कानपुर पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: 13 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 2 करोड़ की ठगी का खुलासा
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: साइबर अपराध के लगातार बदलते तरीकों के बीच कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक कथित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अभियान चलाकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह गिरोह लोगों को अश्लील वीडियो से जुड़े मामलों में फंसाने की धमकी देने तथा स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर डराने के माध्यम से धन उगाही करता था।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, 3 कारें तथा कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ लगभग ₹2 करोड़ की साइबर ठगी होने का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल मामले में विस्तृत जांच जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
सुनियोजित तरीके से लोगों को बनाया जाता था निशाना
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर लोगों को पहले फोन या ऑनलाइन माध्यम से संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें अश्लील वीडियो से जुड़े मामलों में फंसाने या पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाया जाता था।
पुलिस का कहना है कि भय और भ्रम की स्थिति पैदा कर पीड़ितों से धनराशि विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई माध्यमों से जमा कराई जाती थी। साइबर अपराध का यह तरीका हाल के वर्षों में कई राज्यों में सामने आया है, इसलिए पुलिस लोगों से सतर्क रहने की अपील भी कर रही है।
13 आरोपी गिरफ्तार, बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
- 29 मोबाइल फोन
- 3 कारें
- विभिन्न डिजिटल डिवाइस
- महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य
बरामद किए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
जांच में मिले 48 IMEI और 68 सक्रिय मोबाइल नंबर
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मिले मोबाइल उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण किया। इसमें 48 IMEI नंबर तथा 68 सक्रिय मोबाइल नंबर सामने आए हैं।
पुलिस इन नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन और उपयोग संबंधी जानकारी एकत्र कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे गिरोह की गतिविधियों और संभावित अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
NCRP पोर्टल की शिकायतों से मिले अहम सुराग
जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों का भी मिलान किया गया।
पुलिस के अनुसार पोर्टल पर दर्ज 189 साइबर शिकायतों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 60 शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर इस गिरोह से जुड़े पाए गए।
इससे जांच एजेंसियों को गिरोह के कार्य करने के तरीके और पीड़ितों की पहचान करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।
कई राज्यों के नागरिक हुए प्रभावित
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था।
पुलिस के अनुसार दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के नागरिक इस गिरोह की कथित ठगी का शिकार हुए हैं।
यही कारण है कि मामले को अंतरराज्यीय साइबर अपराध के दृष्टिकोण से भी जांचा जा रहा है।
लगभग 2 करोड़ की ठगी का अनुमान
पुलिस की प्रारंभिक जांच में अब तक करीब दो करोड़ रुपये की साइबर ठगी होने का अनुमान लगाया गया है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल लेन-देन, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक राशि स्पष्ट हो सकेगी।
जांच पूरी होने पर प्रभावित लोगों की संख्या और ठगी की कुल रकम में भी परिवर्तन संभव है।
बैंक खाते और UPI बने ठगी का माध्यम
पुलिस के अनुसार आरोपी विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से धनराशि प्राप्त करते थे।
जांच एजेंसियां संबंधित बैंक खातों, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। इसके अलावा धनराशि के अंतिम लाभार्थियों की भी पहचान की जा रही है।
व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड भी मिले
छापेमारी के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
इनमें—
- व्हाट्सएप चैट
- कॉल रिकॉर्ड
- मोबाइल डेटा
- अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज
शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच से गिरोह के संचालन, संपर्क सूत्रों और संभावित अन्य मामलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
साइबर अपराध से बचने के लिए पुलिस की सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर ऑनलाइन या फोन पर धन की मांग करे या किसी वीडियो अथवा डिजिटल सामग्री के नाम पर धमकाए, तो घबराने के बजाय तत्काल स्थानीय पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक विवरण, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसी को देना उचित रहता है।
जांच और कानूनी कार्रवाई जारी
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है।
साथ ही, बरामद डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य अभी सक्रिय हैं। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय किया जाएगा।
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा 13 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी साइबर अपराध के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। प्रारंभिक जांच में लगभग 2 करोड़ की साइबर ठगी, कई राज्यों के पीड़ितों की पहचान तथा बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य मिलने से मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन कॉल, संदेश या धन मांगने वाले व्यक्ति से सतर्क रहें तथा किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

