फर्रुखाबाद में विधिक साक्षरता शिविर: सचिव विदिशा भटनागर बोलीं- अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जानकारी भी जरूरी
रिपोर्ट – हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद: आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फर्रुखाबाद की ओर से मंगलवार को बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अन्य प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सहायता, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की योजनाओं, लोक अदालत, मध्यस्थता (मेडिएशन) और लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के निर्देशन में आयोजित किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव विदिशा भटनागर उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विधिक साक्षरता केवल कानून की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी रखें ध्यान
अपने संबोधन में सचिव विदिशा भटनागर ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी होना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी अपने कर्तव्यों को समझना और उनका पालन करना भी है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग होते हैं, तभी समाज में न्याय, समानता और विधि का शासन मजबूत होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी है। इसलिए युवाओं को कानूनी जानकारी प्राप्त कर उसे समाज के अन्य लोगों तक भी पहुंचाना चाहिए।
NALSA की योजनाओं की दी विस्तृत जानकारी
विदिशा भटनागर ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर, जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल आर्थिक कारणों से न्याय पाने से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति सहित पात्र वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की बताई उपयोगिता
कार्यक्रम के दौरान लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था ऐसे जरूरतमंद व्यक्तियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, जो स्वयं सक्षम अधिवक्ता की सेवाएं लेने में असमर्थ हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना और न्याय व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करना है।
लोक अदालत और मध्यस्थता पर दिया विशेष जोर
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को राष्ट्रीय लोक अदालत, स्थायी लोक अदालत तथा मध्यस्थता (मेडिएशन) के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
विदिशा भटनागर ने बताया कि लोक अदालतों के माध्यम से अनेक मामलों का शीघ्र, सरल और कम खर्च में निस्तारण संभव होता है। वहीं, मध्यस्थता विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि यदि छोटे-छोटे विवाद समय रहते मध्यस्थता के माध्यम से सुलझा लिए जाएं तो न्यायालयों पर मामलों का बोझ भी कम होगा और पक्षकारों के बीच आपसी संबंध भी बेहतर बने रहेंगे।
विद्यार्थियों से समाज में जागरूकता फैलाने की अपील
सचिव विदिशा भटनागर ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिविर में प्राप्त कानूनी जानकारी को अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि एक जागरूक छात्र न केवल अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है, बल्कि समाज में विधिक जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। युवाओं की भागीदारी से ही कानूनी जागरूकता अभियान अधिक प्रभावी बन सकता है।
विशेषज्ञों ने भी साझा किए महत्वपूर्ण विचार
कार्यक्रम में रिटेनर अधिवक्ता विक्रम सिंह चाहर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं और पात्र व्यक्तियों को मिलने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्याय तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है।
वहीं मध्यस्थ जवाहर सिंह गंगवार ने मध्यस्थता की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपसी संवाद और समझ के माध्यम से विवादों का समाधान समाज में सौहार्द और विश्वास को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रतिभागियों को मध्यस्थता की प्रक्रिया और उसके लाभों से भी अवगत कराया।
इसके अतिरिक्त सीता ने विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व और विधिक जागरूकता के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने युवाओं से कानून का सम्मान करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
महाविद्यालय प्रशासन ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में बद्री विशाल डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. जय श्री मिश्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने छात्रों से भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की, ताकि वे कानून, संविधान और नागरिक कर्तव्यों की बेहतर समझ विकसित कर सकें।
बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने की सहभागिता
शिविर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं महाविद्यालय के कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कानूनी विषयों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया।
इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों ने निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता, महिला अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा अन्य कानूनी विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा भी मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

