यूपी में आरटीओ की 52 सेवाएं होंगी ऑनलाइन, अब जानिए कैसे ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण होगा अप्रूव्ड
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार परिवहन विभाग (आरटीओ) की सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। विभाग की योजना है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से जुड़ी 52 फेसलेस सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूव्ड मोड में लागू किया जाए।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आरटीओ कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ कम करना, सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना तथा दलाली और फर्जीवाड़े जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके लिए परिवहन विभाग ने नई कार्ययोजना तैयार की है, जिस पर 20 जुलाई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ रहा परिवहन विभाग
डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग अपनी सेवाओं को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। अब विभाग चाहता है कि अधिकांश सेवाएं बिना कार्यालय आए ऑनलाइन उपलब्ध हों।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिक कई सेवाओं के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाए बिना ही आवेदन कर सकेंगे। यदि सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी सही पाई जाती है, तो कई सेवाएं ऑटो-अप्रूव्ड सिस्टम के माध्यम से स्वतः स्वीकृत हो सकेंगी।
52 फेसलेस सेवाएं होंगी ऑनलाइन
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग की 52 फेसलेस सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जाएगा।
इन सेवाओं में मुख्य रूप से—
- ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रक्रियाएं
- वाहन पंजीकरण
- वाहन स्वामित्व (ओनरशिप) हस्तांतरण
- विभिन्न प्रमाणपत्रों का ऑनलाइन सत्यापन
- वाहन संबंधी अन्य प्रशासनिक सेवाएं
शामिल किए जाने की योजना है। इससे नागरिकों को समय की बचत होगी और प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक सरल हो सकेंगी।
ऑटो-अप्रूव्ड सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ऑटो-अप्रूव्ड मोड होगी। इस प्रणाली में यदि आवेदक द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज और विवरण निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो संबंधित आवेदन बिना अतिरिक्त मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित रूप से स्वीकृत किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी।
सरकारी डेटाबेस से होगा सत्यापन
परिवहन विभाग ने नई प्रणाली में सुरक्षा और प्रमाणिकता को भी प्राथमिकता दी है। प्रस्ताव के अनुसार, आवेदकों का सत्यापन विभिन्न सरकारी डेटाबेस के माध्यम से किया जाएगा। इससे गलत दस्तावेज या फर्जी पहचान के आधार पर आवेदन करने की संभावना कम होगी।
इसके अलावा वन टाइम पासवर्ड (OTP) केवल आवेदक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही भेजा जाएगा। इससे डिजिटल सुरक्षा और मजबूत होगी तथा अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा आवेदन प्रक्रिया में हस्तक्षेप की संभावना घटेगी।
दलाली और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
परिवहन विभाग का मानना है कि ऑनलाइन और फेसलेस व्यवस्था लागू होने से दलालों की भूमिका स्वतः कम हो जाएगी।
अब तक कई मामलों में आवेदकों को विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। इस कारण कुछ लोग बिचौलियों की मदद लेने को मजबूर हो जाते थे।
नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि नागरिक सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकें और उन्हें किसी मध्यस्थ की आवश्यकता न पड़े।
वाहन पंजीकरण और ओनरशिप ट्रांसफर होगा आसान
नई प्रणाली लागू होने के बाद निजी तथा नए वाणिज्यिक (कमर्शियल) वाहनों का पंजीकरण भी काफी हद तक स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकेगा।
इसी प्रकार वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण (Ownership Transfer) की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूव्ड मोड में लाने की तैयारी है। इससे वाहन खरीदने और बेचने वाले लोगों को दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने में अधिक सुविधा मिलेगी।
20 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण बैठक
नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए परिवहन विभाग ने 20 जुलाई को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि 52 फेसलेस सेवाओं को किस चरण में लागू किया जाए और उनकी निगरानी किस प्रकार की जाएगी। बैठक के बाद विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
नागरिकों को मिलेंगे कई लाभ
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो आम नागरिकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- आरटीओ कार्यालयों में कम चक्कर लगाने होंगे।
- आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।
- दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन आसान होगा।
- सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित हो सकेगी।
- भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम होने की संभावना रहेगी।
- डिजिटल रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा।
डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
परिवहन विभाग की यह पहल राज्य में ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्रशासन को और मजबूत करेगी। जब सरकारी सेवाएं तकनीक आधारित होती हैं, तो नागरिकों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिलती हैं। साथ ही विभाग के लिए रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी भी अधिक प्रभावी हो जाती है।
आधिकारिक आदेश का इंतजार
हालांकि परिवहन विभाग ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन नई व्यवस्था को लागू करने से पहले संबंधित प्रशासनिक आदेश और तकनीकी दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
इसलिए नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना और निर्देशों पर ही भरोसा करें।
उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की 52 फेसलेस सेवाओं को ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूव्ड बनाने की तैयारी राज्य की डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और ओनरशिप ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाएं पहले से कहीं अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो जाएंगी।
साथ ही दलाली, फर्जीवाड़े और अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण मिलने की उम्मीद है। अब सभी की नजर 20 जुलाई को होने वाली बैठक और उसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक निर्णयों पर टिकी हुई है।

