वृंदावन रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, बोले- सेवाभाव हृदय को स्पर्श करता है

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

वृंदावन: भारत गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को सपरिवार वृंदावन स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल पहुंचे। सेवाश्रम पहुंचने पर संस्थान के साधुओं और पदाधिकारियों ने उनका पुष्पगुच्छ, माल्यार्पण और उत्तरीय ओढ़ाकर अभिनंदन किया। इस दौरान अस्पताल का चिकित्सकीय और नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहा।

पूर्व राष्ट्रपति ने सेवाश्रम परिसर में स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ कुछ समय ध्यान भी लगाया। मंदिर में ध्यान के बाद उन्होंने यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को सकारात्मक बताया। इसके साथ ही उन्होंने रामकृष्ण मिशन की लंबे समय से चली आ रही सेवा परंपरा और चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे विकास की सराहना की।

विवेकानंद मंडपम में अर्पित की पुष्पांजलि

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सुबह करीब 10:40 बजे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम परिसर में पहुंचे। परिसर में प्रवेश करते ही उन्होंने विवेकानंद मंडपम में युगपुरुष स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके बाद वे सेवाश्रम परिसर में स्थित मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस देव की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन और पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद वे मंदिर में करीब 10 मिनट तक रहे।

इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति काफी देर तक आंखें बंद कर ध्यान मुद्रा में बैठे रहे। मंदिर से बाहर आने के बाद उन्होंने यहां के आध्यात्मिक वातावरण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सेवाश्रम में मौजूद आध्यात्मिक ऊर्जा अत्यंत सकारात्मक है और यहां बैठकर उनका अंतर्मन स्वाभाविक रूप से ध्यान की ओर अग्रसर हुआ।

आध्यात्मिक वातावरण की सराहना

रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम परिसर में बिताए समय के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने आध्यात्मिक वातावरण को विशेष रूप से महसूस किया। उनके अनुसार, मंदिर में ध्यान के दौरान उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ।

उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर आध्यात्मिक वातावरण व्यक्ति को कुछ समय के लिए स्वयं से जुड़ने और शांत रहने का अवसर देता है। सेवाश्रम में धार्मिक और सेवा गतिविधियों के बीच दिखाई देने वाला संतुलन भी उन्हें प्रभावित करता नजर आया।

इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति शारदा ब्लॉक पहुंचे। इस ब्लॉक से उनका पुराना जुड़ाव भी रहा है। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 28 नवंबर 2019 को उनके द्वारा शारदा ब्लॉक का लोकार्पण किया गया था।

शारदा ब्लॉक का किया अवलोकन

शारदा ब्लॉक पहुंचकर रामनाथ कोविंद ने वहां की व्यवस्थाओं और सुविधाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वामी रामकृष्ण देव, मां शारदा और स्वामी विवेकानंद के चित्रपट के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद चिकित्सकीय स्टाफ से बातचीत की और उनके कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल पेशेवर जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानवता की सेवा से भी है।

पूर्व राष्ट्रपति ने चिकित्सकीय स्टाफ को प्रेरित करते हुए कहा कि वे सभी एक महान पेशे में हैं। मरीजों की सेवा और उपचार से जुड़ा कार्य समाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की भूमिका विशेष है।

118 वर्षों की सेवा परंपरा की सराहना

रामनाथ कोविंद ने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की सेवा परंपरा और चिकित्सा सुविधाओं में हुए विकास की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन में उनका यह तीसरा आगमन है।

उन्होंने सेवाश्रम की करीब 118 वर्षों की सेवा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे समय से मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर काम करना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। साथ ही चिकित्सा सुविधाओं में लगातार हो रही प्रगति और सेवा भावना का संयोजन भी उन्हें प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा कि सेवाश्रम का सेवाभाव हृदय को स्पर्श करता है। चिकित्सा सुविधाओं के विकास के साथ मरीजों और जरूरतमंदों की सेवा की भावना को बनाए रखना संस्थान की विशेष पहचान है।

साधुओं और स्टाफ के साथ कराया समूह फोटो

सेवाश्रम भ्रमण के दौरान रामनाथ कोविंद ने संस्थान के साधुओं, संन्यासियों और कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

इसके बाद शारदा ब्लॉक के सामने आश्रम के साधुओं, चिकित्सकीय स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के साथ समूह फोटोग्राफी भी कराई गई। इस दौरान सेवाश्रम परिसर में मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला।

पूर्व राष्ट्रपति ने चिकित्सकीय और नर्सिंग स्टाफ के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें मानव सेवा के प्रति अपने दायित्व को निरंतर निभाने के लिए प्रेरित किया।

नंदकिशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का भी निरीक्षण

शारदा ब्लॉक के बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नंदकिशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का बाह्य निरीक्षण भी किया। उन्होंने भवन और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

कैंसर उपचार जैसी गंभीर चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए विकसित किए जा रहे इस ब्लॉक की गतिविधियों और व्यवस्थाओं को लेकर भी उन्होंने जानकारी प्राप्त की। इस दौरान सेवाश्रम के पदाधिकारी और चिकित्सक उनके साथ मौजूद रहे।

रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम लंबे समय से चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति का संस्थान का दौरा वहां की सेवा गतिविधियों के प्रति सम्मान और प्रोत्साहन के रूप में देखा गया।

सेवाश्रम की ओर से स्मृति स्वरूप भेंट

भ्रमण के अंत में सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद महाराज और सह सचिव स्वामी कालीकृष्णानंद महाराज ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को स्वामी रामकृष्ण देव, मां शारदा और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाएं स्मृति स्वरूप भेंट कीं।

इस अवसर पर सेवाश्रम के साधु-संतों और चिकित्सकीय अधिकारियों ने भी पूर्व राष्ट्रपति से मुलाकात की। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक वातावरण और सेवा भावना का समन्वय देखने को मिला।

चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ रहा मौजूद

पूर्व राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सेवाश्रम के कई प्रमुख चिकित्सक, अधिकारी और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहे। इनमें कुलदीप महाराज, स्वामी ओजोमयानंद, स्वामी रुद्रनाथानंद, स्वामी देवतानंद के अलावा डॉ. थान सिंह तोमर, डॉ. प्रशान्त पाठक, डॉ. गणेश शर्मा और डॉ. सर्वेश गुप्ता शामिल रहे।

इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ और छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने पूर्व राष्ट्रपति का स्वागत किया और उनके साथ हुए संवाद में भाग लिया।

सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश

रामनाथ कोविंद के रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम दौरे में आध्यात्मिकता और मानव सेवा दोनों प्रमुख रूप से दिखाई दिए। एक ओर उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना और ध्यान किया, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकीय स्टाफ से संवाद कर मानव सेवा के महत्व पर जोर दिया।

इस प्रकार, उनका यह दौरा केवल एक औपचारिक भ्रमण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सेवाश्रम की आध्यात्मिक परंपरा, चिकित्सा सुविधाओं और लंबे समय से चल रही सेवा गतिविधियों को करीब से देखा।

वृंदावन स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में पूर्व राष्ट्रपति का यह दौरा संस्थान के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। वहीं, उनके द्वारा सेवा भावना और चिकित्सकीय कार्यों की सराहना से यहां काम कर रहे साधुओं, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों का उत्साह बढ़ा।