NCB की बड़ी कार्रवाई: UAE से भारत लाया गया वांछित ड्रग तस्कर वीरेंद्र सिंह बसोया, जानिए क्या है पूरा मामला
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को बड़ी सफलता मिली है। NCB ने विदेश में रहकर कथित तौर पर ड्रग तस्करी सिंडिकेट को संचालित करने वाले वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू उर्फ बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचने पर उसे हिरासत में लिया गया।
बसोया दिल्ली के सरोजिनी नगर क्षेत्र के पिलंजी का रहने वाला बताया गया है। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह लंबे समय से विदेश में रहकर कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसकी भारत वापसी को NCB के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अभियान की अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर UAE में गिरफ्तारी
NCB के अनुरोध पर इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था। इसी नोटिस के आधार पर वीरेंद्र सिंह बसोया को जून 2026 में UAE में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने UAE के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा।
कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उसे भारत वापस लाया गया। NCB के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आरोपी अक्सर अलग-अलग देशों में ठिकाने बदलकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में इंटरपोल और विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अमित शाह ने NCB की कार्रवाई को बताया बड़ी उपलब्धि
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का पता लगाने और उनके नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त नीति के साथ काम कर रही है।
अमित शाह के अनुसार, नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत NCB ने UAE से वांछित ड्रग ऑपरेटिव की वापसी सुनिश्चित की है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां नेटवर्क के शीर्ष स्तर से लेकर निचले स्तर तक और निचले स्तर से शीर्ष स्तर तक जांच की रणनीति अपनाकर पूरे नेटवर्क को चिन्हित करने का प्रयास कर रही हैं।
गृह मंत्री के मुताबिक, विदेश में छिपे ड्रग तस्कर भारतीय कानून की पहुंच से बाहर नहीं रह सकते। इस कार्रवाई को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पुणे से शुरू हुआ था मामला
वीरेंद्र सिंह बसोया से जुड़ा यह मामला फरवरी 2024 में पुणे से शुरू हुआ था। पुणे सिटी पुलिस ने उस दौरान करीब 500 ग्राम मेफेड्रोन बरामद किया था। शुरुआती कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और अधिकारियों ने कथित ड्रग नेटवर्क के विभिन्न स्तरों तक पहुंचने का प्रयास किया।
जांच के दौरान पुणे से लगभग 867 किलोग्राम मेफेड्रोन और दिल्ली से करीब 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया। इस तरह कुल बरामदगी लगभग 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन तक पहुंच गई।
मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए इसे आगे की जांच के लिए NCB की मुंबई जोनल यूनिट को सौंपा गया।
विदेशी नेटवर्क से जुड़ी अहम कड़ी होने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, बसोया की पहचान एक महत्वपूर्ण विदेशी ऑपरेटिव और कथित साजिशकर्ता के रूप में हुई। आरोप है कि वह विदेश में रहकर सिंडिकेट की गतिविधियों के समन्वय में भूमिका निभाता था।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि भारत में तैयार की जा रही मेफेड्रोन की खेप को दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए वह कथित तौर पर विदेशी वितरण चैनलों से जुड़ा हुआ था। दिल्ली में बरामद करीब 970 किलोग्राम मेफेड्रोन की बड़ी खेप को भी कथित तौर पर ऐसे कूरियर नेटवर्क से जोड़ा गया है, जिसे विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी।
इस तरह जांच एजेंसियों के अनुसार, बसोया की कथित भूमिका घरेलू स्तर पर तैयार किए जा रहे नशीले पदार्थों और अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर सामने आई।
दिल्ली पुलिस के एक अन्य मामले में भी नाम
वीरेंद्र सिंह बसोया का नाम दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा की गई एक अलग अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी जांच में भी सामने आया था। अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया था।
इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली, हापुड़ और गाजियाबाद में स्थित कथित गोदामों तथा अन्य स्थानों के अलावा गुजरात के अंकलेश्वर में एक फैक्ट्री से भी नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे।
इन अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल मिलाकर 1,300 किलोग्राम से अधिक कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच के दौरान कथित तौर पर यह पता चला कि बसोया की भूमिका ड्रग्स की खरीद, परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़े नेटवर्क के प्रबंधन में थी।
हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत में चलने वाली कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत कार्रवाई
वीरेंद्र सिंह बसोया की भारत वापसी को NCB के ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत चलाए जा रहे प्रयासों से जोड़ा गया है। इस अभियान का उद्देश्य विदेशों से संचालित होने वाले बड़े ड्रग तस्करों और वांछित भगोड़ों की पहचान करना, उनका पता लगाना और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए भारत वापस लाना है।
इसके लिए इंटरपोल रेड नोटिस जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही भारतीय एजेंसियां विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करके आरोपियों के ठिकानों की जानकारी जुटाती हैं और उनकी गिरफ्तारी तथा प्रत्यर्पण या वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं।
NCB के अनुसार, इससे पहले तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला और मलेशिया से नवीन चिचकर जैसे वांछित ड्रग तस्करों को भारत वापस लाया जा चुका है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है।
‘ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ से जुड़ा लक्ष्य
विदेशों में छिपे नशीले पदार्थों से जुड़े आरोपियों को भारत वापस लाना केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा जारी ‘ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के व्यापक लक्ष्यों से भी जुड़ा है।
इस रोडमैप के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए विदेशों से संचालित होने वाले महत्वपूर्ण ड्रग नेटवर्क और उनके प्रमुख सदस्यों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे आरोपियों का पता लगाकर उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस रणनीति का उद्देश्य केवल किसी एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। बल्कि जांच एजेंसियां ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क को चिन्हित करने, वित्तीय मदद करने वालों, हैंडलरों, सप्लायरों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों तक पहुंचने पर भी जोर दे रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत हो रही कार्रवाई
नशीले पदार्थों की तस्करी अब केवल एक देश तक सीमित चुनौती नहीं रह गई है। तस्करी के नेटवर्क कई देशों में फैले हो सकते हैं और ऐसे मामलों में अपराधियों की गतिविधियां अलग-अलग देशों से संचालित हो सकती हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जांच एजेंसियों के लिए आवश्यक हो जाता है।
UAE से बसोया की वापसी इसी अंतरराष्ट्रीय समन्वय का उदाहरण है। इंटरपोल रेड नोटिस, विदेशी एजेंसियों के साथ सूचना साझा करना और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभाते हैं।
NCB का कहना है कि वह बड़े ड्रग तस्करों, वित्तपोषकों, हैंडलरों और विदेशों में छिपे वांछित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर नशीले पदार्थों की तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।
ड्रग तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
वीरेंद्र सिंह बसोया की भारत वापसी ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर लगातार जोर दे रही है। जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल सड़क स्तर पर नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान पर भी है।
UAE से वांछित आरोपी की वापसी NCB के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। पुणे से शुरू हुई जांच में सामने आए बड़े पैमाने के मेफेड्रोन नेटवर्क और उससे जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच के बीच बसोया की भारत वापसी से मामले की आगे की जांच को गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी। फिलहाल NCB की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जांच को आगे बढ़ाना और कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाना है।

