जोधपुर जनसुनवाई में अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर हमला, योजनाओं और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
Digital UP News Desk
जोधपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रदेश की भाजपा सरकार की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, जनकल्याणकारी योजनाओं, कर्मचारियों के भुगतान, कानून-व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता को विभिन्न स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि “क्या करें, सरकार हमारी नहीं है।” उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने इसके माध्यम से वर्तमान सरकार की नीतियों और निर्णयों पर अपनी असहमति स्पष्ट रूप से व्यक्त की।
सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
जनसुनवाई के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनके पीछे स्पष्ट योजना दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और व्यापक विचार-विमर्श के निर्णय ले रही है। उनके अनुसार, प्रशासनिक फैसलों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ रहा है और कई मामलों में लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता के हितों की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कई योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
गांवों में सफाई टैक्स को लेकर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने गांवों में सफाई व्यवस्था के नाम पर ₹300 टैक्स लगाए जाने की चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के निर्णय लिए जाते हैं तो सरकार को पहले जनता के सामने उनकी आवश्यकता और उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को किन विशेषज्ञों या अनुभवों के आधार पर ऐसी सलाह दी जा रही है। उनका कहना था कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।
संजीवनी और आदर्श सोसायटी मामलों का किया जिक्र
अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में संजीवनी और आदर्श सोसायटी से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित मंत्रियों पर कोई आरोप सिद्ध नहीं है, तो सभी पक्षों को मिलकर जनता के हित में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से कई बार सरकार को सहयोग का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उस दिशा में सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी होती है कि जनता के हितों से जुड़े विषयों पर मिलकर समाधान तलाशें।
जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई कई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन योजनाओं के संचालन को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित योजनाओं का उल्लेख किया—
- शहरी रोजगार योजना
- पट्टा वितरण अभियान
- आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम)
- चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना
गहलोत का कहना था कि इन योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को राहत देना था, लेकिन अब कई लाभार्थियों को पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अनेक लोगों ने जनसुनवाई में इन योजनाओं से जुड़ी समस्याएं उनके सामने रखीं।
नगर निकायों में भुगतान में देरी का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने नगर निकायों में कार्य करने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों के भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महीनों से भुगतान लंबित होने के कारण कर्मचारियों और ठेकेदारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जब समय पर भुगतान नहीं होता, तब विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाओं के विकास की गति भी धीमी पड़ जाती है।
साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि लंबित भुगतानों का शीघ्र समाधान किया जाए ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान का मुद्दा
अशोक गहलोत ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े वित्तीय मामलों को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि जीपीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय देयों के भुगतान में देरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में दुर्घटना सहायता राशि का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। उनके अनुसार, जांच की प्रक्रिया के नाम पर कई फाइलें रुकी हुई हैं, जिससे प्रभावित परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना चाहिए ताकि पात्र लोगों को समय पर उनका अधिकार मिल सके।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी साधा निशाना
जनसुनवाई के दौरान गहलोत ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद लंबे समय तक रिक्त रहे, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
इसके अलावा उन्होंने हाल ही में राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नत हुए अधिकारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बाद आईपीएस बनने वाले अधिकारी स्वाभाविक रूप से जिला पुलिस प्रमुख के रूप में कार्य करने की अपेक्षा रखते हैं।
उनके अनुसार, अधिकारियों की समय पर नियुक्ति प्रशासनिक दक्षता को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए व्यापक सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने में हो रही देरी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी के कारण आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा और सरकार से जवाब मांगता रहेगा।
राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बयान
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में जोधपुर की यह जनसुनवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के दौरान शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए वर्तमान सरकार पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से सामने रखा।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी। आने वाले समय में इन मुद्दों पर प्रदेश की राजनीति और अधिक सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।
जोधपुर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल उठाते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं, कर्मचारियों के लंबित भुगतान, प्रशासनिक निर्णयों और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर अपनी चिंता व्यक्त की। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विपक्ष के सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए जनता के हित में कार्य करना चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन आरोपों और सुझावों पर राज्य सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और संबंधित मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

