लखनऊ में बृजेश पाठक और संतोष पाण्डेय के बीच फेसबुक पर वार-पलटवार, अखिलेश यादव को लेकर छिड़ी बहस

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Digital Up News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया के जरिए नेताओं के बीच बयानबाजी का सिलसिला लगातार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय के बीच फेसबुक पोस्ट को लेकर राजनीतिक वार-पलटवार सामने आया है। दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी पोस्ट के जरिए एक-दूसरे के सवालों और आरोपों का जवाब दिया।

मामले की शुरुआत डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की एक विस्तृत फेसबुक पोस्ट से हुई। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर कई सवाल उठाए और उन पर आरोप लगाए। इसके जवाब में सपा के पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय ने भी लंबी फेसबुक पोस्ट लिखकर डिप्टी सीएम पर पलटवार किया।

इस राजनीतिक बहस में ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शंकराचार्य, विजय मिश्रा, खुशी दुबे, डॉ. घनश्याम त्रिपाठी और कबीर तिवारी जैसे अलग-अलग मामलों का उल्लेख भी सामने आया। इसके अलावा ‘पंडित अवसरवादी’ और ‘घूसखोर’ जैसे शब्दों से जुड़े विवाद पर भी संतोष पाण्डेय ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

बृजेश पाठक की पोस्ट से शुरू हुआ राजनीतिक वार-पलटवार

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उनकी पोस्ट में समाजवादी पार्टी की राजनीति और विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए।

बृजेश पाठक की पोस्ट सामने आने के बाद सपा के पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय ने इसका जवाब दिया। उन्होंने भी फेसबुक पर विस्तार से अपनी बात रखी और डिप्टी सीएम से कई सवाल किए।

संतोष पाण्डेय ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब अखिलेश यादव ब्राह्मण समाज से जुड़े विषयों पर कुछ बोलते हैं या उनके हित में कोई कार्य करते हैं, तो डिप्टी सीएम को इससे परेशानी क्यों होती है। उन्होंने अपने जवाब में भाजपा सरकार और बृजेश पाठक की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

संतोष पाण्डेय ने पूछा- अखिलेश यादव के बयान से क्यों होता है दर्द?

संतोष पाण्डेय ने डिप्टी सीएम को जवाब देते हुए लिखा कि जब अखिलेश यादव ब्राह्मणों के बारे में कुछ बोलते हैं या उनके लिए कोई अच्छा काम करते हैं, तो उन्हें क्यों दर्द होता है।

उन्होंने कहा कि केवल अखिलेश यादव पर आरोप लगाने से डिप्टी सीएम अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। संतोष पाण्डेय ने प्रदेश में ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

उनका कहना था कि ब्राह्मण समाज सरकार की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है, लेकिन केवल बयानों के जरिए मुद्दों को उलझाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

हालांकि, ये सभी बातें संतोष पाण्डेय की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इन पर भाजपा या डिप्टी सीएम की ओर से अलग से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे स्पष्ट हो सकता है।

ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा

संतोष पाण्डेय ने अपनी फेसबुक पोस्ट में ब्राह्मण समाज से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया। उन्होंने अलग-अलग घटनाओं और व्यक्तियों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से जवाब मांगा।

उन्होंने शंकराचार्य से जुड़े मुद्दे का उल्लेख किया। इसके साथ ही विजय मिश्रा, खुशी दुबे, डॉ. घनश्याम त्रिपाठी और कबीर तिवारी जैसे मामलों का भी संदर्भ देते हुए सरकार से सवाल किए।

सपा नेता ने इन मुद्दों को ब्राह्मण समाज की भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि समाज के लोग सरकार की ओर उम्मीद से देखते हैं। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक बयान देने के बजाय सरकार को इन मामलों में अपनी स्थिति और कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

विजय मिश्रा और खुशी दुबे के मुद्दे का भी उल्लेख

फेसबुक पोस्ट में संतोष पाण्डेय ने विजय मिश्रा और खुशी दुबे से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। इन मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग मामलों को लेकर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

संतोष पाण्डेय ने डॉ. घनश्याम त्रिपाठी और कबीर तिवारी से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। इस तरह उनकी पोस्ट में कई ऐसे मुद्दे शामिल रहे, जिनके जरिए उन्होंने डिप्टी सीएम से विस्तृत जवाब मांगा।

‘पंडित अवसरवादी’ और ‘घूसखोर’ विवाद पर भी टिप्पणी

सपा के पूर्व विधायक ने ‘पंडित अवसरवादी’ और ‘घूसखोर’ जैसे शब्दों को लेकर सामने आए विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

संतोष पाण्डेय ने कहा कि किसी भी समुदाय या वर्ग को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक नेताओं को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने डिप्टी सीएम की सोशल मीडिया पोस्ट के संदर्भ में भी इसी तरह के सवाल उठाए।

इस विवाद ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए हैं और अब राजनीतिक हलकों में इस वार-पलटवार को लेकर चर्चा हो रही है।

सोशल मीडिया बना राजनीतिक बहस का नया मंच

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ समय से फेसबुक, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नेताओं के बीच संवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। नेता अब प्रेस कॉन्फ्रेंस या सार्वजनिक सभाओं के अलावा सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी सीधे जनता तक अपनी बात पहुंचाते हैं।

बृजेश पाठक और संतोष पाण्डेय के बीच हुआ यह फेसबुक वार-पलटवार भी इसी बदलती राजनीतिक शैली का उदाहरण है। एक नेता की लंबी पोस्ट के बाद दूसरे नेता ने भी विस्तृत प्रतिक्रिया देकर अपनी बात सामने रखी।

इससे पहले भी राजनीतिक दलों के नेता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के बयान और नीतियों पर प्रतिक्रिया देते रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर होने वाली ऐसी बहस में आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है।

2027 की राजनीति से पहले बयानबाजी तेज

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच मुद्दों को लेकर बयानबाजी और सोशल मीडिया गतिविधियां आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं।

ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दे भी प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में संतोष पाण्डेय की पोस्ट में ब्राह्मण समाज से जुड़े मामलों का उल्लेख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूसरी ओर, बृजेश पाठक की ओर से अखिलेश यादव को लेकर उठाए गए सवालों ने इस बहस को और व्यापक बना दिया। फिलहाल दोनों नेताओं की फेसबुक पोस्ट के बाद राजनीतिक चर्चा तेज है।

आगे किस तरह बढ़ेगा विवाद?

बृजेश पाठक और संतोष पाण्डेय के बीच सोशल मीडिया पर हुई यह बहस फिलहाल बयान और जवाब तक सीमित है। संतोष पाण्डेय ने जहां डिप्टी सीएम की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, वहीं बृजेश पाठक की पोस्ट में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।

अब देखना होगा कि इस राजनीतिक वार-पलटवार पर भाजपा या समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं। साथ ही, जिन मामलों का संतोष पाण्डेय ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया है, उन पर सरकार की ओर से कोई विस्तृत जवाब आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल लखनऊ से शुरू हुआ यह फेसबुक द्वंद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की ओर से रखे गए तर्कों के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।