पीएम सूर्य घर योजना ने पार किया 50 लाख परिवारों का आंकड़ा, 19 लाख घरों का बिजली बिल हुआ शून्य
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित इस योजना के तहत अब तक 50.06 लाख से अधिक परिवारों के घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही लगभग 19 लाख परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है, जबकि देशभर में 14.8 गीगावाट की रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, योजना की शुरुआत के महज दो वर्षों में हासिल की गई यह उपलब्धि भारत में सौर ऊर्जा क्रांति की तेज रफ्तार को दर्शाती है। इसके अलावा जुलाई 2026 में एक ही महीने में 5.06 लाख नए रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए, जो योजना शुरू होने के बाद का अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है।
हर छह दिन में एक लाख परिवार जुड़ रहे
सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित इस योजना से अब औसतन हर छह दिन में एक लाख नए परिवार जुड़ रहे हैं। पिछले नौ महीनों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति 3.2 गुना बढ़ी है।
अक्टूबर 2025 में प्रतिदिन औसतन 5,038 इंस्टॉलेशन हो रहे थे, जबकि जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 16,328 इंस्टॉलेशन प्रतिदिन पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
विश्व का सबसे बड़ा रूफटॉप सोलर कार्यक्रम
75,021 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली पीएम सूर्य घर योजना को दुनिया के सबसे बड़े रूफटॉप सोलर कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को सौर ऊर्जा से जोड़कर बिजली के खर्च को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
19 लाख परिवारों का बिजली बिल हुआ शून्य
योजना का सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को मिला है जिनके घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं। सरकार के अनुसार, अब तक लगभग 19 लाख परिवारों का मासिक बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
इससे घरेलू खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है और लाखों परिवारों को नियमित रूप से आर्थिक राहत मिल रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
अतिरिक्त बिजली बेचकर हुई कमाई
पीएम सूर्य घर योजना केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों के घरों में जरूरत से अधिक बिजली उत्पन्न हो रही है, वे अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त बिजली बेचकर कुल 421 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। औसतन प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष लगभग 3,500 रुपये की अतिरिक्त आय हुई।
इससे यह योजना ऊर्जा बचत के साथ-साथ आय का भी नया स्रोत बनकर उभरी है।
28,024 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे खातों में
सरकार ने लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली अपनाई है।
अब तक 28,024 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी है और लाभार्थियों को किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
आसान ऋण सुविधा से बढ़ी पहुंच
कम आय वाले परिवारों को भी योजना का लाभ मिल सके, इसके लिए सरकार ने रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया है।
अब तक 21.87 लाख आवेदकों को लगभग 5.75 प्रतिशत की रियायती दर पर ऋण स्वीकृत किया गया है। इनमें से 17.5 लाख इंस्टॉलेशन ऋण वित्तपोषण के माध्यम से पूरे किए जा चुके हैं।
इसके अलावा जनसमर्थ पोर्टल से एकीकरण के कारण पूरी ऋण प्रक्रिया पेपरलेस और ऑनलाइन हो गई है।
गरीब परिवारों पर विशेष फोकस
सरकार ने PMAY, BPL तथा SC/ST परिवारों को प्राथमिकता देने के लिए यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन मॉडल लागू किया है।
इस मॉडल के तहत चार राज्यों में 1.6 लाख इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं, जबकि इसे 12 राज्यों में लागू करने की मंजूरी दी जा चुकी है।
इस पहल से कम आय वाले परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान हुआ है और राज्यों पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी कम हो रहा है।
रोजगार और उद्योग को मिला बढ़ावा
पीएम सूर्य घर योजना का प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसने रोजगार और उद्यमिता को भी नई गति दी है।
देशभर में अब तक—
- 34,219 पंजीकृत विक्रेता जुड़े हैं।
- इनमें 29,469 विक्रेता सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
- 2.32 लाख से अधिक लोगों को सौर ऊर्जा से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है।
इससे सौर ऊर्जा उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूती मिली है।
पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल
योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया है।
आवेदन से लेकर सब्सिडी प्राप्त करने तक लाभार्थियों को किसी प्रकार की कागजी कार्रवाई या सरकारी कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होती।
योजना में—
- ऑनलाइन आवेदन
- डिजिटल नेट मीटरिंग
- API आधारित DISCOM एकीकरण
- PFMS के माध्यम से 15 दिनों में सब्सिडी
- विक्रेता स्टार रेटिंग
- घरेलू कंटेंट अनुपालन के लिए DCR पोर्टल
जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाएं शामिल हैं।
सरकारी भवनों में भी तेजी से सौर ऊर्जा
पीएम सूर्य घर योजना के तहत सरकारी भवनों में भी बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 41,542 उपयुक्त भवनों की पहचान की है, जिनमें से 25,255 भवनों पर सौर परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।
इसी प्रकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 3.20 लाख भवनों की पहचान की है, जिनमें से 81,329 भवनों पर सौर परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
कुल मिलाकर देशभर में अब तक 1.06 लाख सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं।
शुल्क में राहत और गुणवत्ता पर जोर
रूफटॉप सोलर को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार ने 10 किलोवाट तक की परियोजनाओं पर कई प्रकार की अनुमोदन और व्यवहार्यता फीस समाप्त कर दी है।
इसके अलावा—
- 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने आवेदन एवं नेट मीटरिंग शुल्क समाप्त किया।
- DISCOM को 3,807.6 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया।
- शहरी स्थानीय निकायों को लगभग 104 करोड़ रुपये जारी किए गए।
- 46 शहरों में सिटी एक्सेलेरेटर कार्यक्रम शुरू किया गया।
- लगभग 23,000 तृतीय-पक्ष गुणवत्ता निरीक्षण कराए गए।
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का मजबूत आधार बन चुकी है। 50 लाख से अधिक परिवारों तक पहुंच, 19 लाख परिवारों का शून्य बिजली बिल, 14.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता और रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन इस योजना की सफलता को दर्शाते हैं।
इसके साथ ही डिजिटल प्रक्रिया, प्रत्यक्ष सब्सिडी, आसान ऋण, रोजगार सृजन और सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा विस्तार जैसी पहलें भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। आने वाले वर्षों में यह योजना न केवल लाखों परिवारों को आर्थिक राहत देगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को भी और मजबूत करेगी।

