हमीरपुर में तनाव प्रबंधन प्रशिक्षण: अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य और कार्य संतुलन के दिए गए टिप्स
रिपोर्ट- मोहम्मद अकरम
हमीरपुर। बदलते कार्य परिवेश और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना बेहद आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमीरपुर जिला प्रशासन की ओर से जनपद स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत विकास एवं तनाव प्रबंधन विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर तरीके से कार्य करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक जानकारी एवं तकनीक उपलब्ध कराना था।
जिलाधिकारी श्री अभिषेक गोयल के निर्देशों के क्रम में विकास भवन सभागार, हमीरपुर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में “तनाव प्रबंधन—काम के दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना” विषय पर विशेषज्ञ प्रशिक्षक डॉ. नीता (साइकोथैरेपिस्ट) ने विस्तार से जानकारी दी।
कार्य दबाव के बीच मानसिक संतुलन जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नीता ने बताया कि वर्तमान समय में कार्यभार में वृद्धि, समय सीमा के अंदर जिम्मेदारियों को पूरा करने का दबाव, जनता की अपेक्षाएं, पारिवारिक दायित्व और बदलती जीवनशैली के कारण तनाव जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन गया है। हालांकि, यदि तनाव को समय रहते पहचाना और नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कहा कि तनाव को समाप्त करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उसका सही प्रबंधन करके व्यक्ति अपने जीवन को अधिक संतुलित और सकारात्मक बना सकता है। इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने अंदर होने वाले बदलावों को पहचाने और तनाव कम करने के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक उपाय अपनाए।
तनाव के लक्षणों और समाधान की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण में अधिकारियों और कर्मचारियों को तनाव के शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञ ने कहा कि लगातार चिंता, थकान, नींद में परेशानी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और काम के प्रति रुचि कम होना तनाव के संकेत हो सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने तनाव कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय बताए। इनमें समय प्रबंधन, कार्यों की प्राथमिकता तय करना, पर्याप्त नींद लेना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित भोजन करना, सकारात्मक सोच विकसित करना और ध्यान एवं श्वास अभ्यास जैसी आदतें शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कार्य और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जब व्यक्ति अपने कार्य के साथ-साथ परिवार, आराम और स्वयं के लिए भी समय निकालता है तो उसकी कार्यक्षमता में सुधार आता है।
अधिकारियों को कराए गए व्यावहारिक अभ्यास
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गहरी श्वास (Deep Breathing) और मानसिक एकाग्रता से जुड़े व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए। इन अभ्यासों के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में स्वयं को शांत रखने और बेहतर निर्णय लेने की तकनीक समझाई गई।
इसके अलावा, प्रतिभागियों को टीम भावना के साथ कार्य करने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञ ने कहा कि एक स्वस्थ और संतुलित मन वाला कर्मचारी ही बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकता है।
टेली-मानस हेल्पलाइन की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नीता ने भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन “टेली-मानस (Tele-MANAS)” के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सेवा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को परामर्श और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि टेली-मानस हेल्पलाइन के माध्यम से तनाव, चिंता, अवसाद, मानसिक दबाव, परीक्षा संबंधी तनाव, पारिवारिक समस्याओं और अन्य मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से संबंधित सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस सेवा का लाभ टोल फ्री नंबर 14416 या 1800-891-4416 पर संपर्क करके निःशुल्क और गोपनीय तरीके से लिया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि यदि स्वयं या उनके परिवार में कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा हो तो बिना संकोच इस सुविधा का उपयोग करें।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
विशेषज्ञ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। अक्सर लोग मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर सही परामर्श और सहयोग मिलने से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने कार्यस्थल पर भी ऐसा वातावरण विकसित करें, जहां कर्मचारी अपनी समस्याओं को सहजता से साझा कर सकें और सकारात्मक माहौल में कार्य कर सकें।
प्रशिक्षण में कई अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर डीसी मनरेगा राघवेंद्र सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (डीसी-एनआरएलएम) ज्ञान प्रकाश, जिला क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निरेन्द्र बहादुर सिंह, डिप्टी आरएमओ घनश्याम वर्मा, जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर, जिला प्रशिक्षण अधिकारी संदीप कुमार, जिला सूचना अधिकारी सतीश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने, कार्य क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा मिली है।
अंततः प्रशिक्षण का मुख्य संदेश यही रहा कि स्वस्थ मन ही प्रभावी, संवेदनशील और जनोन्मुखी प्रशासन की मजबूत नींव है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देकर अधिकारी और कर्मचारी न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि अपने कार्यों को भी अधिक प्रभावी और सकारात्मक तरीके से पूरा कर सकते हैं।

