भारत-म्यांमार सुरक्षा सहयोग पर अहम बैठक: NSA अजीत डोभाल ने भारत विरोधी गतिविधियों पर जताई सख्त चिंता
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत और म्यांमार के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल देखने को मिली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बिम्सटेक (BIMSTEC) के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की पांचवीं बैठक के इतर म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यू टिन आंग सान से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में भारत की ओर से सीमा पार से होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि म्यांमार की धरती का उपयोग किसी भी प्रकार की भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दिया जाए। दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग को और प्रभावी बनाने तथा आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा पार अपराधों से मिलकर निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई।
BIMSTEC बैठक के दौरान हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता
बिम्सटेक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसी बैठक के अवसर पर भारत और म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई।
बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों की समीक्षा करना और भविष्य के सहयोग को नई दिशा देना था। अधिकारियों ने सीमा क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और समन्वय बनाए रखने पर विशेष बल दिया।
भारत ने जताई सीमा पार गतिविधियों पर चिंता
बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट रूप से अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामने रखा। भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार की सीमा से लगे क्षेत्रों का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।
भारत ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। अधिकारियों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से सीमा पार अपराधों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
सुरक्षा सहयोग की हुई व्यापक समीक्षा
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की। इसमें सीमा प्रबंधन, उग्रवाद से जुड़े मुद्दे, संगठित अपराध, मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर संवाद और समन्वय आवश्यक है।
भारत-म्यांमार संबंधों का रणनीतिक महत्व
भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,600 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों की सीमा म्यांमार से लगती है। इसलिए सीमा क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत द्विपक्षीय सहयोग से सीमा प्रबंधन और विकास परियोजनाओं को भी गति मिलती है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
बैठक में केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी विचार-विमर्श किया गया।
दोनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, साइबर सुरक्षा, सीमा पार अपराधों की रोकथाम और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।
इसके साथ ही BIMSTEC सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग को मजबूत बनाने पर भी बल दिया गया।
आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता
भारत लंबे समय से आतंकवाद और सीमा पार उग्रवाद के विरुद्ध सख्त नीति अपनाता रहा है। इसी क्रम में बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साझा खुफिया जानकारी, संयुक्त समन्वय और नियमित संवाद से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
BIMSTEC की भूमिका
बिम्सटेक (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है।
इस संगठन के माध्यम से सदस्य देश व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे विषयों पर मिलकर कार्य करते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक भी इसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है।
भारत की सुरक्षा नीति पर विशेष जोर
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा की अखंडता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी नीति के अनुरूप भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने पर भी जोर देता है।
अधिकारियों का मानना है कि द्विपक्षीय संवाद के माध्यम से कई सुरक्षा चुनौतियों का समाधान बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
भविष्य में सहयोग और मजबूत करने पर सहमति
बैठक के दौरान दोनों देशों ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने, नियमित संवाद बनाए रखने और साझा हितों के मुद्दों पर मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में शांति, कानून व्यवस्था और विकास को बढ़ावा देने के लिए भी सहयोग जारी रखने पर सहमति बनी।
बिम्सटेक की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यू टिन आंग सान के बीच हुई मुलाकात भारत-म्यांमार सुरक्षा सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही। बैठक में सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद-रोधी सहयोग और भारत की सुरक्षा चिंताओं सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत ने स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार की धरती का उपयोग किसी भी प्रकार की भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक भारत-म्यांमार संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

