गौतम गंभीर को समय देने की जरूरत, अमित मिश्रा ने कहा खिलाड़ियों को भी लेनी होगी जिम्मेदारी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल को लेकर लगातार चर्चा जारी है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में टीम के प्रदर्शन को लेकर गंभीर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। हालांकि, पूर्व भारतीय स्पिनर और गंभीर के पूर्व टीम साथी अमित मिश्रा का मानना है कि मुख्य कोच को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि टीम में बदलाव और नए खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में समय लगता है।

गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय टीम ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में कुछ बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। घरेलू मैदान पर लगातार दो बार टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप और ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हार के बाद कोचिंग व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

इसके अलावा आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली हार ने भी टीम के प्रदर्शन को लेकर चर्चा बढ़ाई। ऐसे समय में अमित मिश्रा ने गंभीर का बचाव करते हुए कहा है कि किसी भी कोच को टीम के साथ काम करने और अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

अमित मिश्रा ने गौतम गंभीर के समर्थन में क्या कहा?

अमित मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि मुख्य कोच की भूमिका आसान नहीं होती। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और मैदान पर कोच की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा।

मिश्रा का मानना है कि सभी फॉर्मेट के लिए एक ही कोच के साथ लंबे समय तक काम करना क्रिकेट में आम बात रही है। इसलिए किसी कोच के प्रदर्शन का आकलन जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में विशेष रूप से नए और कम अनुभवी खिलाड़ियों के साथ काम करने के लिए कोच को समय चाहिए।

उनके अनुसार, कोच और खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल बनने में भी समय लगता है। टेस्ट क्रिकेट में परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं और खिलाड़ियों को अलग-अलग पिच, गेंदबाज और मैच की स्थिति के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।

टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों की जिम्मेदारी अहम

गौतम गंभीर की सबसे ज्यादा आलोचना टेस्ट क्रिकेट में टीम के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। इस पर अमित मिश्रा ने कहा कि गंभीर को रेड-बॉल क्रिकेट में पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि टीम में शामिल नए खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट की जरूरतों को समझाने और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकती।

मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि कोच का काम खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करना, उनकी स्किल्स पर काम करना और मैच के लिए रणनीति बनाना है। हालांकि, मैदान पर उस रणनीति को लागू करने की जिम्मेदारी खिलाड़ियों की ही होती है।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को दबाव का सामना करना सीखना होगा। साथ ही, उन्हें परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। बल्लेबाजों और गेंदबाजों को विकेट, मौसम, विपक्षी टीम और मैच की स्थिति को समझकर प्रदर्शन करना होता है।

इसलिए, अमित मिश्रा के अनुसार, टीम की सफलता के लिए केवल कोच को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। खिलाड़ियों को भी अपने प्रदर्शन और फैसलों की जिम्मेदारी लेनी होगी।

गंभीर के प्रयोगों का भी किया बचाव

गौतम गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट टीम में कई बदलाव और प्रयोग देखने को मिले हैं। इनमें बल्लेबाजी क्रम में किए गए बदलाव भी शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में वॉशिंगटन सुंदर को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजे जाने के फैसले ने भी चर्चा पैदा की थी।

आलोचकों का कहना था कि लगातार बदलाव से टीम के संयोजन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अमित मिश्रा ने इस तरह के फैसलों का बचाव किया है। उनका कहना है कि बाहर से देखने पर किसी बदलाव का कारण स्पष्ट नहीं होता, लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों के साथ नेट्स में काफी समय बिताते हैं।

मिश्रा के मुताबिक, कोच यह देखते हैं कि कौन सा खिलाड़ी अभ्यास के दौरान अच्छी बल्लेबाजी या गेंदबाजी कर रहा है। इसके अलावा पिच और मैच की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है। ऐसे में किसी खिलाड़ी को अलग क्रम पर बल्लेबाजी कराने का फैसला पूरी तैयारी के बाद लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दर्शकों को केवल अंतिम बदलाव दिखाई देता है, जबकि कोचिंग स्टाफ के पास उससे जुड़ी कई जानकारियां होती हैं। इसी आधार पर टीम प्रबंधन सर्वश्रेष्ठ संयोजन तैयार करने की कोशिश करता है।

टेस्ट टीम में सही संयोजन तलाशने की कोशिश

भारतीय टेस्ट टीम में पिछले कुछ समय से कई बदलाव देखने को मिले हैं। युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है और अलग-अलग संयोजनों को आजमाया जा रहा है। ऐसे में अमित मिश्रा का मानना है कि टीम प्रबंधन का उद्देश्य टेस्ट क्रिकेट के लिए 11 खिलाड़ियों का सबसे मजबूत संयोजन तैयार करना है।

उन्होंने संकेत दिया कि हर खिलाड़ी की भूमिका परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। यदि किसी मैच में टीम प्रबंधन को लगता है कि कोई खिलाड़ी बल्लेबाजी क्रम में ऊपर आकर बेहतर योगदान दे सकता है, तो ऐसा प्रयोग किया जा सकता है।

हालांकि, इन प्रयोगों का अंतिम आकलन उनके नतीजों के आधार पर ही किया जाएगा। यही वजह है कि गंभीर को समय देने की अमित मिश्रा की सलाह महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चैंपियंस ट्रॉफी और टी20 विश्व कप की सफलता भी नजरअंदाज नहीं

गौतम गंभीर के कार्यकाल का मूल्यांकन करते समय सीमित ओवरों की क्रिकेट में मिली सफलता को भी ध्यान में रखना जरूरी है। भारतीय टीम ने उनकी कोचिंग अवधि में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता है। ये दोनों उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट में टीम के खराब प्रदर्शन ने गंभीर की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। खासकर घरेलू मैदान पर लगातार टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप और ऑस्ट्रेलिया में मिली हार ने टीम की रणनीति तथा संयोजन पर बहस को बढ़ाया है।

हालांकि, अमित मिश्रा का तर्क है कि अलग-अलग फॉर्मेट में परिस्थितियां और चुनौतियां अलग होती हैं। सीमित ओवरों में सफलता और टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष को एक ही नजरिये से देखना उचित नहीं होगा।

आगे क्या होगा?

अब भारतीय टीम और गौतम गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन को बेहतर करने की है। टीम प्रबंधन को जहां नए खिलाड़ियों को तैयार करना होगा, वहीं अनुभवी खिलाड़ियों से भी अधिक निरंतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

इसके साथ ही खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी होगा। यदि टीम लगातार प्रयोगों के साथ सही संयोजन तलाशने में सफल रहती है, तो आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन सुधर सकता है।

कुल मिलाकर, अमित मिश्रा की बात का सार यही है कि भारतीय टीम की मौजूदा स्थिति के लिए केवल गौतम गंभीर को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कोच रणनीति और मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन मैदान पर उसका क्रियान्वयन खिलाड़ियों को ही करना होता है। इसलिए गंभीर को पर्याप्त समय देने के साथ खिलाड़ियों से भी अधिक जिम्मेदारी और निरंतरता की उम्मीद की जानी चाहिए।

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