धाता में प्रधानाध्यापकों की कार्यशाला, कक्षा में शैक्षणिक बदलाव लागू करने पर जोर

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रिपोर्ट – अशोक सिंह

धाता। ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) धाता के प्रांगण में मंगलवार को समस्त प्रधानाध्यापकों एवं इंचार्ज प्रधानाध्यापकों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाने पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यशाला का आयोजन दो बैचों में किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना रहा। इस दौरान शिक्षकों को बच्चों की वर्तमान सीखने की स्थिति के आधार पर शिक्षण योजना तैयार करने, कक्षा में आवश्यक बदलाव करने और अधिगम अंतराल को दूर करने की रणनीतियों से अवगत कराया गया। साथ ही, प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेकर सीखी गई रणनीतियों को विद्यालयों में लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।

बच्चों के सीखने के स्तर के आधार पर बनेगी शिक्षण योजना

कार्यशाला के प्रथम सत्र में सारिका एवं एआरपी निरपत सिंह ने बच्चों की वर्तमान सीखने की स्थिति यानी बेसलाइन के आधार पर शिक्षण योजना तैयार करने के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता और वर्तमान अधिगम स्तर अलग हो सकता है। इसलिए सभी बच्चों को एक ही तरीके से पढ़ाने के बजाय उनके स्तर के अनुसार शिक्षण रणनीति तैयार करना अधिक प्रभावी हो सकता है।

इस दौरान शिक्षकों को बच्चों के अधिगम स्तर के आधार पर समूह बनाने और समूहवार शिक्षण गतिविधियां संचालित करने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों की प्रगति का नियमित आकलन करने तथा आवश्यकता के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला में बताया गया कि बेसलाइन आकलन केवल बच्चों के वर्तमान स्तर को समझने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके आधार पर आगे की शिक्षण योजना तैयार करने में भी मदद मिलती है। इसलिए शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गतिविधि आधारित और स्तरानुकूल शिक्षण पर ध्यान देने की सलाह दी गई।

कक्षा में 10 बदलाव के बिंदुओं पर हुई चर्चा

दूसरे सत्र में एआरपी डॉ. सारिका केसरवानी, इरफान अहमद, आशीष शुक्ला एवं शंकर दयाल ने ‘कक्षा में 10 बदलाव के बिंदु’ टूलकिट के बारे में शिक्षकों को जानकारी दी। इस दौरान कक्षा-कक्ष में ऐसे बदलावों को अपनाने पर चर्चा हुई, जिनसे बच्चों की सहभागिता और सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

प्रशिक्षकों ने टूलकिट से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। इसके बाद प्रतिभागी प्रधानाध्यापकों एवं इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने समूहों में कार्य करते हुए अपनी प्रस्तुतियां दीं। समूह कार्य के माध्यम से शिक्षकों ने यह समझने का प्रयास किया कि कार्यशाला में बताए गए शैक्षणिक बदलावों को विद्यालय की वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार लागू किया जा सकता है।

इसके बाद प्रतिभागियों ने इन बदलावों को कक्षा-कक्ष में गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू करने का संकल्प लिया।

पठन संस्कृति विकसित करने पर जोर

कार्यशाला के अगले चरण में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के प्रतिनिधि मनोज एवं मोहर सिंह ने विद्यालयों में पठन संस्कृति के विकास पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बच्चों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करने और विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां बच्चे रुचि के साथ पढ़ने के लिए प्रेरित हों।

इस दौरान शिक्षकों के साथ पठन गतिविधियों को बढ़ावा देने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की गई। बताया गया कि बच्चों के बीच पढ़ने की आदत विकसित करने से उनके भाषा कौशल और समझने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

साथ ही, बच्चों की अलग-अलग सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में पठन गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने की आवश्यकता बताई गई।

कैच-अप शिक्षण से अधिगम अंतराल दूर करने पर मंथन

कार्यशाला में कैच-अप शिक्षण की आवश्यकता और भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि कुछ बच्चों का सीखने का स्तर अपेक्षित स्तर से पीछे हो सकता है। ऐसे बच्चों की पहचान करके उनके लिए अतिरिक्त और स्तरानुकूल शिक्षण गतिविधियां संचालित करना जरूरी है।

कैच-अप शिक्षण के माध्यम से बच्चों के अधिगम अंतराल को कम करने और उन्हें उनकी कक्षा के अपेक्षित सीखने के स्तर के करीब लाने के तरीकों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बच्चों की प्रगति पर नियमित नजर रखने और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सहयोग देने के लिए प्रेरित किया गया।

टीएलएम और नियमित आकलन को बनाया जाए शिक्षण का हिस्सा

कार्यशाला के दौरान केवल नई रणनीतियों की जानकारी देने तक ही चर्चा सीमित नहीं रही। बल्कि विद्यालयों में इन शैक्षणिक बदलावों को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।

प्रतिभागियों के साथ शिक्षण अभ्यासों, टीएलएम यानी शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग और नियमित आकलन को विद्यालयी व्यवस्था का हिस्सा बनाने को लेकर विस्तृत बातचीत हुई। शिक्षकों को बताया गया कि कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों और शिक्षण सामग्री का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, नियमित आकलन के माध्यम से बच्चों की प्रगति को समझकर शिक्षण प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। इस तरह आकलन को केवल परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय शिक्षण सुधार का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया।

ब्लॉक धाता को निपुण बनाने का लक्ष्य

कार्यशाला के समापन अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों एवं इंचार्ज प्रधानाध्यापकों से कहा कि कार्यशाला में सीखी गई रणनीतियों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

उन्होंने विशेष रूप से कक्षा में शैक्षणिक बदलाव, बच्चों के सीखने के स्तर के अनुरूप शिक्षण योजना, पठन संस्कृति, टीएलएम के उपयोग और नियमित आकलन पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब यहां सीखी गई बातें विद्यालयों की कक्षाओं में दिखाई दें और बच्चों के सीखने के स्तर में सकारात्मक बदलाव आए। इसलिए सभी प्रधानाध्यापकों से पूरे मनोयोग के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।

कार्यशाला में हुई चर्चा और गतिविधियों के माध्यम से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक रणनीतियों पर मंथन हुआ। अब इन रणनीतियों को विद्यालय स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की होगी। इसके माध्यम से ब्लॉक धाता को निपुण बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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