श्रावस्ती में विजिलेंस टीम पर अवैध वसूली का आरोप, 25 हजार मांगने का ऑडियो हो रहा वायरल
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक किसान ने आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के बदले उससे 25 हजार रुपये की मांग की गई। इसके साथ ही किसान ने विजिलेंस टीम के सदस्यों पर 7 हजार रुपये ऑनलाइन लिए जाने का भी दावा किया है। इस पूरे मामले से जुड़ा कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विजिलेंस टीम पर किसान ने लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार, मामला श्रावस्ती जिले में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम से जुड़ा बताया जा रहा है। एक किसान ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की विजिलेंस टीम की ओर से उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई। किसान का दावा है कि एफआईआर दर्ज न करने के बदले उससे 25 हजार रुपये की मांग की गई।
किसान के अनुसार, इस मामले में 7 हजार रुपये ऑनलाइन लिए जाने का भी आरोप है। इसके बाद कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो में कथित तौर पर रुपये के लेनदेन और कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। इसलिए इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच जरूरी मानी जा रही है।
कथित ऑडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल
विजिलेंस टीम पर लगे आरोपों के बीच कथित ऑडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऑडियो को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
बिजली विभाग की विजिलेंस टीम का काम बिजली चोरी और अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच करना होता है। ऐसे में यदि किसी टीम पर ही अवैध वसूली के आरोप लगते हैं, तो स्वाभाविक रूप से विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि, केवल वायरल ऑडियो के आधार पर आरोपों को सही नहीं माना जा सकता। ऑडियो की तकनीकी जांच, उसमें मौजूद आवाजों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
FIR दर्ज न करने के बदले रकम मांगने का दावा
किसान की ओर से लगाए गए आरोपों में सबसे गंभीर दावा यह है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के बदले 25 हजार रुपये की मांग की गई। इसके अलावा, 7 हजार रुपये ऑनलाइन लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। सरकारी विभागों की जांच टीमों से आम जनता निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद करती है। ऐसे में किसी भी तरह के अवैध लेनदेन के आरोप विभाग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आना भी जरूरी है, ताकि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर गलत आरोपों के कारण उसकी छवि प्रभावित न हो। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की विजिलेंस कार्रवाई में पारदर्शिता होनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जांच के नाम पर अवैध वसूली की जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, लोगों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी भी सामग्री को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले की आधिकारिक जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि कथित ऑडियो की जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारियों तथा शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जाएं। इसके अलावा, यदि ऑनलाइन भुगतान से जुड़े कोई डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, तो उनकी भी जांच की जाए।
विभागीय जांच से साफ हो सकती है स्थिति
इस पूरे प्रकरण में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि वायरल ऑडियो की वास्तविकता क्या है और किसान द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसके लिए विभागीय जांच के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों की जांच भी आवश्यक होगी।
किसी भी कथित रिश्वत या अवैध वसूली के मामले में केवल ऑडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। बातचीत का पूरा संदर्भ, आवाज की पहचान, डिजिटल लेनदेन और संबंधित लोगों के बयान जांच का हिस्सा होने चाहिए।
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
निष्पक्ष जांच का इंतजार
श्रावस्ती में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम पर लगे अवैध वसूली के आरोप और कथित ऑडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। किसान ने एफआईआर न करने के बदले 25 हजार रुपये मांगने और 7 हजार रुपये ऑनलाइन लेने का आरोप लगाया है।
फिलहाल, वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अब सभी की नजर विभागीय कार्रवाई और संभावित जांच पर है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो वास्तविक है या नहीं और किसान द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
बहरहाल, लोगों की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, जांच के दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए, ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके।

