GSVM कानपुर में GENOVIA सम्मेलन का हुआ सफल आयोजन, प्रजनन विज्ञान और ART पर विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा “GENOVIA – Beginning of the Journey into Reproductive Science” सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन प्रजनन विज्ञान (Reproductive Science) और Artificial Reproductive Techniques (ART) के क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों को चिकित्सा विद्यार्थियों और विशेषज्ञों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बांझपन (Infertility) के कारणों, जांच, उपचार और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, रेजिडेंट डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।
यह सम्मेलन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थिएटर-1 में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स, फैकल्टी सदस्यों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (ISAR) के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य भविष्य के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों को प्रजनन चिकित्सा के आधुनिक आयामों से परिचित कराना था, ताकि वे बेहतर रोगी सेवाएं प्रदान कर सकें।
रेजिडेंट डॉक्टरों को आधुनिक प्रशिक्षण देने की पहल
सम्मेलन का आयोजन आईएसएआर की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीता तंदुलवाडकर की दूरदर्शी पहल के अंतर्गत किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभर के मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स को इंफर्टिलिटी (बांझपन) और Assisted Reproductive Technology (ART) के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे में केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान भी आवश्यक है। यही कारण है कि GENOVIA जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा चिकित्सकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं।
बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही है ART की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में लगभग 10 से 15 प्रतिशत दंपत्ति बांझपन की समस्या से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली, तनाव, असंतुलित खान-पान, पर्यावरणीय प्रभाव तथा महिलाओं में बढ़ती गर्भधारण आयु जैसी परिस्थितियों के कारण प्रजनन संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में Artificial Reproductive Techniques (ART) की भूमिका पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत रेजिडेंट डॉक्टरों को इस क्षेत्र का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देना समय की आवश्यकता है। इससे वे भविष्य में मरीजों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के अनुभव
सम्मेलन में देश के अनुभवी विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए। विशेषज्ञ वक्ता डॉ. युथिका बाजपेयी और डॉ. वरदा अरोड़ा ने इंफर्टिलिटी की पहचान, जांच प्रक्रिया तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आज चिकित्सा विज्ञान में कई ऐसी तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से संतान प्राप्ति में कठिनाई झेल रहे दंपत्तियों को नई उम्मीद मिल रही है। व्याख्यानों के दौरान निम्न विषयों पर विशेष चर्चा की गई—
- इंफर्टिलिटी की वैज्ञानिक जांच
- IUI (Intrauterine Insemination)
- IVF (In Vitro Fertilization)
- ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection)
- एम्ब्रायोलॉजी
- रोगी काउंसलिंग
- आधुनिक Assisted Reproductive Technology (ART)
विशेषज्ञों ने उपचार के दौरान नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रोगी की मानसिक स्थिति को समझने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया।
युवा चिकित्सकों के लिए उपयोगी साबित होगा सम्मेलन
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज स्तर पर आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा डॉक्टरों को प्रारंभिक स्तर पर आधुनिक तकनीकों का ज्ञान मिल जाए, तो वे अपने पेशेवर जीवन में अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए इस प्रकार के शैक्षणिक सम्मेलन भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
100 से अधिक रेजिडेंट्स और 30 फैकल्टी सदस्यों ने की सहभागिता
आयोजन सचिव डॉ. शैलि अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन में 100 से अधिक स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों तथा लगभग 30 फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित किया और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रतिभागियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया। यही कारण रहा कि पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
इंटरैक्टिव क्विज़ प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों के ज्ञान का मूल्यांकन करने के लिए इंटरैक्टिव क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रजनन विज्ञान से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर डॉ. युक्ति, डॉ. मानवी और डॉ. श्री लक्ष्मी को विजेता घोषित किया गया। उन्हें सम्मानित करते हुए आयोजकों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
चिकित्सा शिक्षा और रोगी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण पहल
चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के साथ डॉक्टरों का निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक हो गया है। GENOVIA सम्मेलन जैसे शैक्षणिक कार्यक्रम न केवल चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाते हैं, बल्कि भविष्य में बेहतर रोगी सेवाओं की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इसके अतिरिक्त, ऐसे आयोजनों से युवा चिकित्सकों को अनुभवी विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलता है। परिणामस्वरूप वे आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग करते हुए मरीजों के उपचार में अधिक दक्षता प्राप्त कर सकते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में आयोजित GENOVIA सम्मेलन ने प्रजनन विज्ञान और Assisted Reproductive Technology (ART) के क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने का कार्य किया है। विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए अनुभव, आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण ने इस सम्मेलन को अत्यंत उपयोगी बना दिया।
भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सा विद्यार्थियों, युवा चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

