कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की वायरल फोटो से बढ़ा विवाद, टेबल पर नोटों की रखी थी गड्डियां
रिपोर्ट – बलराम चतुर्वेदी
कानपुर देहात: राजकीय मेडिकल कॉलेज, कानपुर देहात के प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह की कथित वायरल तस्वीरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में प्राचार्य के कार्यालय की टेबल पर 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है।
हालांकि, प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि वायरल तस्वीरों के जरिए उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण कुछ लोग उनसे नाराज हैं।
मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की गई है। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल तस्वीरें वास्तविक परिस्थितियों में कब और कैसे ली गईं तथा सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक फेसबुक पोस्ट के बाद हुई। सौरभ सेंगर नामक युवक द्वारा की गई पोस्ट में कथित तौर पर दो तस्वीरें साझा की गईं। पोस्ट के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए।
तस्वीरों में डॉ. हरप्रीत सिंह अपने कार्यालय में बैठे दिखाई दे रहे हैं। वहीं, उनकी टेबल पर 500 रुपये के नोटों की गड्डियां रखी नजर आ रही हैं। तस्वीरें वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है कि तस्वीरें कब की हैं, किस परिस्थिति में ली गई थीं और क्या तस्वीरों में दिखाई दे रही रकम का संबंध किसी अनियमितता से है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले वायरल तस्वीरों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया साजिश
वायरल तस्वीरों को लेकर प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्राचार्य का दावा है कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कई बार सख्त कार्रवाई की है। इसी क्रम में आउटसोर्स कर्मचारी दिनेश यादव समेत कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और उन्हें पद से हटाया गया था।
डॉ. हरप्रीत सिंह का आरोप है कि कार्रवाई से नाराज कुछ लोग अब उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी अधिकारी या कर्मचारी की टेबल पर जबरन रुपये रखकर फोटो या वीडियो बना दे और बाद में उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दे, तो केवल तस्वीर के आधार पर भ्रष्टाचार साबित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने जिला प्रशासन से भी मामले की जांच कर वास्तविकता सामने लाने का आग्रह किया है।
महिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस ने भी रखा पक्ष
मामले में महिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ. वंदना का बयान भी सामने आया है। उन्होंने प्राचार्य पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
डॉ. वंदना के अनुसार, यदि प्रशासन की ओर से जांच की जाती है तो वह उसमें पूरा सहयोग करेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि किसी भी वायरल तस्वीर या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर तत्काल निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों की जांच आवश्यक है। इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के बाद ही सामने आएगी तस्वीरों की सच्चाई
वायरल तस्वीरों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये तस्वीरें कब और किस परिस्थिति में ली गई थीं। इसके अलावा, तस्वीरों में दिखाई दे रही रकम किसकी थी और वहां किस उद्देश्य से रखी गई थी, यह भी जांच का विषय है।
फिलहाल सोशल मीडिया पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही अभी तक जांच एजेंसी या जिला प्रशासन की ओर से ऐसी कोई अंतिम रिपोर्ट सामने आई है, जिससे आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सके।
ऐसे में प्रशासन की जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के दौरान वायरल तस्वीरों की सत्यता, तस्वीरों का समय और संदर्भ तथा सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल की जा सकती है।
मेडिकल कॉलेज में नए प्राचार्य की तैनाती
इसी बीच राजकीय मेडिकल कॉलेज में नए प्राचार्य की तैनाती भी कर दी गई है। हालांकि, नए प्राचार्य की नियुक्ति और वायरल तस्वीरों से जुड़े विवाद के बीच सीधे संबंध को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में कोई अनियमितता सामने आती है या वायरल तस्वीरों के जरिए किसी व्यक्ति की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को लेकर सावधानी जरूरी
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों और पोस्ट की सत्यता को लेकर सवाल खड़े करता है। किसी भी तस्वीर या पोस्ट के वायरल होने के बाद उस पर तुरंत विश्वास करने के बजाय उसके स्रोत और संदर्भ की पुष्टि करना आवश्यक है।
विशेष रूप से भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों के मामलों में जांच और आधिकारिक पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में तथ्यों के सामने आने तक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
फिलहाल कानपुर देहात के राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की कथित वायरल तस्वीरों को लेकर जिला प्रशासन की जांच जारी है। प्राचार्य ने आरोपों को साजिश बताया है, जबकि सोशल मीडिया पोस्ट में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल तस्वीरों की वास्तविकता क्या है और पूरे विवाद के पीछे की सच्चाई क्या है।
फिलहाल वायरल तस्वीरों और सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

