मेरठ में पत्नी ने पति को सांप से डसवा कर उतारा मौत के घाट… आधी रात बिस्तर पर छोड़ा था सांप, शादीशुदा वैन चालक था थे प्रेमी
Digital UP News Desk
मेरठः यूपी के मेरठ से एक खौफनाक घटना सामने आई है। मेरठ में एक महिला ने स्कूल संचालक पति को सांप से डसवाकर मौत के घाट उतार दिया। पत्नी ने शादीशुदा वैन चालक प्रेमी के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया है। दामिनी ने पति अतुल को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर दी थीं। दूध पीने के बाद अतुल गहरी नींद में सो गया। इसके बाद दामिनी ने आधी रात को प्रेमी और सपेरे को बुलाकर बिस्तर पर करैत नस्ल के सांप को छोड़ दिया। यह देश के सबसे अधिक जहरीले सांपों की श्रेणी में आते हैं। जबकि अतुल और दामिनी ने सात साल पहले लव मैरिज की थी।
दामिनी ने वारदात को अंजाम देने के बाद प्रेमी तुषर पायला को भगा दिया था। इसके बाद वह खुद दूसरे कमरे में सोने चली गई थी। दामिनी शुक्रवार सुबह छह बजे कमरे में पहुंची और चीखने चिल्लाने लगी। परिजनों ने भी मान लिया किया अतुल को सांप ने काटा है। अतुल के पैर में सांप के काटने के निशान भी थे।
पुलिस के अनुसार, मृतक अतुल एक स्कूल संचालक थे। उनकी मौत के बाद शुरुआती तौर पर परिवार और स्थानीय लोगों ने इसे सर्पदंश की घटना माना क्योंकि उनके पैर पर काटने जैसे निशान पाए गए थे। घटना के बाद परिजनों ने भी यही समझा कि उनकी मृत्यु जहरीले सांप के काटने से हुई है।
हालांकि, मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल, मेडिकल रिपोर्ट, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके बाद जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने इसे संदिग्ध मानते हुए विस्तृत विवेचना शुरू की।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान पत्नी और उसके कथित प्रेमी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ और एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर यह आशंका व्यक्त की गई कि घटना पूर्व नियोजित हो सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि घटना से पहले और बाद में संबंधित लोगों की गतिविधियां क्या थीं, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य तकनीकी जानकारियां क्या संकेत देती हैं। फिलहाल इन सभी तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
कथित प्रेम संबंध की भी जांच
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के बीच कथित संबंधों की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्तिगत संबंध को अपराध का आधार नहीं माना जा सकता। केवल वे तथ्य और साक्ष्य ही महत्वपूर्ण होंगे जो जांच और न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित किए जा सकें।
इसीलिए जांच एजेंसी सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से परख रही है ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें।
फोरेंसिक और मेडिकल साक्ष्यों की भूमिका
ऐसे मामलों में मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मृत्यु के वास्तविक कारण का निर्धारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) जांच और अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर किया जाता है।
पुलिस ने भी संकेत दिया है कि जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और यदि आगे नए तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर भी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में अदालत में आरोप सिद्ध होने तक सभी आरोपित कानून की नजर में आरोपी हैं, दोषी नहीं।
समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक विवादों और वैवाहिक मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता की भी याद दिलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार में गंभीर मतभेद या तनाव उत्पन्न हो, तो कानूनी सहायता, पारिवारिक परामर्श और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना अधिक उचित होता है।
इसके अतिरिक्त, किसी भी संदिग्ध मृत्यु की स्थिति में घटनास्थल को सुरक्षित रखना और तुरंत पुलिस को सूचना देना जांच को निष्पक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अफवाहों से बचना जरूरी
घटना के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के दावे और चर्चाएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और न्यायालय में साक्ष्यों का परीक्षण नहीं हो जाता, तब तक किसी भी अपुष्ट जानकारी को सत्य मानना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि नागरिक केवल पुलिस और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और भ्रामक सूचनाओं को साझा करने से बचें।

