कानपुर के बिधनू में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र की छत टूटी, घटिया सामग्री के आरोप से मचा हड़कंप
Digital UP News Desk
कानपुर: प्रदेश सरकार बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण और सुविधाओं पर लगातार जोर दे रही है। हालांकि, कानपुर के बिधनू ब्लॉक से सामने आया एक मामला इन सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सपई ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र की छत निर्माण के कुछ ही दिनों बाद क्षतिग्रस्त हो गई। स्लैब का एक हिस्सा टूटने के साथ ही वहां से पानी टपकने लगा।
खास बात यह है कि भवन का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ था और इसे बच्चों के इस्तेमाल के लिए सौंपा भी नहीं गया था। ऐसे में निर्माणाधीन भवन की स्लैब में दरार और उसका क्षतिग्रस्त होना जिम्मेदार विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण में मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। वहीं, अधिकारियों की जांच में भी निर्माणाधीन कक्ष की स्लैब मानक के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद संबंधित स्लैब को तुड़वाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण के कुछ दिन बाद ही सामने आई खामी
सपई ग्राम पंचायत में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र का उद्देश्य स्थानीय बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ना है। लेकिन निर्माण के दौरान ही भवन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। ग्रामीणों के मुताबिक, छत की स्लैब तैयार होने के कुछ दिनों बाद ही उसमें दरार दिखाई देने लगी।
इसके बाद स्लैब का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और पानी टपकने लगा। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन को बच्चों के संचालन के लिए सौंप दिया जाता और उसके बाद इस तरह की समस्या सामने आती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
हालांकि, वर्तमान में भवन निर्माणाधीन है और अधिकारियों ने खराब स्लैब को हटाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी योजना के तहत बनने वाले भवन में शुरुआत से ही गुणवत्ता मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
दूसरे कक्ष की स्लैब में भी दिखी खामी
सपई के आंगनबाड़ी केंद्र में केवल एक स्लैब को लेकर ही सवाल नहीं उठे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दूसरे निर्माणाधीन कक्ष की स्लैब में भी कई जगह सरिया बाहर निकली हुई दिखाई दे रही है। इससे ग्रामीणों में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी सरकारी भवन का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार होना चाहिए। खासकर आंगनबाड़ी केंद्र जैसे भवनों में जहां छोटे बच्चों की आवाजाही होनी है, वहां निर्माण की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही उचित नहीं मानी जा सकती।
इसी वजह से ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे भवन की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की भी जांच हो, ताकि भविष्य में किसी तरह की समस्या सामने न आए।
ग्राम प्रधान ने ठेकेदार पर बताई जिम्मेदारी
ग्राम प्रधान अनुज कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण का ठेका अजीत यादव को दिया गया था। उनके अनुसार, निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण छत में दरार आई थी। इसके बाद खराब स्लैब को गिरवा दिया गया है।
ग्राम प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार को अभी तक निर्माण कार्य के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में अब दोबारा निर्माण कराते समय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्राम प्रधान के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि, पूरे मामले में अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय होती है, यह जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जांच में मानक के विपरीत मिली स्लैब
मामले को लेकर बिधनू के खंड विकास अधिकारी आशीष मिश्रा ने जानकारी दी कि निर्माणाधीन कक्ष की स्लैब की जांच कराई गई थी। जांच में स्लैब निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। अधिकारियों के मुताबिक, मानक के विपरीत सामग्री के इस्तेमाल के कारण छत में दरारें आई थीं।
इसके बाद खराब स्लैब को तत्काल तुड़वाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेजकर जांच कराई गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित कराई जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि दोबारा बनने वाली स्लैब में किस स्तर की निगरानी की जाती है। क्योंकि केवल खराब निर्माण को गिराकर दोबारा बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि नई स्लैब में निर्धारित मानकों और गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल हो।
रामखेड़ा में भी सामने आ चुकी हैं अनियमितताएं
सपई का मामला बिधनू ब्लॉक में निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठने वाला पहला सवाल नहीं है। इससे पहले रामखेड़ा स्थित आरआरसी सेंटर के निर्माण में भी कथित अनियमितताओं की शिकायत सामने आ चुकी है।
लगातार अलग-अलग निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर उठते सवाल प्रशासन के लिए चिंता का विषय हैं। सरकारी भवनों के निर्माण में यदि शुरुआत से ही तकनीकी निगरानी प्रभावी रहे तो ऐसी समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है।
दरअसल, सरकारी योजनाओं के तहत बनने वाले भवनों पर जनता का पैसा खर्च होता है। इसलिए निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि काम निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो। खासकर बच्चों से जुड़ी योजनाओं में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं का आधार हैं। यहां बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। ऐसे में इन केंद्रों के लिए सुरक्षित और मजबूत भवन उपलब्ध कराना सरकार की योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सपई में निर्माणाधीन भवन की छत में दरार आने से भले ही अभी किसी बच्चे को नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन घटना ने भविष्य की सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। यदि निर्माण की खामियां समय रहते सामने नहीं आतीं और भवन का संचालन शुरू हो जाता, तो बाद में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि पूरे भवन की तकनीकी जांच कराई जाए और निर्माण पूरा होने से पहले प्रत्येक हिस्से की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाए।
सिर्फ स्लैब दोबारा बनाना पर्याप्त नहीं
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। खराब स्लैब को तुड़वाकर दोबारा निर्माण कराने का निर्देश निश्चित तौर पर जरूरी कदम है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि निर्माण में मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ।
यदि जांच में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो नियमानुसार संबंधित निर्माण एजेंसी या ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
क्योंकि सरकारी भवनों की गुणवत्ता केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं होती। संबंधित विभागीय अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों की भी भूमिका होती है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लापरवाही कहां हुई।
ग्रामीणों को अब कार्रवाई का इंतजार
सपई के ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए बनने वाले भवन में किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ी सुविधा है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर है। उन्हें उम्मीद है कि दोबारा निर्माण शुरू होने से पहले तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में इस तरह की समस्या किसी अन्य सरकारी निर्माण में सामने न आए, इसके लिए भी निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
कुल मिलाकर, बिधनू के सपई गांव में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र की स्लैब टूटने का मामला सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने जांच के बाद खराब स्लैब को हटाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि नई स्लैब का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ कराया जाए और जांच के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय की जाए।
बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए बनाई जा रही योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब उनके लिए तैयार होने वाला बुनियादी ढांचा भी मजबूत और सुरक्षित हो। इसलिए सपई का मामला केवल एक निर्माणाधीन भवन की खराब स्लैब तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

