काॅक्रोच और सरकार के बीच जल्द होगा निर्णायक फैसला… पूरे देश को है इस फैसले का इंतजार, आप भी पढ़कर दीजिए अपना कमेंट्स
Digital UP News Desk
नई दिल्लीः सरकार और काॅक्रोच के बीच जल्द ही निर्णायक फैसला होने वाला है। दरअसल बीते शुक्रवार को सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। यह बैठक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित की गई थी। दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद सीजेपी ने दावा किया था कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए 25 जुलाई 2026 की दोपहर तक का समय मांगा था। शनिवार दोपहर तक सभी को इस बात का इंतजार है कि सरकार आखिर क्या फैसला लेगी। इस पर दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों के साथ ही देशभर के लोगों की निगाहे हैं। यदि सरकार सीजेपी की मांगों को मान लेती है, तो उनकी यह नैतिक जीत मानी जाएगी। वहीं सरकार यदि सीजेपी की मांग नहीं मानती है, तो उनकी यह वार्ता फेल मानी जाएगी।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते एक महीने से छात्रों का प्रोटेस्ट चल रहा है। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। संसद मार्च के दौरान छात्र और छात्राओं पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी थीं।
जिसका विपक्षी पार्टियों से लेकर नेताओं और फिल्म अभिनेताओं ने भी आलोचना की थी। जिसे देखकर देश वासियों में गुस्से में था। जिसकी वजह से सरकार को बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा।
सरकार ने सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाया
सरकार ने बीते 20 जुलाई को काक्रोच जनता पार्टी के पास बातचीत के मैसेज भेजा था। पहले दौर की बैठक में सीजेपी की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोषा रांका और सौरभ दास ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच महज 10 मिनट की बातचीत की थी। इसके बाद शुक्रवार को पर्यावरण और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का हाॅस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अनशन तुड़वाया।
इस पर सरकार ने जताई थी सहमति
इसके बाद बीते शुुक्रवार को सरकार की तरफ से कें्रदीय मंत्री जेपी नड्डा और सीजेपी के प्रतिनिधी मंडल से बातचीत हुई। इसके अलावा, संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन से जुड़ी दो अन्य प्रमुख मांगों को आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर व अन्य कानूनी मामलों को वापस लेने पर सरकार ने सैद्धांतिक सहमति जताई थी।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुई बातची
सीजेपी लंबे समय से यह कह रहा था कि सरकार के साथ बातचीत किसी न्यूट्रल वेन्यू पर होनी चाहिए। इसी क्रम में शुक्रवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे थे। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से बातचीत की और वार्ता को सकारात्मक बताया।हालांकि, कई मुद्दों पर अंतिम निर्णय अगले दौर की बातचीत के बाद ही सामने आने की संभावना है।
जल्द निर्णायक फैसला लेगी
बैठक के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा था कि संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनके अनुसार, सरकार ने इस मांग पर निर्णय लेने के लिए 25 जुलाई 2026 की दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर जल्द निर्णय लेगी।
हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।
मुआवजा और एफआईआर पर बनी सहमति
सीजेपी ने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने आंदोलन के दौरान उठाई गई दो अन्य प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने के प्रस्ताव पर भी सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
सरकार ने क्या कहा था कि प्रतिनिधि मण्डल से सभी विषयों पर चर्चा हुई ?
सरकार की ओर से बातचीत में शामिल जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि संगठन ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सुझाव भी दिए। जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना है और संबंधित स्तर पर चर्चा के बाद अगले दिन फिर बैठक होगी, जिसमें सरकार अपना पक्ष विस्तार से रखेगी।
धर्मेंद्र प्रधान का मुद्दा क्यों बना चर्चा का केंद्र
बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े विषय पर हुई। बताया जा रहा है कि CJP की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया गया, जबकि सरकार की ओर से अलग दृष्टिकोण सामने रखा गया। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन सकी।
हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष ने विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन इतना जरूर स्पष्ट हुआ कि इस विषय पर आगे भी चर्चा जारी रह सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवाद जारी रहना किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान का मुद्दा क्यों बना चर्चा का केंद्र
बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े विषय पर हुई। बताया जा रहा है कि CJP की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया गया, जबकि सरकार की ओर से अलग दृष्टिकोण सामने रखा गया। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन सकी।
हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष ने विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन इतना जरूर स्पष्ट हुआ कि इस विषय पर आगे भी चर्चा जारी रह सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवाद जारी रहना किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।

