए ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से इतिहास के मानवीय पक्ष को लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।
विधायक नीलिमा कटियार ने भी नई पीढ़ी को विभाजन की वास्तविकता और उससे जुड़ी मानवीय पीड़ा से परिचित कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया जाना चाहिए।
संघर्ष और योगदान को याद करने का अवसर : अरुण पाठक
विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपना जीवन दोबारा खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपना सब कुछ खोने के बाद नए स्थानों पर जीवन शुरू किया, उन्होंने आगे चलकर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके संघर्ष और योगदान को याद किया जाना जरूरी है।
इतिहास से सीखने की जरूरत : जिलाधिकारी
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभाजन की विभीषिका भारतीय इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत होना चाहिए, ताकि समाज भविष्य के लिए बेहतर सीख ले सके।
उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य समाज में दूरी बढ़ाना नहीं, बल्कि आपसी समझ और सामाजिक एकता को मजबूत करना होना चाहिए। साथ ही, समाज को हमेशा सजग रहना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत की पीड़ा को सामने लाना नहीं है। बल्कि इससे सीख लेकर आपसी सद्भाव, संवेदनशीलता और एकता के मूल्यों को मजबूत करना भी आवश्यक है।
विस्थापित परिवारों ने साझा की अपनी स्मृतियां
कार्यक्रम में विभाजन से प्रभावित परिवार से जुड़े महेश मेघानी ने अपने परिवार की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि विभाजन के दौरान उनके परिवार को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
घर-बार छोड़ने के बाद परिवार ने मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भारत में खुद को फिर से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देकर देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाई।
इसी तरह सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड ने विभाजन को इतिहास की दुखद घटना बताते हुए कहा कि उस दौर में अनेक परिवारों को अपनी संपत्ति और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोगों ने हार नहीं मानी और परिश्रम के जरिए जीवन को दोबारा व्यवस्थित किया।
विभाजन प्रभावित परिवारों के परिजन सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रतिभा शुक्ला और उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड, बाबा मोहन सिंह, गुरमीत सिंह, महेश मेघानी, लक्ष्मण दास अमरनानी, नरेश टेकवानी, दिलीप बालानी, कुलदीप पारवानी, मनोहर शादीजा, खूबचंद खट्टर और किसन जागरणी सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया।
सम्मान के दौरान प्रभावित परिवारों के संघर्ष, धैर्य और विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा करने की भावना को याद किया गया।
कुल मिलाकर, कानपुर में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम ने इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को याद करने के साथ सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया। कार्यक्रम में दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी, लघु फिल्म और पुस्तकों के माध्यम से विभाजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा गया। वहीं, प्रभावित परिवारों के परिजनों को सम्मानित कर उनके संघर्ष और योगदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इतिहास की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना ही भविष्य की दिशा होनी चाहिए।

