मेरठ में छात्र नेता शान मोहम्मद के जिला बदर आदेश पर विवाद, समर्थकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट – मनीष पराशर
मेरठ। मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) से जुड़े छात्र नेता शान मोहम्मद को तीन महीने के लिए जिला बदर किए जाने के प्रशासनिक आदेश को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन की ओर से 26 सितंबर 2026 को जारी आदेश के बाद छात्र संगठनों और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। बुधवार को बड़ी संख्या में समर्थक और छात्र नेता मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जिला बदर के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की।
समर्थकों का कहना है कि शान मोहम्मद लंबे समय से विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तीन महीने के लिए मेरठ जिले की सीमा से बाहर रहने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
शान मोहम्मद के समर्थकों और छात्र नेताओं ने बुधवार को मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी। ज्ञापन के माध्यम से जिला बदर के आदेश को वापस लेने और पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की मांग की गई।
समर्थकों के अनुसार, शान मोहम्मद कानून (LL.B.) के छात्र हैं और पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय में छात्र हित से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों का संबंध छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों से है। इसी आधार पर समर्थकों ने प्रशासन से कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
हालांकि, जिला बदर की कार्रवाई प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट के तहत की गई है। ऐसे में आदेश के पीछे प्रशासनिक स्तर पर दर्ज मामलों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर को अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने तीन महीने के लिए शान मोहम्मद को मेरठ जिले से निष्कासित करने का आदेश जारी किया।
भाकियू नेता ने दिया दो दिन का अल्टीमेटम
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान यूनियन से जुड़े नेता मोहसिन ने प्रशासन से आदेश की दोबारा समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि शान मोहम्मद के खिलाफ दर्ज मुकदमे छात्र आंदोलनों और छात्र अधिकारों से जुड़े हैं।
मोहसिन के मुताबिक, यदि दो दिनों के भीतर जिला बदर के आदेश पर निष्पक्ष तरीके से विचार कर कार्रवाई वापस नहीं ली गई, तो भारतीय किसान यूनियन की ओर से बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर 100 से 200 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट और जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
हालांकि, यह चेतावनी फिलहाल समर्थकों के बयान के रूप में सामने आई है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में आगे की कार्रवाई या प्रतिक्रिया का विवरण सामने आना बाकी है।
छात्र नेताओं ने भूख हड़ताल की चेतावनी दी
छात्र नेता हैविन खान ने भी शान मोहम्मद के समर्थन में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शान मोहम्मद किठौर क्षेत्र के निवासी हैं और करीब 10 वर्षों से विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।
हैविन खान का दावा है कि किठौर थाने में दर्ज तीन मुकदमों का संबंध छात्र हित और विरोध-प्रदर्शन से है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला बदर की कार्रवाई से शान मोहम्मद के शैक्षणिक और राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला बदर का आदेश वापस नहीं लिया गया तो छात्र संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उनके अनुसार, छात्र मेरठ कमिश्नरी पार्क में धरना देने के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए जा रहे सवाल
इस पूरे मामले में एक ओर प्रशासन की ओर से गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर का आदेश जारी किया गया है, जबकि दूसरी ओर छात्र संगठनों और समर्थकों का कहना है कि कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। समर्थक यह भी कह रहे हैं कि शान मोहम्मद के खिलाफ किसी गंभीर संगठित अपराध में दोषसिद्धि का रिकॉर्ड नहीं है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई और उससे संबंधित कानूनी आधार का अंतिम आकलन संबंधित प्रशासनिक आदेश, पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध न्यायिक दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है। इसलिए मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंता
छात्र नेताओं ने प्रशासन से विशेष रूप से शान मोहम्मद की पढ़ाई को ध्यान में रखने की अपील की है। उनका कहना है कि वह LL.B. के छात्र हैं और जिला बदर की कार्रवाई से उनकी शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
समर्थकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की दोबारा समीक्षा कर तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से जिला बदर का आदेश जल्द निरस्त करने की मांग की है।
फिलहाल मामला प्रशासनिक आदेश और छात्र संगठनों की आपत्तियों के बीच बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से आदेश की समीक्षा या कोई अन्य निर्णय लिया जाता है या नहीं, इस पर सभी की नजर है। वहीं, छात्र संगठनों और भारतीय किसान यूनियन की ओर से दी गई आंदोलन की चेतावनी के कारण मामले के आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

