भारत में प्लांट बेस्ड प्रोटीन उत्पादन को बढ़ावा, टीडीबी ने सोनिक बायोकेम को दी वित्तीय सहायता

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास को गति देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसी दिशा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड को एक महत्वपूर्ण परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का नाम “कार्यात्मक और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स का विकास एवं व्यावसायीकरण” है। इसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कार्यात्मक सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स (FSPC) और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स (TSPC) का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू करना है।

यह पहल भारत में प्लांट बेस्ड प्रोटीन उत्पादन को मजबूत करने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि मूल्यवर्धन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

स्वदेशी तकनीक से बनेगा आधुनिक विनिर्माण केंद्र

इस परियोजना के तहत सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित की जाएगी।

इस सुविधा के माध्यम से ऐसे प्रोटीन अवयवों का उत्पादन किया जाएगा, जिनका उपयोग विभिन्न खाद्य उत्पादों में किया जाता है। इनमें प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पौध आधारित मांस विकल्प, पोषण सप्लीमेंट और कार्यात्मक खाद्य उत्पाद प्रमुख हैं।

इसके अलावा यह परियोजना भारत में उच्च गुणवत्ता वाले पादप आधारित प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ाने में भी सहायक होगी।

वैश्विक बाजार में बढ़ रही है प्लांट बेस्ड प्रोटीन की मांग

वर्तमान समय में दुनिया भर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप गैर-जीएमओ (Non-GMO), टिकाऊ और स्वच्छ लेबल वाले खाद्य उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।

विशेष रूप से प्लांट बेस्ड प्रोटीन उत्पादों की मांग वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी उत्पादन क्षमता को मजबूत करे और वैश्विक बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाए।

इसी उद्देश्य के तहत यह परियोजना भारत को मूल्यवर्धित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में एक मजबूत स्थान दिलाने में मदद कर सकती है।

आयात निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम

परंपरागत रूप से सोया प्रोटीन आधारित उत्पादों के निर्माण में महंगे सोया प्रोटीन आइसोलेट (SPI) का उपयोग किया जाता है, जिसकी आपूर्ति के लिए भारत को कई बार आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

विशेषकर चीन और अमेरिका जैसे देशों से आयातित उत्पादों पर निर्भरता के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

हालांकि, सोनिक बायोकेम ने सोया प्रोटीन कंसंट्रेट (SPC) को आधार बनाकर एक स्वदेशी प्रक्रिया विकसित की है। यह तकनीक समान कार्यात्मक गुणवत्ता प्रदान करते हुए उत्पादन लागत को कम करने में सक्षम है।

इससे न केवल भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा, बल्कि देश की आयात निर्भरता भी कम होगी।

कृषि क्षेत्र को मिलेगा लाभ

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें स्थानीय स्तर पर उत्पादित गैर-जीएमओ सोयाबीन का उपयोग किया जाएगा।

इससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी और कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन होगा।

इसके अलावा, सोयाबीन आधारित उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण से कृषि क्षेत्र और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के बीच एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित होगी।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती

भारत सरकार लगातार ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है जो घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा दी गई यह सहायता इसी उद्देश्य का हिस्सा है।

इस परियोजना से भारत में उन्नत खाद्य सामग्री का उत्पादन बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और निर्यात के नए अवसर भी विकसित होंगे।

इसके अलावा, यह पहल खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खाद्य प्रणाली को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

टीडीबी ने बताया रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम

टीडीबी सचिव राजेश कुमार पाठक ने इस पहल को भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि उन्नत पादप प्रोटीन सामग्री के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमता विकसित करना देश के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि टीडीबी आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत ऐसी तकनीकों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो मूल्यवर्धन को बढ़ावा दें, आयात निर्भरता कम करें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार करें।

उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से भारत को निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं और महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना है।

सोनिक बायोकेम ने जताया आभार

सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व ने टीडीबी से मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।

कंपनी ने कहा कि यह सहयोग उसे अपनी स्वदेशी तकनीक को बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप देने में मदद करेगा।

इसके साथ ही कंपनी का लक्ष्य भारत को गैर-जीएमओ सोया प्रोटीन सामग्री के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाना है।

कंपनी ने उम्मीद जताई कि यह तकनीक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौध आधारित पोषण समाधानों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक होगी।

भविष्य में बढ़ेगा भारत का वैश्विक योगदान

खाद्य तकनीक और पोषण क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारत के लिए प्लांट बेस्ड प्रोटीन उत्पादन एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रहा है।

इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।

इसके अलावा, स्वदेशी तकनीक, स्थानीय कच्चे माल और आधुनिक उत्पादन प्रणाली के संयोजन से भारत टिकाऊ खाद्य उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ेगा।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स को दी गई वित्तीय सहायता भारत के खाद्य प्रसंस्करण और पादप आधारित पोषण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, उद्योग और निर्यात क्षेत्र को भी नई संभावनाएं प्रदान करेगी।

स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सोया प्रोटीन कंसंट्रेट का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने से भारत प्लांट बेस्ड प्रोटीन के वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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