कानपुर GSVM मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी रेजिडेंट्स को SGPGI विशेषज्ञ देंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण – विस्तार से पढ़िए पूरी जानकारी

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के पैथोलॉजी विभाग और लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के हेमाटोओंकोपैथोलॉजी विभाग के बीच चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस करार के तहत एसजीपीजीआई, लखनऊ के विशेषज्ञ चिकित्सक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी रेजिडेंट्स और फैकल्टी सदस्यों को ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य रेजिडेंट्स को हेमाटोपैथोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ जटिल मामलों के निदान, डिफरेंशियल डायग्नोसिस और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों की समझ को बेहतर बनाना है। इसके अलावा, इस तरह के अकादमिक कार्यक्रमों के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा, शोध और पैथोलॉजी सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

5 अक्टूबर को होगा विशेष ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम

इसी क्रम में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को हेमाटोओंकोपैथोलॉजी विषय पर विशेष ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन पैथोलॉजी विभाग के सेमिनार हॉल में किया जाएगा, जहां रेजिडेंट्स और फैकल्टी सदस्य ऑनलाइन माध्यम से एसजीपीजीआई, लखनऊ के विशेषज्ञों से जुड़ेंगे।

कार्यक्रम में हेमाटोपैथोलॉजी से जुड़े महत्वपूर्ण और उन्नत विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ-साथ केस-बेस्ड चर्चा भी की जाएगी। इस दौरान रेजिडेंट्स को जटिल मामलों को समझने और उनके निदान की प्रक्रिया को विशेषज्ञों के अनुभव के माध्यम से जानने का अवसर मिलेगा।

चिकित्सा शिक्षा और शोध को मिलेगा बढ़ावा

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय काला ने कहा कि संस्थान चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के उच्चीकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। उनके अनुसार, एसजीपीजीआई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के विशेषज्ञों के साथ यह शैक्षणिक सहयोग चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उपयोगी साबित होगा।

उन्होंने कहा कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का पैथोलॉजी विभाग भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से अकादमिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे रेजिडेंट्स और फैकल्टी सदस्यों को नवीनतम ज्ञान, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और जटिल मामलों पर चर्चा के अधिक अवसर मिल सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुभव से रेजिडेंट्स को मिलेगा लाभ

ट्रांसफ्यूजन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. लुबना खान ने बताया कि प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ नियमित ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा, शोध और डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई जैसे अग्रणी चिकित्सा संस्थान के विशेषज्ञों के साथ ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान रेजिडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर है।

वहीं, डॉ. नीलिमा वर्मा ने कार्यक्रम की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि एसजीपीजीआई, लखनऊ के हेमाटोपैथोलॉजी क्षेत्र के विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी रेजिडेंट्स और फैकल्टी सदस्यों को मार्गदर्शन देंगे। कार्यक्रम के दौरान विषय से जुड़े महत्वपूर्ण डायग्नोस्टिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

जटिल मामलों की केस-बेस्ड चर्चा पर रहेगा जोर

इस शैक्षणिक कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता जटिल और चुनौतीपूर्ण हेमाटोपैथोलॉजी मामलों की केस-बेस्ड चर्चा होगी। इसके माध्यम से रेजिडेंट्स को वास्तविक डायग्नोस्टिक समस्याओं को समझने और विशेषज्ञों के साथ उन पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

साथ ही, रेजिडेंट्स विशेषज्ञों से अपने प्रश्न पूछ सकेंगे और विभिन्न कठिन मामलों में संभावित निदान तथा डिफरेंशियल डायग्नोसिस की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें व्यावहारिक स्तर पर पैथोलॉजी के जटिल विषयों को समझने में मदद मिलेगी।

डॉ. चयनिका काला ने बताया कि इस शैक्षणिक कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के स्तर को और मजबूत करना है। साथ ही, प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों के ज्ञान और अनुभव को रेजिडेंट्स एवं फैकल्टी तक पहुंचाना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शोध और वैज्ञानिक सोच को मिलेगा प्रोत्साहन

कार्यक्रम की कॉर्डिनेटर डॉ. वंदना मिश्रा तिवारी होंगी। कार्यक्रम को केवल नियमित शिक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके माध्यम से रेजिडेंट्स में शोध के प्रति रुचि, वैज्ञानिक सोच और जटिल मामलों के विश्लेषण की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा, नवीनतम डायग्नोस्टिक तकनीकों और बदलते चिकित्सा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों के साथ संवाद के माध्यम से रेजिडेंट्स को अपने अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

मरीजों को भी मिलेगा बेहतर निदान का लाभ

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अनुसार, बेहतर प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का दीर्घकालिक लाभ डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के रूप में सामने आ सकता है। पैथोलॉजी किसी भी बीमारी की पहचान और उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सटीक और समयबद्ध पैथोलॉजिकल निदान के लिए चिकित्सकीय विशेषज्ञता और लगातार प्रशिक्षण जरूरी है।

इस पहल के माध्यम से रेजिडेंट्स को देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही, फैकल्टी सदस्यों के बीच भी ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी और रेजिडेंट्स होंगे शामिल

इस ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. लुबना खान, विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. सुमन लता वर्मा सहित पैथोलॉजी विभाग के अन्य फैकल्टी सदस्य और रेजिडेंट्स सहभागिता करेंगे।

वहीं, एसजीपीजीआई लखनऊ की ओर से प्रोफेसर डॉ. खलीकुर रहमान हेमाटोओंकोपैथोलॉजी से जुड़े महत्वपूर्ण और उन्नत विषयों पर विशेष व्याख्यान देंगे। इसके साथ ही डॉ. शेली सिंघला, सह प्रोफेसर, एसजीपीजीआई लखनऊ, विशेषज्ञ फैकल्टी के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगी और हेमाटोपैथोलॉजी से संबंधित महत्वपूर्ण डायग्नोस्टिक पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।

कुल मिलाकर, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और एसजीपीजीआई के बीच यह अकादमिक सहयोग चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। ऑनलाइन विशेषज्ञ प्रशिक्षण से रेजिडेंट्स को जटिल मामलों को समझने, आधुनिक डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं से परिचित होने और अपने अकादमिक कौशल को विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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