लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट बेनकाब, Zoryl M1 की 39.20 लाख गोलियों का हिसाब नहीं मिला
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली और संदिग्ध दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और जिला प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में बुधवार को अमीनाबाद क्षेत्र में फर्जी बिलिंग, कागजी रोटेशन और कथित तौर पर बिना वास्तविक डिलीवरी के दवाओं के लेनदेन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मामले में FSDA की जांच के आधार पर अमीनाबाद पुलिस ने चार दवा कारोबारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख गोलियों का रिकॉर्ड विभाग को नहीं मिला। आरोप है कि दवाओं की वास्तविक आपूर्ति के बजाय कागजों में खरीद-बिक्री और बिलिंग का ऐसा नेटवर्क तैयार किया गया, जिसके जरिए बड़े स्तर पर दवाओं का हिसाब दिखाया गया। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
चार दवा कारोबारियों पर मुकदमा
पुलिस के अनुसार, इस मामले में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है।
FSDA की जांच में सामने आया कि अमीनाबाद में संचालित हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर से जुड़े हुए थे। विभाग को संदेह है कि इन फर्मों के माध्यम से दवाओं के लेनदेन और बिलिंग का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
वहीं, सहारनपुर स्थित जिस फर्म का कथित तौर पर बिल रोटेशन में इस्तेमाल किया गया, उसके बारे में जांच में यह बात सामने आई कि वह पिछले करीब दो वर्षों से बंद पड़ी थी। इसके बावजूद उसके नाम पर दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज सामने आने से जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया।
लाइसेंस और दवाओं के रिकॉर्ड की जांच
FSDA के मुताबिक, अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के संबंध में जांच के दौरान दवाओं के भंडारण और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। विभाग ने आरोप लगाया है कि फर्म के स्तर पर वैध औषधि लाइसेंस से जुड़े नियमों का पालन किए बिना दवाओं के कारोबार का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। विभाग के अनुसार, एक ही परिसर में संचालित फर्मों के बीच दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन की जांच की जा रही है।
इसके अलावा, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दवाओं की खरीद, बिक्री, स्टॉक और बिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड किस तरह तैयार किए गए और वास्तविक दवाओं की आवाजाही इन दस्तावेजों से कितनी मेल खाती है।
8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद का रिकॉर्ड
FSDA की जांच में एमके फार्मा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 में फर्म ने करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई।
जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup जैसी दवाओं की खरीद अलग-अलग फर्मों के नाम पर दर्शाई गई थी। इसके बाद संबंधित दवा निर्माताओं और फर्मों से इन रिकॉर्ड का सत्यापन कराया गया।
विभाग के अनुसार, सत्यापन के दौरान संबंधित निर्माताओं और फर्मों ने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया। इसके बाद संबंधित बैचों को कथित तौर पर काउंटरफिट यानी नकली दवाओं से जोड़कर जांच का दायरा बढ़ाया गया।
जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण पाए गए। FSDA का आरोप है कि साक्ष्यों को छिपाने के उद्देश्य से लैपटॉप में मौजूद पुराना डेटा डिलीट किया गया। अब जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए पूरे लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
Zoryl M1 की 39.20 लाख गोलियों का हिसाब नहीं
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख गोलियों को लेकर है। FSDA की जांच के मुताबिक, एमके फार्मा से संबंधित रिकॉर्ड में इतनी बड़ी संख्या में दवाओं का हिसाब स्पष्ट नहीं हो पाया।
विभाग को आशंका है कि इन दवाओं को कथित तौर पर कागजी लेनदेन के जरिए बाजार में खपाया गया हो सकता है। हालांकि, दवाओं की वास्तविक स्थिति, उनकी सप्लाई और बाजार में पहुंचने के तरीके को लेकर जांच अभी जारी है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि नकली या काउंटरफिट दवाएं वास्तविक दवाओं के नाम पर बाजार में पहुंचाई गईं, तो यह मामला उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाएगा। इसलिए FSDA इस नेटवर्क से जुड़े सभी दस्तावेजों, स्टॉक और सप्लाई चैन की पड़ताल कर रहा है।
BNS की कई धाराओं में कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमीनाबाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस और FSDA की जांच में कथित फर्जी रिकॉर्ड, कूटरचना, दवाओं के अवैध कारोबार और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में अन्य कारोबारी, एजेंट या फर्में शामिल थीं या नहीं।
पहले भी हो चुकी हैं कई बड़ी कार्रवाई
लखनऊ में नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी अमीनाबाद क्षेत्र में कई फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ कथित फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में हेरफेर के मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
इन मामलों में महाराजा इंटरप्राइजेज, शिव शक्ति फार्मा, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, अपोलो फार्मेसी, शिव शक्ति मेडिकल, मीत इंटरप्राइजेज, विद्या फार्म और आरएन फार्मा समेत अन्य नाम सामने आए थे। इसके अलावा मार्ग सॉफ्टवेयर के डिस्ट्रीब्यूटर आबिद अली के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं बरामद किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई थी। इसी तरह आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गई थीं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी दवाओं के अवैध भंडारण और परिवहन से संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई।
राजस्थान और देहरादून तक जांच की कड़ी
FSDA अब नकली दवाओं के संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच कर रहा है। विभाग के अनुसार, लखनऊ के अमीनाबाद स्थित एक अवैध गोदाम से बरामद दवाओं के स्रोत की पड़ताल राजस्थान तक पहुंची है।
इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा देहरादून में विभिन्न ब्रांड की कथित नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
इस मामले में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चन्द्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि विभाग अब केवल स्थानीय दुकानों तक सीमित न रहकर दवाओं के स्रोत से लेकर वितरण तक पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहा है।
प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश
नकली, अमानक और काउंटरफिट दवाओं की सप्लाई चेन को रोकने के लिए FSDA ने प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
विभाग का उद्देश्य केवल नकली दवाओं को जब्त करना नहीं, बल्कि उनके स्रोत और वितरण नेटवर्क तक पहुंचना है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी सावधानी
नकली दवाओं का मामला सामने आने के बाद आम लोगों के लिए भी सावधानी बरतना जरूरी है। दवाएं हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर या विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदनी चाहिए। पैकेट पर दवा का नाम, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि जैसी जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।
इसके अलावा, यदि किसी दवा की पैकिंग संदिग्ध लगे या दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह लेना बेहतर है।
फिलहाल लखनऊ के अमीनाबाद में सामने आए इस मामले की जांच जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित कागजी बिलिंग और दवा रोटेशन का नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बाजार में संदिग्ध दवाओं की वास्तविक आपूर्ति किस माध्यम से हुई। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

