टीएमयू मुरादाबाद की लीडरशिप टॉक सीरीज़: युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व और कौशल विकास का संदेश
रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद
मुरादाबाद: तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) में आयोजित ‘लीडरशिप टॉक सीरीज़’ के 20वें बौद्धिक सत्र में विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता, कौशल विकास, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का विषय “Empowering Young Minds: Learning, Leadership and Nation Building” रहा, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के पूर्व वरिष्ठ निदेशक (संयुक्त सचिव स्तर) बिमल कुमार सिकदार ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां पर्याप्त नहीं हैं। यदि युवा नेतृत्व क्षमता, नवाचार, तकनीकी कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाते हैं, तभी वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उनके विचारों को विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रेरणादायक बताया।
नेतृत्व और सीखने की संस्कृति पर दिया विशेष जोर
कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान बिमल कुमार सिकदार ने कहा कि वर्तमान समय में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि नई तकनीकों, बदलती वैश्विक परिस्थितियों और आधुनिक कौशलों को भी निरंतर सीखते रहें।
उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि जिज्ञासु, नवाचारी और नेतृत्व के गुणों से युक्त होगा, तो वह न केवल अपने करियर में सफलता प्राप्त करेगा बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम
मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास, नवाचार और नैतिक नेतृत्व को भी समान महत्व देंगे।
कौशल विकास और नवाचार की आवश्यकता
अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि बदलते समय में रोजगार के अवसर भी तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को नई तकनीकों, डिजिटल स्किल्स और व्यावसायिक दक्षताओं को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास केवल नौकरी प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए प्रत्येक छात्र को अपने विषय के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल पर भी ध्यान देना चाहिए।
वैश्विक अवसरों के अनुरूप स्वयं को करें तैयार
बिमल कुमार सिकदार ने विद्यार्थियों से कहा कि आज पूरी दुनिया एक वैश्विक मंच बन चुकी है। इसलिए युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने, लगातार सीखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाले विद्यार्थी भविष्य में नेतृत्व की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकते हैं।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद मुख्य व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
सत्र के दौरान वक्ता ने अपने प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभवों के आधार पर कई प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्हें विद्यार्थियों ने ध्यानपूर्वक सुना।
प्रश्नोत्तर सत्र रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने नेतृत्व, नैतिक मूल्यों, आत्मविकास, करियर निर्माण और कौशल विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे।
मुख्य वक्ता ने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अपने अनुभवों और व्यावहारिक दृष्टिकोण के आधार पर दिया। इससे विद्यार्थियों को अपने करियर और व्यक्तित्व विकास के संबंध में उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने की सहभागिता
इस बौद्धिक सत्र में विश्वविद्यालय के फार्मेसी, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, एजुकेशन, मैनेजमेंट सहित विभिन्न संकायों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम ने विभिन्न विषयों के छात्रों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां उन्हें नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण जैसे व्यापक विषयों पर विशेषज्ञ के विचार सुनने और उनसे संवाद करने का अवसर मिला।
स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डीन छात्र कल्याण डॉ. एम.पी. सिंह तथा फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशु मित्तल ने मुख्य वक्ता बिमल कुमार सिकदार को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय सहायक निदेशक (अकादमिक) डॉ. नेहा आनंद ने किया। अंत में डॉ. एम.पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
विद्यार्थियों को मिला प्रेरणादायक संदेश
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बौद्धिक सत्र विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें व्यावहारिक जीवन, नेतृत्व कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक बनाते हैं।
शिक्षा के साथ नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व भी आवश्यक
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि आधुनिक शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके साथ नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्य, सामाजिक संवेदनशीलता और नवाचार की भावना का विकास भी उतना ही आवश्यक है।
यदि युवा इन गुणों को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाते हैं, तो वे न केवल अपने करियर में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि देश के समग्र विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

