फर्रुखाबाद रेलवे न्यायालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान, न्यायाधीशों ने किया पौधरोपण

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा

फर्रुखाबाद: पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और अधिक से अधिक लोगों को हरित अभियान से प्रेरित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत बुधवार को फर्रुखाबाद के रेलवे न्यायालय परिसर में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश नीरज कुमार और रेलवे मजिस्ट्रेट पीयूष भारतीय ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और अन्य लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

यह कार्यक्रम केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और भावी पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने का संदेश भी देता नजर आया। कार्यक्रम के दौरान पीपल, पाकड़ सहित कई छायादार एवं पर्यावरण हितैषी पौधों का रोपण किया गया।

जनपद न्यायाधीश ने पीपल का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत जनपद न्यायाधीश नीरज कुमार द्वारा पीपल का पौधा रोपित करने के साथ हुई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वृक्ष प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और मानव जीवन के अस्तित्व के लिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व बनता है कि वह कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी नियमित देखभाल भी करे। उनके अनुसार, केवल पौधरोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जनपद न्यायाधीश ने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान केवल पौधरोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृ सम्मान और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह अभियान समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

रेलवे मजिस्ट्रेट ने पौधों के संरक्षण पर दिया विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान रेलवे मजिस्ट्रेट पीयूष भारतीय ने पाकड़ का पौधा रोपित कर अभियान को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वृक्ष न केवल वायु को शुद्ध करते हैं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन स्थापित करने में भी अहम योगदान देते हैं।

उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लें। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रयास

“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जनआंदोलन का स्वरूप देना है। इसी सोच के अनुरूप रेलवे न्यायालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराने का प्रयास भी था।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तापमान, वायु प्रदूषण और हरित क्षेत्र में कमी जैसी चुनौतियों का समाधान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और उनके संरक्षण से ही संभव है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

वन विभाग और न्यायालय परिवार की रही सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर प्रभागीय निदेशक वन विभाग राजीव कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब लगाए गए पौधों का नियमित संरक्षण किया जाए।

कार्यक्रम में लोक अभियोजक नितिन सक्सेना, दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष ऋषि यादव, कोर्ट मैनेजर मो. आरिफ खान, केंद्रीय नाजिर सुनील बाथम, उपनाजिर विवेक दत्त उपाध्याय, रेलवे न्यायालय के पेशकार रोहित गुप्ता, आशुलिपिक सिप्ते हसन, कश्मीर सिंह, अवनीश मिश्रा, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मचारी, अधिवक्तागण तथा न्यायालय के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।

सभी प्रतिभागियों ने पौधरोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।

पीपल और पाकड़ जैसे पर्यावरण हितैषी पौधों का किया गया रोपण

कार्यक्रम के दौरान लगाए गए पौधों में पीपल, पाकड़ सहित कई छायादार और पर्यावरण के लिए लाभकारी प्रजातियां शामिल थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पौधे वायु की गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी कारण ऐसे पौधों के रोपण को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।

पौधों की देखभाल पर भी रहेगा विशेष ध्यान

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि लगाए गए पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि यदि पौधों का संरक्षण नहीं किया गया, तो वृक्षारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

इसलिए भविष्य में भी समय-समय पर पौधों की स्थिति की समीक्षा करने और आवश्यक देखभाल करने का निर्णय लिया गया।

भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे अभियान

रेलवे न्यायालय परिवार ने कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प दोहराया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि हरित और स्वच्छ वातावरण के निर्माण में समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

फर्रुखाबाद के रेलवे न्यायालय परिसर में आयोजित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

जनपद न्यायाधीश नीरज कुमार, रेलवे मजिस्ट्रेट पीयूष भारतीय तथा अन्य अधिकारियों की सहभागिता ने इस संदेश को और मजबूत किया कि पौधरोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यदि समाज का प्रत्येक नागरिक इस सोच के साथ आगे बढ़े कि वह कम से कम एक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित करेगा, तो पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान निश्चित रूप से एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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