खरगे का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- सदन में प्रधानमंत्री जवाब दें, जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
Digital Up News Desk
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में जवाब देने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
खरगे का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बहस और विरोध देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल कई विषयों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसदीय नियमों के तहत सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है।
एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “प्रभु राम के नाम पर लूट की गई” और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में जवाबदेही से बच नहीं सकते। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग (Income Tax Department) जैसी एजेंसियां इस मामले में क्या भूमिका निभा रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने सरकार से देश को गुमराह न करने की अपील करते हुए संसद में प्रधानमंत्री से विस्तृत जवाब देने की मांग की।
संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद सबसे बड़ा मंच है और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर वहीं चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी मामले को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को संसद के भीतर उसका जवाब देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की भूमिका जनता के सवालों को सदन तक पहुंचाने की होती है और सरकार का दायित्व उन प्रश्नों का उत्तर देना है। इसलिए संसद में खुली और तथ्यात्मक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना का हिस्सा है।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठाए प्रश्न
अपने बयान में खरगे ने ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का उल्लेख करते हुए पूछा कि यदि किसी मामले में गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो संबंधित जांच एजेंसियां क्या कार्रवाई कर रही हैं।
हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में किसी विशेष जांच की स्थिति या किसी आधिकारिक रिपोर्ट का उल्लेख नहीं किया। दूसरी ओर, संबंधित एजेंसियों की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विपक्ष लगातार उठा रहा है विभिन्न मुद्दे
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई विषयों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि जनहित से जुड़े मामलों पर सदन में प्राथमिकता के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
विपक्ष का यह भी कहना है कि संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत बहस लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है। इसी क्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने भी प्रधानमंत्री से सदन में जवाब देने की मांग दोहराई है।
सरकार का पक्ष
वहीं, केंद्र सरकार पहले भी कई अवसरों पर यह कह चुकी है कि वह संसद में सभी विषयों पर नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है। सरकार का कहना है कि संसदीय प्रक्रिया के अनुसार विपक्ष अपने मुद्दे उठाए और सरकार उनका उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और सभी दलों को सदन की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद की भूमिका
भारतीय लोकतंत्र में संसद नीति निर्माण, कानून बनाने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का सर्वोच्च मंच है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी संवैधानिक भूमिकाएं हैं। जहां सरकार नीतियों और निर्णयों का पक्ष रखती है, वहीं विपक्ष उन पर सवाल उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में स्वस्थ बहस और तथ्य आधारित चर्चा लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। ऐसे में महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद और संसदीय प्रक्रिया का पालन लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप माना जाता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी
खरगे के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। विपक्ष इसे जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह संसदीय नियमों के अनुसार सदन में चर्चा के लिए तैयार है।
आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि इस मुद्दे पर सदन में आगे क्या चर्चा होती है और सरकार की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाती है।

