बिजनौर में गुलदार का आतंक: खुशालपुर गांव में पालतू कुत्ते का शिकार, ग्रामीणों ने वन विभाग से लगाई गुहार

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रिपोर्ट – तबिश मिर्जा

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के खुशालपुर गांव में देर रात एक गुलदार के आने से ग्रामीणों में चिंता का माहौल बन गया। गांव में घर के बाहर बंधे एक पालतू कुत्ते को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया।

घटना के बाद आसपास के लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। पूरी घटना पास में लगी एक चक्की के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना के बाद मौके पर खून के निशान और वन्यजीव के पंजों के निशान मिलने की जानकारी सामने आई। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और गुलदार को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की मांग की है।

देर रात घर के बाहर हुआ हमला

ग्रामीणों के अनुसार घटना देर रात की है, जब अधिकांश लोग अपने घरों में थे। इसी दौरान घर के बाहर बंधे पालतू कुत्ते पर एक गुलदार ने हमला किया और उसे दबोचकर जंगल की ओर ले गया।

सुबह जब लोगों ने आसपास का निरीक्षण किया तो वहां खून के निशान दिखाई दिए। इसके बाद पास में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी गई, जिसमें कथित रूप से गुलदार के कुत्ते को ले जाते हुए दिखाई देने की बात सामने आई।

हालांकि, वन विभाग द्वारा सीसीटीवी फुटेज की औपचारिक जांच की जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज बना जांच का आधार

घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज को वन विभाग की टीम ने जांच के लिए देखा है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज और मौके से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जाएगी।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, पंजों के निशान और घटनास्थल के निरीक्षण से वन्यजीव की पहचान करने में सहायता मिलती है।

ग्रामीणों में बढ़ी सतर्कता

घटना के बाद गांव के लोगों ने बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गुलदार आबादी के पास लगातार आता रहा तो भविष्य में किसी बड़ी घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों ने लोगों से अपील की है कि रात के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और छोटे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें।

इसके अलावा पालतू पशुओं को खुले स्थान पर बांधने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह भी दी जा रही है।

वन विभाग से की गई पिंजरा लगाने की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो गुलदार दोबारा भी आबादी वाले क्षेत्र में आ सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि वन विभाग नियमित रूप से क्षेत्र में निगरानी करे और लोगों को आवश्यक सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए।

वन विभाग ने शुरू की जांच

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से मिले निशानों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और आवश्यक होने पर पिंजरा लगाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को देखने पर स्वयं उसके पास जाने या उसे पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल विभाग को सूचना दें।

मानसून में बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा ऋतु के दौरान कई बार जंगलों के आसपास रहने वाले वन्यजीव भोजन या अन्य कारणों से आबादी की ओर आ जाते हैं।

ऐसे समय में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। पालतू पशुओं को खुले में न छोड़ना, रात में पर्याप्त रोशनी रखना और बच्चों पर विशेष ध्यान देना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

वन विभाग ने स्थानीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

यदि क्षेत्र में गुलदार दिखाई देता है तो भीड़ इकट्ठा करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और विभाग को तुरंत सूचना दें।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।

जंगलों की सुरक्षा, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ाकर इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बिजनौर के खुशालपुर गांव में पालतू कुत्ते पर हुए कथित गुलदार हमले ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग जांच कर रहा है।

ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में शीघ्र पिंजरा लगाया जाए और नियमित गश्त की जाए ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके। वहीं, वन विभाग ने भी लोगों को सतर्क रहने और जांच पूरी होने तक सहयोग करने की अपील की है।

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