फतेहपुर में आवास योजना के नाम पर कथित वसूली और सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
रिपोर्ट- राम चन्द्र सैनी
फतेहपुर। जिले के विकासखंड तेलियानी की ग्राम पंचायत माधव मेदनीपुर एक बार फिर ग्रामीणों की शिकायतों को लेकर चर्चा में है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित रूप से ग्रामीणों से धनराशि वसूलने, सरकारी तालाब और चकरोड पर अवैध कब्जा करने तथा सिंचाई के लिए रजबहा का पानी रोकने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पत्र पर कई ग्रामीणों के साथ कांग्रेस नेताओं के भी हस्ताक्षर बताए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो गांव में किसानों, आम नागरिकों और सरकारी संपत्तियों से जुड़े विवाद और गंभीर हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने प्रशासन से मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने का अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर रुपये लेने का आरोप
शिकायत पत्र के अनुसार ग्राम पंचायत के गांव केकई निवासी एक व्यक्ति पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का भरोसा देकर ग्रामीणों से प्रति व्यक्ति पांच हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि लगभग नौ लोगों से कुल 45 हजार रुपये लिए गए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी संबंधित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इतना ही नहीं, जब उन्होंने अपनी धनराशि वापस मांगी तो कथित रूप से रुपये लौटाने से भी इनकार किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर धनराशि की सत्यता की पड़ताल करने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
हालांकि, इस मामले में संबंधित व्यक्ति का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
रजबहा का पानी रोके जाने से किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत की जमीन से होकर गुजरने वाले रजबहा में कुछ लोगों द्वारा बल्लियां और टीन लगाकर पानी का प्रवाह रोक दिया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार इस कारण पानी आगे गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। आरोप है कि पानी को रोककर कुछ लोग अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, जबकि अन्य किसानों के खेत सूखे रह जा रहे हैं। इससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर है। यदि रजबहा का पानी समान रूप से नहीं पहुंचेगा तो धान सहित अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए उन्होंने प्रशासन से अवैध रूप से लगाए गए अवरोधों को हटवाने और पानी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल कराने की मांग की है।
सरकारी तालाब पर कब्जे का भी लगाया आरोप
शिकायत में सरकारी तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज लगभग चार बीघा सरकारी तालाब की अधिकांश भूमि पर कब्जा कर लिया गया है।
उनका दावा है कि वर्तमान में मौके पर केवल एक छोटा हिस्सा ही तालाब के रूप में दिखाई देता है, जबकि बाकी भूमि पर निर्माण कार्य कर मकान बना लिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब का स्वरूप समाप्त होने से वर्षा का पानी सही तरीके से एकत्र नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप पानी गांव की गलियों में भर जाता है, जिससे जलभराव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाब की राजस्व अभिलेखों के अनुसार पैमाइश कराकर यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
चकरोड पर कब्जे से आवागमन प्रभावित होने का आरोप
ग्रामीणों ने शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि गांव के राजस्व अभिलेखों में दर्ज चकरोड पर कुछ लोगों ने कब्जा कर उसे जोत लिया है। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हो रही है और भविष्य में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों का मानना है कि चकरोड सार्वजनिक उपयोग की भूमि होती है और इस पर किसी प्रकार का निजी कब्जा नहीं होना चाहिए। इसलिए उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों से सीमांकन कराकर चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी तालाब और चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा रजबहा में पानी के प्रवाह को बाधित करने वाले अवरोधों को तत्काल हटवाया जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन की समयबद्ध कार्रवाई से गांव में कानून व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर योजना के नाम पर धन वसूली की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।
इसी प्रकार सरकारी तालाब, चकरोड और सिंचाई संसाधन सार्वजनिक संपत्ति हैं। इनका संरक्षण ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कृषि व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इनसे जुड़े किसी भी विवाद का समाधान राजस्व एवं संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार किया जाना आवश्यक है।
प्रशासनिक जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल यह मामला शिकायत के आधार पर सामने आया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो प्रशासन अपनी रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट करेगा।
ग्रामीणों को अब जिलाधिकारी स्तर से होने वाली कार्रवाई का इंतजार है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में सहायक होती है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत करती है।

