मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में आज होगा फैसला, 126 पेशियां और 22 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद कोर्ट के फैसले का सबको इंतजार – तुरंत पढ़ें

4d65a26c-c46f-44b9-8e76-7524af3ec3f3

रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे आम तौर पर ‘नीला ड्रम कांड’ के नाम से जाना जाता है, में आज यानी 30 सितंबर 2026 को जिला अदालत का फैसला आ सकता है। करीब 13 महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस मामले में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अब सभी की नजर मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत पर है।

मामले में सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। दोनों इस समय जेल में हैं और फैसले के दिन उन्हें अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है। अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में दोष सिद्ध होता है या नहीं। इसके बाद, यदि दोषसिद्धि होती है, तो सजा के बिंदु पर सुनवाई की जाएगी।

126 पेशियों के बाद फैसले की घड़ी

सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई मेरठ जिला अदालत में लंबे समय तक चली। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने पक्ष में दलीलें पेश कीं। 17 सितंबर 2026 को मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख निर्धारित की थी।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें मृतक के परिजनों के अलावा पुलिसकर्मी, चिकित्सक, दुकानदार और अन्य लोग शामिल रहे। अभियोजन पक्ष ने इन गवाहियों तथा जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।

भाई ने अदालत में दर्ज कराई कई बार गवाही

मामले में सौरभ के भाई बबलू राजपूत की गवाही भी महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अदालत में कई बार बयान दर्ज कराया और सौरभ की मौत की जानकारी मिलने के बाद घर पहुंचने से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में अदालत को बताया।

बबलू राजपूत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि या निर्दोषता का अंतिम निर्णय अदालत के फैसले से ही तय होगा।

सौरभ की मां ने भी अदालत में रखी अपनी बात

सौरभ की मां रेणू राजपूत ने भी मुकदमे के दौरान गवाही दी। उन्होंने सौरभ और मुस्कान के विवाह तथा दोनों के वैवाहिक जीवन से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में अदालत को जानकारी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुस्कान का साहिल से संपर्क बना हुआ था।

अभियोजन पक्ष ने इन बयानों को मामले की परिस्थितियों से जोड़ते हुए अदालत के सामने रखा। वहीं, बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क और कानूनी दलीलें प्रस्तुत कीं। रिपोर्टों के अनुसार, बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने समेत कई कानूनी बिंदुओं पर अदालत के सामने अपनी बात रखी।

पुलिस और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर भी हुई गवाही

मामले की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान भी अदालत में दर्ज हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ब्रह्मपुरी स्थित घर से नीले रंग के ड्रम में शव बरामद किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और विभिन्न साक्ष्यों को मुकदमे का हिस्सा बनाया।

जांच के दौरान बरामद वस्तुओं और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों के संबंध में भी गवाहियां हुईं। फॉरेंसिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों को अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में अदालत के सामने रखा। इन सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन अदालत को करना है।

सामग्री खरीद से जुड़े गवाह भी रहे अहम

मुकदमे की सुनवाई के दौरान बिल्डिंग मैटेरियल से जुड़े एक कारोबारी की गवाही का भी उल्लेख सामने आया। अभियोजन पक्ष ने सामग्री की खरीद से संबंधित जानकारी को मामले की घटनाक्रम से जोड़कर पेश किया।

इसी तरह, शव बरामदगी और ड्रम को खोलने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। इन गवाहियों के माध्यम से अभियोजन पक्ष ने घटनास्थल और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों की कड़ी अदालत के सामने रखने की कोशिश की।

हालांकि, इन सभी साक्ष्यों की कानूनी अहमियत और आरोपों को साबित करने में उनकी भूमिका का अंतिम मूल्यांकन अदालत ही करेगी।

पुलिस जांच में हत्या के बाद यात्रा का भी जिक्र

मामले की जांच के दौरान आरोपियों की कथित यात्रा से जुड़े पहलू भी सामने आए। अभियोजन पक्ष ने इस संबंध में होटल और कैब से जुड़े गवाहों के बयान अदालत में पेश किए।

रिपोर्टों के अनुसार, शिमला के एक होटल के प्रबंधक ने भी अदालत में गवाही दी। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की यात्रा से जुड़े दस्तावेजों और गवाहियों को मामले के घटनाक्रम से जोड़कर प्रस्तुत किया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने भी इन साक्ष्यों और अभियोजन की कहानी पर अपनी दलीलें रखीं।

अभियोजन ने मांगी अधिकतम सजा

मामले में सरकारी वकील की ओर से आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि उसने अदालत में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए हैं। वहीं, सजा का निर्धारण अदालत द्वारा दोषसिद्धि और मामले की कानूनी परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अभियोजन की ओर से मांगी गई सजा और अदालत द्वारा दी जाने वाली सजा अलग-अलग बातें हैं। अदालत पहले आरोपों पर दोषसिद्धि का निर्णय करेगी और उसके बाद, यदि आवश्यक हुआ, तो सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

आज पहले दोषसिद्धि पर होगा निर्णय

30 सितंबर को होने वाली कार्यवाही में सबसे पहले अदालत यह तय करेगी कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं। इसके बाद ही सजा को लेकर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।

इसलिए फिलहाल अदालत के निर्णय से पहले किसी भी आरोपी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा। अदालत के फैसले के बाद ही मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

फैसले पर टिकी निगाहें

लंबी सुनवाई, 126 पेशियों और 22 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद अब सौरभ राजपूत हत्याकांड अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। मामले ने शुरुआत से ही व्यापक सार्वजनिक और मीडिया ध्यान आकर्षित किया है।

अब 30 सितंबर को मेरठ जिला अदालत के निर्णय के बाद यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों को अदालत किस तरह देखती है। इसके साथ ही यदि दोषसिद्धि होती है तो सजा के बिंदु पर अदालत की आगे की कार्यवाही भी महत्वपूर्ण होगी।

You may have missed