कानपुर में आढ़ती देवेश शुक्ला मौत मामले में चौकी प्रभारी-दरोगा निलंबित, विभागीय जांच के आदेश
रिपोर्ट-कृष्णा शर्मा
कानपुर: कानपुर के चर्चित आलू आढ़ती देवेश शुक्ला मौत मामले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडस्ट्रियल चौकी प्रभारी और एक दरोगा को निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने के बाद डीसीपी पश्चिम ने यह कार्रवाई की। इसके अलावा सचेंडी और पनकी थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब देवेश शुक्ला के परिजनों को कई दिन बाद यह जानकारी मिली कि उनकी गुमशुदगी के दौरान ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी तथा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी हो चुका था। इसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठे और मामले की जांच शुरू कराई गई।
गुमशुदगी के बाद शुरू हुई जांच
जूही निवासी मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि उनके भाई देवेश शुक्ला चकरपुर मंडी में देवेश कुमार योगेश कुमार एंड संस के नाम से आलू आढ़त का कारोबार करते थे। वह 2 जुलाई को मंडी गए थे, लेकिन वापस घर नहीं लौटे।
परिजनों ने काफी तलाश के बाद 5 जुलाई को सचेंडी थाने में मंडी व्यापारी संजू पाल, उसके मुनीम टिंकू यादव और ऑटो चालक प्रियांशु के खिलाफ अपहरण समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले में संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि अन्य आरोपियों से भी पूछताछ शुरू कर दी गई।
परिजनों को बाद में मिली मौत की जानकारी
मामले में नया मोड़ तब आया जब देवेश शुक्ला के परिजन कचहरी से लौटने के बाद फील्ड यूनिट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि देवेश की 7 जुलाई को मृत्यु हो चुकी थी और 10 जुलाई को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
यह जानकारी मिलने के बाद परिवार स्तब्ध रह गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते उनकी पहचान कर ली जाती तो वे अपने भाई का अंतिम संस्कार स्वयं कर सकते थे।
घायल अवस्था में मिलने की सूचना पर नहीं हुई गंभीर कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 3 जुलाई को पनकी पुलिस को सूचना मिली थी कि मौरंग मंडी के पास एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा है। सूचना देने वाले ने बताया था कि उसके सिर और नाक से खून निकल रहा था तथा वह अचेत अवस्था में था।
इसके बाद घायल व्यक्ति को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुर ले जाया गया, जहां से उसे उर्सला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
जांच में यह भी सामने आया कि घायल मिलने की सूचना इंडस्ट्रियल चौकी प्रभारी के पास पहुंची थी, लेकिन उन्होंने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी।
चौकी प्रभारी और दरोगा निलंबित
डीसीपी पश्चिम की प्रारंभिक जांच में इंडस्ट्रियल चौकी प्रभारी विकास वर्मा (समाचार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। उन पर आरोप है कि घायल मिलने की सूचना के बावजूद उन्होंने आवश्यक कार्रवाई नहीं की।
वहीं दरोगा शरद कुमार, जिन्होंने पोस्टमार्टम से पहले पंचनामा भरा था, उन पर मृतक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप लगा। जांच के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
दो थाना प्रभारियों की विभागीय जांच
मामले में केवल दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई तक ही मामला सीमित नहीं रहा। डीसीपी पश्चिम ने सचेंडी और पनकी थाना प्रभारियों की कार्यप्रणाली की भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गुमशुदगी दर्ज होने और अज्ञात शव मिलने के बावजूद दोनों मामलों का मिलान समय रहते क्यों नहीं किया गया। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
देवेश शुक्ला के परिवार ने आरोप लगाया है कि यह केवल लापरवाही का मामला नहीं बल्कि हत्या और लूट से जुड़ा मामला हो सकता है।
परिजनों के अनुसार, देवेश नियमित रूप से सोने की चेन और अंगूठी पहनते थे। उनका कहना है कि पंचनामा में इन आभूषणों का उल्लेख नहीं किया गया। इसके अलावा जब वह मंडी से निकलते थे, तब उनके पास व्यापार से संबंधित नकदी भी रहती थी, जिसका अब तक कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और पुलिस ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है।
पुलिस हिरासत में दो अन्य आरोपी
घटना की जांच के दौरान पुलिस ने रविवार को मुनीम टिंकू यादव और चालक प्रियांशु को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां मोबाइल कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
पुलिस प्रशासन ने क्या कहा?
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आई लापरवाही के आधार पर चौकी प्रभारी और एक दरोगा को निलंबित किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सचेंडी और पनकी थाना प्रभारियों की विभागीय जांच कराई जाएगी। यदि जांच में अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई जाती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहचान प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
यह मामला पुलिस की पहचान प्रक्रिया और गुमशुदगी के मामलों के समन्वय पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुमशुदगी की रिपोर्ट और अज्ञात शवों का समय पर मिलान किया जाए, तो ऐसे मामलों में परिजनों को अनावश्यक पीड़ा से बचाया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड और विभिन्न थानों के बीच बेहतर समन्वय भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
चौकी प्रभारी और दरोगा का निलंबन
कानपुर के आढ़ती देवेश शुक्ला की मौत के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। चौकी प्रभारी और दरोगा का निलंबन तथा दो थाना प्रभारियों की विभागीय जांच इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
वहीं, मामले की आपराधिक जांच भी जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

