कानपुर में युग दधीचि संस्थान का अंगदान जागरूकता अभियान शुरू, 13 अगस्त तक चलेगा विशेष पंजीकरण अभियान
रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा
कानपुरः समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को जीवनदान जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य से जोड़ने के उद्देश्य से युग दधीचि संस्थान ने 3 अगस्त से 13 अगस्त तक विशेष राष्ट्रीय अंगदान जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को अंगदान की प्रक्रिया, इसके महत्व तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही, जो लोग स्वेच्छा से अंगदान का संकल्प लेना चाहते हैं, उनका पंजीकरण भी किया जाएगा।
सोमवार को बाल भवन, फूलबाग में आयोजित पत्रकार वार्ता में अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने बताया कि यह दस दिवसीय अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान का संकल्प लेते हैं तो भविष्य में हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
इच्छुक लोग ऐसे करा सकते हैं पंजीकरण
पत्रकार वार्ता के दौरान बताया गया कि जो नागरिक अंगदान का संकल्प लेना चाहते हैं, वे मोबाइल नंबर 9839161790 अथवा 9453482790 पर फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। अभियान के दौरान जिन लोगों का पंजीकरण पूरा हो जाएगा, उन्हें 13 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष समारोह में सम्मानपूर्वक प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
आयोजकों का कहना है कि इस सम्मान का उद्देश्य लोगों को प्रेरित करना है ताकि अधिक से अधिक नागरिक इस मानवीय अभियान से जुड़ सकें।
अंगदान क्यों है महत्वपूर्ण
मनोज सेंगर ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अंगदान को सबसे बड़ा मानव सेवा कार्य माना जाता है। एक व्यक्ति का अंगदान कई जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचा सकता है। देश में हर वर्ष हजारों मरीज किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन अंग उपलब्ध न होने के कारण अनेक लोगों की समय पर जान नहीं बच पाती।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तो अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
कब किया जा सकता है अंगदान
विशेषज्ञों ने बताया कि अंगदान केवल निर्धारित चिकित्सकीय परिस्थितियों में ही संभव होता है। जब किसी व्यक्ति की ब्रेन डेथ (Brain Death) हो जाती है और चिकित्सकीय रूप से यह स्पष्ट हो जाता है कि कुछ समय बाद क्लीनिकल डेथ होने वाली है, तब सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंगदान किया जा सकता है।
हालांकि, इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त परिजनों की लिखित सहमति होती है। इसके बाद संपूर्ण प्रक्रिया सरकारी दिशा-निर्देशों और अधिकृत मेडिकल टीम की निगरानी में पूरी की जाती है। इसलिए किसी भी प्रकार की अवैध या अनियमित प्रक्रिया की संभावना नहीं रहती।
NOTTO की निगरानी में होती है पूरी प्रक्रिया
अभियान के दौरान बताया गया कि भारत सरकार की संस्था नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) पूरे देश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था का संचालन करती है। NOTTO राज्य स्तरीय समितियों को दिशा-निर्देश जारी करता है, जबकि राज्य स्तर की टीम स्थानीय सरकारी अस्पतालों और अधिकृत चिकित्सकीय संस्थानों के सहयोग से अंगदान की प्रक्रिया पूरी कराती है।
यही कारण है कि अंगदान पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत संपन्न होता है।
एक अंगदाता दे सकता है आठ लोगों को नया जीवन
अभियान प्रमुख ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों को नया जीवन मिल सकता है। एक व्यक्ति की दो आंखें, दो किडनी, हृदय, यकृत (लीवर), अग्नाशय (पैंक्रियाज) और फेफड़े अलग-अलग जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अंगों की जीवन अवधि बहुत कम होती है। इसलिए अंग प्राप्त होने के तुरंत बाद प्रशासन और चिकित्सा विभाग की सहायता से उन्हें निर्धारित अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है ताकि समय पर प्रत्यारोपण किया जा सके।
नेत्रदान सबसे सरल और प्रभावी विकल्प
विशेषज्ञों ने बताया कि अंगदान के साथ नेत्रदान संकल्प भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आंखों का कॉर्निया मृत्यु के बाद कुछ घंटों तक सुरक्षित रहता है। इसी कारण नेत्रदान अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
यदि अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें तो हजारों दृष्टिबाधित लोगों को नई रोशनी मिल सकती है। यही वजह है कि संस्थान इस अभियान में नेत्रदान के प्रति भी विशेष जागरूकता फैलाएगा।
किन लोगों का अंगदान नहीं हो सकता
पत्रकार वार्ता में स्पष्ट किया गया कि प्रत्येक व्यक्ति अंगदान के लिए उपयुक्त नहीं होता। गंभीर संक्रामक या कुछ विशेष बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों का अंगदान अथवा देहदान नहीं किया जा सकता।
इनमें प्रमुख रूप से कैंसर, हेपेटाइटिस-बी, सेप्टीसीमिया, एचआईवी संक्रमण तथा कुछ गंभीर संक्रामक रोगों से प्रभावित मरीज शामिल हैं। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय मानकों के अनुसार अंगदान की अनुमति नहीं दी जाती।
समाज में फैली भ्रांतियों को किया जाएगा दूर
मनोज सेंगर ने कहा कि समाज में आज भी अंगदान को लेकर अनेक प्रकार की भ्रांतियां और गलत धारणाएं मौजूद हैं। कई लोग जानकारी के अभाव में अंगदान से पीछे हट जाते हैं। इसलिए इस अभियान के दौरान विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न मंचों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञ लोगों को अंगदान की वास्तविक प्रक्रिया, कानूनी प्रावधानों और इसके सामाजिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही लोगों के सवालों और शंकाओं का समाधान भी किया जाएगा।
विभिन्न संगठनों का मिला सहयोग
पत्रकार वार्ता में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अभियान का समर्थन किया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव माहना, रेडक्रॉस चेयरपर्सन डॉ. उमेश पालीवाल, उत्कर्ष अकादमी के निदेशक डॉ. प्रदीप दीक्षित तथा एक्स सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष मेजर योगेंद्र कटियार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सभी वक्ताओं ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा का विषय नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। यदि समाज इस दिशा में आगे बढ़ेगा तो अनगिनत परिवारों को नई उम्मीद और नया जीवन मिल सकेगा।
मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम
विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान एक ऐसा संकल्प है जो मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति को समाज के लिए जीवित रखता है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को इस विषय में सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और परिवार के साथ इस पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
युग दधीचि संस्थान का यह दस दिवसीय अभियान इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। यदि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग लेते हैं, तो आने वाले समय में अंगों की कमी से जूझ रहे हजारों मरीजों को नई जिंदगी मिलने की संभावना और मजबूत होगी। साथ ही, समाज में मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी और अधिक सशक्त होगी।

