कानपुर के ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन में आयोजित हुआ प्रतिभा अलंकरण समारोह, छात्रों को किया सम्मानित

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सशक्त साधन भी है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए कानपुर के ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, सतबरी रोड में प्रतिभा अलंकरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की आंतरिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) प्रवीण कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें अनुशासन, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

समारोह के दौरान विद्यालय परिसर उत्साह और प्रेरणा के माहौल से सराबोर नजर आया। सम्मान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरों पर खुशी स्पष्ट दिखाई दी, वहीं अभिभावकों और शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया।

विद्यालय प्रबंधन ने इस आयोजन को प्रतिभाओं के सम्मान के साथ-साथ छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

समय प्रबंधन सफलता की सबसे बड़ी कुंजी: डीआईओएस प्रवीण कुमार तिवारी

मुख्य अतिथि प्रवीण कुमार तिवारी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि किसी भी परीक्षा या प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करने के लिए समय का सही प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो सफलता मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में कठिनाइयों का आना स्वाभाविक है। इन चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। यदि कभी असफलता मिले तो निराश होने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण कर उन्हें सुधारने का प्रयास करना चाहिए। यही निरंतर प्रयास भविष्य में बड़ी सफलता का आधार बनता है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण रखना चाहिए। क्योंकि जब लक्ष्य स्पष्ट होता है, तब उसे प्राप्त करने की दिशा में किया गया प्रत्येक प्रयास सार्थक सिद्ध होता है।

शैक्षिक भ्रमण से बढ़ती है व्यावहारिक समझ

अपने संबोधन में डीआईओएस ने विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि अवसर मिले तो छात्रों को आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, वैज्ञानिक संस्थानों या समाचार पत्रों के प्रिंटिंग प्रेस जैसे प्रतिष्ठानों का शैक्षिक भ्रमण अवश्य करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ऐसे संस्थानों में जाकर विद्यार्थी न केवल आधुनिक तकनीक और कार्य प्रणाली को समझते हैं, बल्कि बड़े संस्थानों के प्रबंधन, अनुशासन और कार्य संस्कृति से भी महत्वपूर्ण सीख प्राप्त करते हैं। इससे छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान विकसित होता है, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होता है।

किशोरावस्था में सतर्क रहने की दी सलाह

अपने संबोधन के दौरान प्रवीण कुमार तिवारी ने किशोरावस्था को जीवन का सबसे संवेदनशील दौर बताते हुए विद्यार्थियों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि इस आयु में अनेक प्रकार के आकर्षण और भटकाव सामने आते हैं। इसलिए छात्रों को सही और गलत के बीच विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अत्यधिक उपयोग है। कई बार बच्चे मनोरंजन की तलाश में इनका अनियंत्रित उपयोग करने लगते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और व्यक्तित्व विकास प्रभावित होता है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का सकारात्मक उपयोग किया जाए तो यह सीखने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग केवल आवश्यक और रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहिए।

जीवन को सार्थक बनाने का दिया संदेश

मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन अत्यंत अनमोल है। इसलिए प्रत्येक छात्र को अपने समय, ऊर्जा और प्रतिभा का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी गौरव बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से हमेशा सीखने की भावना बनाए रखने, अच्छे संस्कार अपनाने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहने का आह्वान किया।

विद्यालय प्रबंधन ने किया अतिथियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान ओंकारेश्वर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के वरिष्ठ संरक्षक डॉ. अंगद सिंह ने मुख्य अतिथि प्रवीण कुमार तिवारी को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया। वहीं संस्थान की प्रबंध निदेशक डॉ. पूजा अवस्थी ने मुख्य अतिथि सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराया।

इसके बाद विद्यालय की कार्यवाहक प्रधानाचार्य आकांक्षा सिंह ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया। पूरे समारोह का संचालन  हंसिका सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रबंधक डॉ. श्याम दत्त जोशी ने मुख्य अतिथि एवं सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रम विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं तथा उन्हें भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं।

विद्यार्थियों के सम्मान से बढ़ा उत्साह

प्रतिभा अलंकरण समारोह के दौरान विद्यालय की आंतरिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने इसे अपने लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। वहीं शिक्षकों का कहना था कि इस प्रकार के सम्मान समारोह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और अन्य छात्रों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं।

इसके अलावा समारोह में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों की प्रतिभा को सम्मान देने की पहल की सराहना की। उनका कहना था कि पुरस्कार केवल उपलब्धि का प्रतीक नहीं होते, बल्कि आगे और बेहतर करने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

अनेक गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश सिंह, डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, हेमराज सिंह गौर, डॉ. एस.के. परिहार, शिवकुमार सिंह, डॉ. ममता तिवारी, बी.एल. पांडेय, रामप्रकाश मिश्रा, सत्येंद्र मिश्रा, बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विद्यालय परिवार की शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करने वाले प्रेरक संदेश के साथ हुआ।

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