यूपी के वकीलों को मिल सकती है कैशलेस इलाज की सुविधा, पढ़िए CM योगी ने गोरखपुर से दिए बड़े संकेत
Digital UP News Desk
गोरखपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की संभावना सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिए हैं कि प्रदेश के वकीलों को भी भविष्य में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्य के लगभग 5 लाख पंजीकृत अधिवक्ताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह संकेत गोरखपुर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दिए। इस अवसर पर उन्होंने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से कहा कि वे इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि इस दिशा में आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सके।
हालांकि, फिलहाल सरकार की ओर से इस योजना की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
गोरखपुर में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दिया संकेत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए लगातार नई योजनाओं पर कार्य कर रही है।
इसी क्रम में उन्होंने अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े विषय का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि बार एसोसिएशन एक व्यवस्थित और व्यवहारिक प्रस्ताव तैयार करके सरकार को भेजता है, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य के बाद अधिवक्ताओं में योजना को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
शिक्षकों की तर्ज पर मिल सकती है सुविधा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित योजना को शिक्षकों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो पात्र अधिवक्ताओं को भी आयुष्मान भारत योजना जैसी कैशलेस उपचार सुविधा का लाभ मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि योजना के अंतर्गत पात्र वकीलों को ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
सरकारी स्तर पर प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद पात्रता, प्रक्रिया, अस्पतालों का चयन और अन्य प्रावधानों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रदेश के लगभग 5 लाख अधिवक्ताओं को हो सकता है लाभ
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता विभिन्न न्यायालयों में कार्यरत हैं। अनुमान है कि प्रदेश में करीब 5 लाख पंजीकृत अधिवक्ता हैं।
यदि सरकार इस योजना को मंजूरी देती है, तो बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक बोझ कम करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी खर्च कई बार परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में कैशलेस इलाज जैसी योजनाएं जरूरतमंद लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसी कारण विभिन्न सरकारी और सामाजिक वर्गों के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं शुरू की जाती रही हैं। यदि अधिवक्ताओं को भी इस प्रकार की सुविधा मिलती है, तो यह उनके पेशेवर जीवन के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत कर सकती है।
प्रस्ताव तैयार करने पर रहेगा आगे का निर्णय
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इस विषय पर आगे की प्रक्रिया बार एसोसिएशन द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव पर निर्भर करेगी।
प्रस्ताव में योजना की रूपरेखा, पात्रता, संभावित लाभार्थियों की संख्या, वित्तीय व्यवस्था और अन्य आवश्यक बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित विभागों द्वारा इसका परीक्षण किया जाएगा और आवश्यक होने पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।
यानी फिलहाल यह प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निर्णय सरकार द्वारा सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
कुछ शर्तों के साथ लागू हो सकती है योजना
जानकारों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो इसमें कुछ पात्रता संबंधी शर्तें भी निर्धारित की जा सकती हैं।
उदाहरण के लिए पंजीकरण की स्थिति, सक्रिय अधिवक्ता होने का प्रमाण, बार एसोसिएशन की सदस्यता या अन्य प्रशासनिक मानदंड शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, इन शर्तों को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने तक योजना के स्वरूप को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
अधिवक्ताओं में बढ़ी उम्मीद
मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिवक्ताओं में इस संभावित योजना को लेकर सकारात्मक चर्चा शुरू हो गई है। कई अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि उन्हें भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलती है, तो गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी।
इसके साथ ही अधिवक्ताओं को स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की श्रृंखला में नया कदम
उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही विभिन्न वर्गों के लिए कई सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं संचालित कर रही है। आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को उपचार की सुविधा मिल रही है।
यदि अधिवक्ताओं के लिए अलग से कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू होती है, तो यह सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी पहलों में एक महत्वपूर्ण विस्तार माना जाएगा।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं और बार एसोसिएशन से प्रस्ताव तैयार करने का आग्रह किया है। इसलिए योजना को लेकर अंतिम निर्णय अभी शेष है।
अब अधिवक्ताओं और संबंधित संगठनों की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रस्ताव कब तैयार होकर शासन को भेजा जाता है और सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।
यदि यह योजना लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। साथ ही, गंभीर बीमारी के उपचार के दौरान आर्थिक सहायता मिलने से अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को भी राहत मिलने की उम्मीद रहेगी।

