लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक ने रचा इतिहास, 10 करोड़ EXIM कंटेनरों की ट्रैकिंग पूरी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से LDB ने देश में 10 करोड़ आयात-निर्यात (EXIM) कंटेनरों को ट्रैक किया है। यह उपलब्धि भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते प्रभाव और कंटेनर आवाजाही की बेहतर निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

LDB तकनीक आधारित ट्रैकिंग प्रणाली के माध्यम से देशभर में EXIM कंटेनरों की आवाजाही की दृश्यता उपलब्ध कराता है। इसके जरिए लॉजिस्टिक्स श्रृंखला से जुड़े हितधारकों को कंटेनरों की स्थिति, आवाजाही और संभावित देरी से संबंधित जानकारी मिलती है। इससे कारोबारियों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।

10 करोड़ कंटेनरों की ट्रैकिंग बड़ी उपलब्धि

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य देश में EXIM कंटेनरों की आवाजाही को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना था। अब तक 10 करोड़ कंटेनरों को ट्रैक किया जाना इस बात का संकेत है कि यह प्लेटफॉर्म भारतीय लॉजिस्टिक्स व्यवस्था का महत्वपूर्ण डिजिटल हिस्सा बन चुका है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि को भारत की लॉजिस्टिक्स यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि LDB के माध्यम से 10 करोड़ कंटेनरों की ट्रैकिंग यह दिखाती है कि तकनीक भारतीय लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को सरल, तेज और अधिक कुशल बनाने में मदद कर रही है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने, वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

RFID तकनीक से कंटेनरों की निगरानी

LDB भारत के EXIM कंटेनरों की आवाजाही पर निगरानी के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसके साथ ही इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा और क्लाउड तकनीक जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों का भी उपयोग किया जाता है।

इन तकनीकों के माध्यम से कंटेनरों की आवाजाही को बंदरगाहों, रेलवे नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और राजमार्गों पर ट्रैक किया जाता है। इससे लॉजिस्टिक्स श्रृंखला में कंटेनर की स्थिति की तत्काल जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कारोबारियों को कंटेनर की आवाजाही के बारे में अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने की आवश्यकता कम होती है। एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के कारण लॉजिस्टिक्स संचालन की निगरानी अधिक सुविधाजनक हो जाती है।

19 पोर्ट और 32 कंटेनर टर्मिनल नेटवर्क में शामिल

LDB का नेटवर्क देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक फैला हुआ है। इसमें 19 पोर्ट और 32 कंटेनर टर्मिनल शामिल हैं। इसके अलावा 103 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (ICD) और 439 कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFS) को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है।

प्लेटफॉर्म का नेटवर्क खाली यार्ड, पार्किंग प्लाजा और औद्योगिक क्षेत्रों तक भी विस्तारित है। इसके अलावा 89 विनिर्माण विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), 5,569 रेलवे स्टेशन, 269 टोल प्लाजा और 3 एकीकृत चेक पोस्ट भी इसके दायरे में शामिल हैं।

इस व्यापक नेटवर्क की वजह से कंटेनरों की आवाजाही को अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तरीके से देखा और समझा जा सकता है।

लॉजिस्टिक्स में देरी और बाधाओं की पहचान

LDB केवल कंटेनर की लोकेशन बताने तक सीमित नहीं है। यह प्लेटफॉर्म ठहरने के समय (dwell time), पारगमन समय (transit time) और पोर्ट तथा टर्मिनल के प्रदर्शन से संबंधित विश्लेषण भी उपलब्ध कराता है।

इस डेटा की मदद से लॉजिस्टिक्स से जुड़े हितधारक यह समझ सकते हैं कि कंटेनर को किसी स्थान पर कितनी देर रुकना पड़ा और पूरी यात्रा में कितना समय लगा। इसके अलावा किसी खास पोर्ट, टर्मिनल या मार्ग पर बार-बार देरी होने की स्थिति में संभावित बाधाओं की पहचान भी की जा सकती है।

इस प्रकार डेटा आधारित विश्लेषण लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने में मदद कर सकता है।

LDB 2.0 से बढ़ी प्लेटफॉर्म की क्षमता

सितंबर 2025 में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने LDB 2.0 लॉन्च किया था। इसके जरिए पुराने प्लेटफॉर्म की क्षमताओं को और विस्तार दिया गया।

LDB 2.0 में भारत के निर्यात कंटेनरों की हाई-सी ट्रैकिंग और मल्टीमॉडल शिपमेंट की दृश्यता जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसका उद्देश्य कंटेनर के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के दौरान अलग-अलग परिवहन माध्यमों की जानकारी को बेहतर तरीके से एकीकृत करना है।

इससे भारत के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में अपने माल की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

हर महीने 1.5 करोड़ से ज्यादा कंटेनर सर्च

LDB प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके जरिए हर महीने औसतन 1.5 करोड़ से अधिक कंटेनर सर्च किए जाते हैं।

कंटेनर ट्रैकिंग की सुविधा एकल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध है। इससे लॉजिस्टिक्स से जुड़े हितधारक एक ही स्थान से कंटेनरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इस डिजिटल सुविधा से आयातकों, निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और अन्य हितधारकों को कंटेनर की आवाजाही पर नजर रखने में मदद मिलती है। साथ ही, संभावित देरी के बारे में पहले से जानकारी मिलने पर वे अपनी लॉजिस्टिक्स योजना में बदलाव कर सकते हैं।

विश्व बैंक के LPI में भी भूमिका की पहचान

भारत के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन को बेहतर बनाने में LDB की भूमिका को विश्व बैंक के Logistics Performance Index (LPI) में भी मान्यता मिली है।

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बेहतर ट्रैकिंग और डेटा आधारित निगरानी से परिवहन व्यवस्था की पारदर्शिता और पूर्वानुमान क्षमता बढ़ सकती है। यही कारण है कि दुनिया भर में लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डिजिटल तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

भारत के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद की उम्मीद

भारत में लॉजिस्टिक्स लागत और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता लंबे समय से नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय रही है। ऐसे में कंटेनर की आवाजाही पर बेहतर नजर रखने वाली डिजिटल प्रणाली लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में सुधार की दिशा में उपयोगी हो सकती है।

जब किसी कंटेनर की स्थिति और यात्रा का डेटा उपलब्ध होता है, तो कंपनियां परिवहन की बेहतर योजना बना सकती हैं। साथ ही, बार-बार होने वाली देरी या किसी खास मार्ग पर आने वाली समस्याओं को डेटा के आधार पर पहचाना जा सकता है।

इससे समय की बचत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिल सकती है। हालांकि, लॉजिस्टिक्स लागत में वास्तविक कमी कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है।

NLDSIL निभा रहा है महत्वपूर्ण भूमिका

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक का संचालन NICDC Logistics Data Services Limited (NLDSIL) से जुड़ा है। यह संस्था लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने पर काम करती है।

NLDSIL लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक के अलावा Unified Logistics Interface Platform (ULIP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जुड़ा है। इन प्लेटफॉर्म का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना है।

NLDSIL की स्थापना 30 दिसंबर 2015 को भारतीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के इस्तेमाल के माध्यम से दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।

यह भारत सरकार का जापानी IT कंपनी NEC Corporation के साथ संयुक्त उद्यम है। भारत सरकार की ओर से इसमें राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) का प्रतिनिधित्व है।

आगे नई तकनीकों पर जोर

NLDSIL के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने 10 करोड़ कंटेनरों की ट्रैकिंग को LDB की यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव बताया।

उन्होंने कहा कि कंटेनर आवाजाही में दृश्यता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुआ LDB अब भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है।

आगे भी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के लिए डेटा एनालिटिक्स और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुसार डिजिटल समाधान उपलब्ध कराना है।

विकसित भारत के लक्ष्य में लॉजिस्टिक्स की अहम भूमिका

भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनाने के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जरूरी है। किसी उत्पाद को फैक्ट्री से बंदरगाह और फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में समय और लागत दोनों महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे में कंटेनर ट्रैकिंग और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स की बेहतर दृश्यता कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप निर्यातकों को अपने माल की आवाजाही पर बेहतर नियंत्रण मिल सकता है।

2016 से अब तक 10 करोड़ EXIM कंटेनरों की ट्रैकिंग LDB की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। RFID, IoT, बिग डेटा और क्लाउड जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से यह प्लेटफॉर्म भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ा रहा है। वहीं, LDB 2.0 और भविष्य की नई तकनीकी पहलों से इसकी क्षमताओं के और विस्तार की उम्मीद है।

भारत के बढ़ते व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भूमिका को देखते हुए आने वाले वर्षों में ऐसी डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्रणालियों का महत्व और बढ़ सकता है।

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