कानपुर देहात में 12 साल का छात्र पहुंचा पुलिस चौकी, बोला- स्कूल में पढ़ाई नहीं होती, टीचर फोन चलाती हैं

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Digital UP News Desk

कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला 12 वर्षीय छात्र अपनी शिकायत लेकर सीधे पुलिस चौकी पहुंच गया। छात्र ने पुलिसकर्मियों से कहा कि स्कूल में ठीक से पढ़ाई नहीं होती। शिक्षिकाएं फोन चलाने में व्यस्त रहती हैं, जबकि बच्चे स्कूल के ग्राउंड में खेलते रहते हैं। इतना ही नहीं, छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि बड़े बच्चे उसे पीटते हैं और शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता।

मामला कानपुर देहात के रसधान गांव स्थित सरकारी कंपोजिट स्कूल से जुड़ा है। छात्र की शिकायत सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। इसके बाद एक हेड कांस्टेबल छात्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचा, जहां पुलिस की मौजूदगी में छात्र और शिक्षिका के बीच बातचीत हुई। इस दौरान शिक्षिका द्वारा छात्र को डांटने और मारने की धमकी देने का आरोप सामने आया। पुलिस ने शिक्षिका को समझाते हुए छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करने की हिदायत दी।

घटना 10 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। इसका वीडियो गुरुवार को सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आशीष पांडेय के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने स्कूल पहुंचकर जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानाध्यापक अनुपम कुमार और शिक्षिका सायमा खां को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

यूनिफॉर्म पहनकर पुलिस चौकी पहुंचा छात्र

रसधान निवासी संजीव मिश्रा खेती करते हैं। उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें चार बेटे और एक बेटी है। 12 वर्षीय माधव चौथे नंबर का बेटा है। वह गांव के ही सरकारी कंपोजिट स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता है।

10 अगस्त को माधव स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर रसधान पुलिस चौकी पहुंच गया। अचानक एक छोटे बच्चे को पुलिस चौकी में देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। उन्होंने छात्र से चौकी आने की वजह पूछी तो उसने बताया कि वह अपने स्कूल की शिकायत करने आया है।

माधव ने पुलिसकर्मियों को बताया कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल ठीक नहीं है। उसके मुताबिक, शिक्षिकाएं पढ़ाने के बजाय फोन चलाने में व्यस्त रहती हैं। वहीं, कई बच्चे पढ़ाई करने के बजाय स्कूल के ग्राउंड में खेलते रहते हैं। छात्र ने यह भी बताया कि बड़े छात्र उसे आए दिन परेशान करते हैं और मारते हैं।

माधव का कहना था कि उसने अपनी समस्या स्कूल में बताने की कोशिश की, लेकिन उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे वह काफी परेशान हो गया था। उसने पुलिसकर्मियों के सामने अपनी चिंता जाहिर करते हुए पूछा कि अगर स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होगी तो उसके भविष्य का क्या होगा।

छात्र ने यह भी बताया कि जिस समय वह स्कूल से पुलिस चौकी के लिए निकला था, उस समय भी शिक्षिका फोन पर बात कर रही थीं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया और एक हेड कांस्टेबल छात्र को साथ लेकर स्कूल पहुंच गया।

पुलिस के सामने शिक्षिका से हुई बातचीत

हेड कांस्टेबल जब छात्र को लेकर स्कूल पहुंचा तो वहां छात्र और शिक्षिका सायमा खां से मामले को लेकर बातचीत की गई। पुलिस ने शिक्षिका से छात्र की शिकायत के संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की।

इसी दौरान छात्र को डांटने और उसे मारने की धमकी देने की बात सामने आई। पुलिसकर्मियों ने मौके पर स्थिति को संभाला और शिक्षिका को समझाया कि बच्चे के साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

मामले से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई।

बीईओ ने स्कूल पहुंचकर की जांच

वीडियो और छात्र की शिकायत के बाद बीएसए आशीष पांडेय के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों और स्टाफ से बातचीत की। जांच के दौरान छात्रों से स्कूल में पढ़ाई के माहौल और छात्र की शिकायत से जुड़े घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली गई।

बीईओ की जांच में यह बात सामने आई कि कुछ छात्रों ने शिकायतकर्ता माधव की पिटाई की थी। बताया गया कि छात्र अपनी शिकायत लेकर शिक्षिका के पास गया था। उस समय शिक्षिका फोन पर बात कर रही थीं और उन्होंने छात्र की बात नहीं सुनी। इसके बाद नाराज छात्र सीधे पुलिस चौकी पहुंच गया।

जांच के बाद बीईओ ने अपनी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर प्रधानाध्यापक अनुपम कुमार और शिक्षिका सायमा खां को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। दोनों से पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है और उन्हें बीएसए कार्यालय बुलाया गया है।

छात्र की शिकायत ने उठाए कई सवाल

इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और उनकी शिकायतों के समाधान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 12 वर्षीय छात्र का अपनी समस्या लेकर पुलिस चौकी पहुंचना यह बताता है कि उसे स्कूल में अपनी बात सुने जाने की उम्मीद नहीं रही होगी।

हालांकि, छात्र द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा तत्काल जांच शुरू करना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। खास तौर पर स्कूल में बच्चों के बीच मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद यह जरूरी हो जाता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।

स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहती। बच्चों की समस्याओं को सुनना, उनके बीच होने वाले विवादों को समझना और उन्हें सुरक्षित वातावरण देना भी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

विभागीय जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर

फिलहाल प्रधानाध्यापक और शिक्षिका को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके जवाब के बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है। वहीं, छात्रों के बीच मारपीट की शिकायत को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

माधव की शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसने अपनी पढ़ाई को लेकर चिंता जताई। कम उम्र में अपने भविष्य को लेकर उसकी चिंता ने स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारियों पर ध्यान खींचा है।

अब विभागीय जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्कूल में पढ़ाई की स्थिति वास्तव में कैसी थी, शिक्षकों की भूमिका क्या रही और छात्रों की शिकायतों पर पहले किस स्तर तक कार्रवाई हुई। इसके साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और अनुशासित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

कुल मिलाकर, कानपुर देहात का यह मामला केवल एक छात्र की शिकायत तक सीमित नहीं है। यह स्कूलों में बच्चों की बात सुनने, उनकी समस्याओं को समय पर समझने और शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता को भी सामने लाता है। विभागीय जांच और कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

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