लाभांश बढ़ाने तक राशन वितरण बंद: फर्रुखाबाद के उचित दर विक्रेताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी

13

रिपोर्ट – हर्ष वर्मा

फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण से जुड़े उचित दर विक्रेताओं ने लाभांश (मार्जिन) बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ा निर्णय लिया है।

ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के बैनर तले जिले के उचित दर विक्रेताओं ने घोषणा की है कि जब तक सरकार की ओर से लाभांश वृद्धि का लिखित शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक राशन वितरण का कार्य एक सप्ताह तक स्थगित रखा जाएगा।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी भी विक्रेता पर वितरण शुरू करने का दबाव बनाया गया, तो जिले के सभी उचित दर विक्रेता सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

यह निर्णय मंगलवार को जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को औपचारिक रूप से अवगत कराया गया। संगठन का कहना है कि यह कदम लंबे समय से लंबित मांगों और लाभांश वृद्धि में हो रही देरी के कारण उठाना पड़ा है।

3 अगस्त की बैठक में लिया गया सर्वसम्मति से निर्णय

ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर 3 अगस्त को जनपद के उचित दर विक्रेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के राशन विक्रेताओं ने भाग लिया और विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि लाभांश वृद्धि संबंधी आदेश जारी होने तक राशन वितरण कार्य रोका जाएगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी विक्रेता संगठन के निर्णय का पालन करेंगे और किसी भी स्तर पर एकजुटता बनाए रखेंगे। संगठन का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही उनकी मांगों पर प्रभावी ढंग से विचार किया जाएगा।

लाभांश बढ़ाने का आश्वासन, लेकिन आदेश अभी तक नहीं

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों की ओर से पहले यह जानकारी दी गई थी कि उचित दर विक्रेताओं का लाभांश बढ़ाकर प्रति कुंतल 125 रुपये किए जाने पर विचार किया गया है। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

विक्रेताओं का कहना है कि मौखिक आश्वासन के आधार पर कार्य करना संभव नहीं है। उनका मानना है कि जब तक शासन स्तर से लिखित आदेश जारी नहीं होगा, तब तक लाभांश वृद्धि को लागू नहीं माना जा सकता। इसी कारण संगठन ने वितरण कार्य रोकने का निर्णय लिया है।

आर्थिक दबाव का हवाला

उचित दर विक्रेताओं का कहना है कि वर्तमान समय में परिवहन, श्रम, रखरखाव, बिजली, किराया और अन्य संचालन संबंधी खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला लाभांश उनकी वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं है।

संगठन का कहना है कि यदि समय रहते लाभांश में संशोधन नहीं किया गया तो राशन दुकानों का संचालन आर्थिक रूप से कठिन होता जाएगा। उनका तर्क है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सफलता के लिए उचित दर विक्रेताओं का आर्थिक रूप से सक्षम होना भी आवश्यक है।

विभाग पर दबाव न बनाने की मांग

ज्ञापन में संगठन ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग से अनुरोध किया है कि राशन वितरण बंद रहने की अवधि के दौरान किसी भी विक्रेता पर वितरण शुरू करने का दबाव न बनाया जाए।

विक्रेताओं का कहना है कि यदि किसी अधिकारी, पूर्ति निरीक्षक या अन्य विभागीय कर्मचारी द्वारा दबाव बनाया गया तो संगठन इसे गंभीरता से लेगा और व्यापक आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में साफ शब्दों में कहा है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई या विक्रेताओं पर दबाव डाला गया, तो जिले के सभी उचित दर विक्रेता सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य आम जनता को असुविधा पहुंचाना नहीं है, बल्कि अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए सरकार और विभाग का ध्यान आकर्षित करना है। इसलिए उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक पहल करने की अपेक्षा जताई है।

प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग

विक्रेताओं ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर उनकी मांगों को पहुंचाया जाए। उनका कहना है कि यदि लाभांश वृद्धि का लिखित आदेश शीघ्र जारी हो जाता है तो राशन वितरण सामान्य रूप से शुरू किया जा सकता है।

संगठन का यह भी कहना है कि समय पर समाधान निकलने से लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी सुचारु रूप से संचालित होती रहेगी।

लाभार्थियों पर पड़ सकता है असर

यदि राशन वितरण लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों को राशन प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल संगठन ने एक सप्ताह तक वितरण स्थगित रखने की घोषणा की है और आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन और संगठन के बीच संवाद के माध्यम से समाधान निकालना सबसे प्रभावी तरीका होता है ताकि न तो लाभार्थियों को परेशानी हो और न ही उचित दर विक्रेताओं की समस्याएं लंबित रहें।

अब सभी की निगाहें खाद्य एवं रसद विभाग और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि लाभांश वृद्धि से संबंधित शासनादेश जल्द जारी होता है, तो राशन वितरण सामान्य होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर, यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो जिले में आंदोलन और हड़ताल की स्थिति बन सकती है।

फिलहाल संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि लिखित आदेश मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब प्रशासन और शासन के निर्णय से ही आगे की स्थिति तय होगी।