अखिलेश यादव ने राम और हनुमान की भूमिका निभाने वाले कलाकारों को किया सम्मानित, कलाकारों के सम्मान पर कही बड़ी बात
Digital UP News Desk
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रभु श्रीराम और प्रभु हनुमान का स्वरूप धारण करने वाले दो कलाकारों को 51-51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं सम्मान राशि प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने कलाकारों के सम्मान, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और कला के संरक्षण को लेकर अपनी पार्टी की सोच को विस्तार से रखा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो कलाकारों के सम्मान और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी।
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि जो कलाकार भारतीय परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं को मंच के माध्यम से समाज तक पहुंचाते हैं, वे सम्मान के पात्र हैं। ऐसे कलाकारों को उचित मंच, पहचान और आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए।
कलाकारों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की पक्षधर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कलाकारों को सम्मान देने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं संचालित की गई थीं। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि उनकी सरकार बनती है तो कलाकारों को पहले से अधिक सम्मान और अवसर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने में कलाकारों का योगदान अमूल्य है। इसलिए सरकार का दायित्व है कि वह उनकी प्रतिभा का सम्मान करे और उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी उपलब्ध कराए।
भाजपा पर लगाए राजनीतिक आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में एक कलाकार की धार्मिक प्रस्तुति का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया। उनके अनुसार, किसी कलाकार की कला का प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कलाकारों का सम्मान उनके योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम में उनकी भूमिका के कारण। हालांकि यह उनके राजनीतिक विचार हैं और इस विषय पर भाजपा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
कलाकारों की आर्थिक स्थिति पर जताई चिंता
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि देश और प्रदेश में कई कलाकार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंचीय कलाकार, लोक कलाकार और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले अनेक लोग सीमित संसाधनों में अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जिन दो कलाकारों को सम्मानित किया गया है, उन्हें आर्थिक सहयोग इसलिए भी दिया गया ताकि वे अपने परिवार की आवश्यकताओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना बेहतर ढंग से कर सकें। उन्होंने कहा कि पार्टी आगे भी जरूरतमंद कलाकारों की सहायता करने का प्रयास करेगी।
कला को बताया सामाजिक सद्भाव का माध्यम
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि कला समाज को जोड़ने का कार्य करती है। उनके अनुसार, कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना, सहिष्णुता, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देने वाली शक्ति भी है।
उन्होंने कहा कि कलाकार समाज के विभिन्न वर्गों और संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते हैं। इसलिए कला और कलाकारों का संरक्षण किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए आवश्यक है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध सांस्कृतिक परंपराओं और लोक कलाओं से है। रामलीला, लोकनृत्य, लोकसंगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां देश की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में इन विधाओं से जुड़े कलाकारों को सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी भविष्य में सांस्कृतिक आयोजनों और पारंपरिक कला रूपों को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाओं पर कार्य करेगी।
‘यश भारती सम्मान’ को लेकर किया बड़ा वादा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो उत्तर प्रदेश से जुड़े विशिष्ट प्रतिभावानों को ‘यश भारती सम्मान’ के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योग्य और चयनित प्रतिभाओं को एक लाख रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
उन्होंने इसे कलाकारों, साहित्यकारों और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि यह घोषणा भविष्य की राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में की गई है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच कलाकारों का मुद्दा चर्चा में
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अक्सर विभिन्न मुद्दों पर देखने को मिलता है। इस बार कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विषय भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना। समाजवादी पार्टी ने कलाकारों के सम्मान को प्राथमिकता देने की बात कही, जबकि इस संबंध में भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोक कलाकारों और पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन देना किसी भी सरकार की सांस्कृतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इससे न केवल सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है बल्कि कलाकारों की आजीविका को भी मजबूती मिलती है।
समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से अखिलेश यादव ने कलाकारों के सम्मान, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर अपनी पार्टी का दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने दो कलाकारों को 51-51 हजार रुपये देकर सम्मानित किया और भविष्य में कलाकारों के हित में व्यापक योजनाएं लागू करने का वादा किया। साथ ही उन्होंने कला को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
राजनीतिक दृष्टि से यह कार्यक्रम कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर नई बहस का कारण बन सकता है। आने वाले समय में इस विषय पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

