यूपी में आज से ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त, नई क्षेत्र पंचायतों के गठन तक मौजूदा प्रमुख बन सकते हैं प्रशासक

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Digital UP News Desk 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पंचायती व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के सभी ब्लॉक प्रमुखों का पांच वर्षीय कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो गया है। इसके साथ ही राज्य की सभी क्षेत्र पंचायतों (क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक प्रमुख) का निर्वाचित कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। अब नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव तक अंतरिम व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस अवधि के दौरान प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को ही प्रशासक नियुक्त कर सकती है। इस संबंध में शासन स्तर पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी होने की संभावना है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में अंतिम सरकारी आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ था। इसलिए नियुक्ति संबंधी जानकारी संभावित प्रशासनिक निर्णय पर आधारित है।

पांच वर्ष का कार्यकाल हुआ पूरा

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनावों के बाद प्रदेश भर में ब्लॉक प्रमुखों का निर्वाचन हुआ था। पंचायती राज व्यवस्था के तहत ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल पांच वर्ष का निर्धारित होता है।

निर्धारित अवधि पूरी होने के साथ अब सभी क्षेत्र पंचायतों का निर्वाचित कार्यकाल समाप्त हो गया है। ऐसे में नई पंचायतों के गठन और चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना सरकार के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि शासन इस अंतरिम अवधि में वर्तमान ब्लॉक प्रमुखों को ही प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो नई निर्वाचित क्षेत्र पंचायतों के गठन तक विकास योजनाओं का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा।

प्रशासक नियुक्त करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय स्तर पर चल रही योजनाएं और विकास कार्य प्रभावित न हों तथा प्रशासनिक निर्णय समय पर लिए जा सकें।

विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा असर

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अंतरिम व्यवस्था लागू होने के बावजूद क्षेत्र पंचायतों के नियमित कार्यों पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यदि प्रशासक नियुक्त किए जाते हैं, तो वे विकास योजनाओं की निगरानी, आवश्यक प्रशासनिक निर्णय, वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य सरकारी कार्यों को नियमानुसार संचालित कर सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

नई क्षेत्र पंचायतों के गठन की प्रक्रिया

ब्लॉक प्रमुखों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगला चरण नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और उसके बाद ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव का होगा।

इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग तथा पंचायती राज विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी। हालांकि अभी तक चुनाव की तिथि या कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

पंचायती राज व्यवस्था में ब्लॉक प्रमुख की भूमिका

ग्रामीण विकास की दृष्टि से ब्लॉक प्रमुख का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्लॉक प्रमुख क्षेत्र पंचायत के माध्यम से विभिन्न विकास योजनाओं की निगरानी करते हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और क्षेत्र पंचायत की बैठकों के माध्यम से स्थानीय विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।

प्रशासक बनने पर क्या होगा बदलाव?

यदि सरकार मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करती है, तो उनकी भूमिका निर्वाचित प्रतिनिधि के बजाय प्रशासनिक दायित्व निभाने की होगी। ऐसी स्थिति में वे शासन द्वारा निर्धारित नियमों और अधिकारों के अनुसार कार्य करेंगे। हालांकि अंतिम अधिकार और कार्यक्षेत्र सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किए जाएंगे।

ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता रहेगी

अंतरिम व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं की निरंतरता बनाए रखना है। यदि इस दौरान कोई प्रशासक नियुक्त नहीं किया जाता, तो कई प्रशासनिक और वित्तीय कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

इसी कारण अधिकांश राज्यों में स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने पर नई व्यवस्था लागू होने तक अंतरिम प्रशासनिक प्रबंध किए जाते हैं।

आधिकारिक आदेश का इंतजार

सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और संबंधित विभागों से आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं।

अब सभी की निगाहें सरकार की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक आदेश पर हैं। आदेश जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासक नियुक्ति की प्रक्रिया किस प्रकार लागू होगी और अंतरिम अवधि में ब्लॉक प्रमुखों के अधिकार एवं दायित्व क्या होंगे।

जानिए क्या कहता है प्रशासन 

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकायों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि विकास योजनाओं और वित्तीय स्वीकृतियों में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर पड़ सकता है।

इसीलिए अंतरिम व्यवस्था के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को नियमित रूप से जारी रखना आवश्यक माना जाता है।

उत्तर प्रदेश में सभी ब्लॉक प्रमुखों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के साथ पंचायती राज व्यवस्था नए चरण में प्रवेश कर रही है। सरकार नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव तक मौजूदा प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी में है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो ग्रामीण विकास कार्य, वित्तीय स्वीकृति और प्रशासनिक गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकेंगी। यही कारण है कि प्रदेश के लाखों ग्रामीण नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों की नजर अब शासन के अगले आदेश पर टिकी हुई है।

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