श्रावस्ती में सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, SDM से दोबारा पैमाइश की मांग
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: जिले के इकौना तहसील क्षेत्र के लोधनपुरवा गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने कथित रूप से सार्वजनिक मार्ग पर कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए इकौना तहसील पहुंचकर प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने प्रशासन से रास्ते को तत्काल खुलवाने, निष्पक्ष जांच कराने और दोबारा पैमाइश कराए जाने की मांग की है।
वहीं, मामले में दूसरे पक्ष ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि संबंधित भूमि उन्हें चकबंदी प्रक्रिया के दौरान आवंटित हुई थी। प्रशासन ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद निष्पक्ष जांच और दोबारा पैमाइश कराने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे का आरोप
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 100 वर्ष पुराना सार्वजनिक रास्ता है, जिसका उपयोग लंबे समय से ग्रामीण आवागमन के लिए करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि हाल के दिनों में इस रास्ते पर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है, जिससे लोगों को आने-जाने में कठिनाई हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग केवल पैदल आवाजाही के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि कार्य, आपातकालीन सेवाओं और दैनिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। रास्ता अवरुद्ध होने से गांव के कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर रास्ता बंद करने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विवादित स्थान पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी गई, जिससे रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। उनका कहना है कि इससे किसानों को खेतों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है और आम नागरिकों का आवागमन भी बाधित हो रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक उपयोग के मार्ग को तत्काल खाली कराया जाए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रास्ता अवरुद्ध किए जाने का विरोध किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि विरोध करने पर गाली-गलौज की गई और धमकी भी दी गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने कहा है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
दूसरे पक्ष ने किया कब्जे के आरोप से इनकार
विवाद के दूसरे पक्ष ने सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे के आरोपों को अस्वीकार किया है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि उन्हें चकबंदी प्रक्रिया के दौरान विधिवत आवंटित हुई थी और वे उसी के अनुसार भूमि का उपयोग कर रहे हैं।
दूसरे पक्ष का कहना है कि वे किसी सार्वजनिक रास्ते को अवरुद्ध नहीं कर रहे हैं। उनका आग्रह है कि मामले का समाधान राजस्व अभिलेखों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाए।
तहसील परिसर में ग्रामीणों का प्रदर्शन
अपनी मांगों को लेकर दर्जनों ग्रामीण इकौना तहसील पहुंचे और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि मामले का शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और गांव में सामान्य स्थिति बनी रहे।
SDM को सौंपा गया ज्ञापन
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्न मांगें शामिल थीं—
- कथित रूप से अवरुद्ध सार्वजनिक रास्ता खुलवाया जाए।
- विवादित भूमि की दोबारा पैमाइश कराई जाए।
- राजस्व अभिलेखों की जांच की जाए।
- दोनों पक्षों की सुनवाई कर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।
- यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की निष्पक्ष कार्रवाई से विवाद का स्थायी समाधान संभव होगा।
प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने दोनों पक्षों के दावों की जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम द्वारा दोबारा पैमाइश कराई जाएगी। इसके साथ ही संबंधित अभिलेखों का परीक्षण भी किया जाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व अभिलेखों की होगी जांच
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, विवाद का समाधान राजस्व रिकॉर्ड, नक्शों और चकबंदी अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।
यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि संबंधित भूमि सार्वजनिक मार्ग है, तो नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, यदि रिकॉर्ड में भूमि का स्वामित्व दूसरे पक्ष के नाम दर्ज पाया जाता है, तो उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
शांतिपूर्ण समाधान पर प्रशासन का जोर
प्रशासन ने दोनों पक्षों से कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की विवादित स्थिति से बचने की अपील की है।
अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई भी पक्ष कानून अपने हाथ में न ले। यदि किसी प्रकार की नई शिकायत सामने आती है तो उसका भी नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा।
ग्रामीणों को जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल गांव के लोगों की नजर प्रशासन की जांच और दोबारा पैमाइश पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी और लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त होगा।
दूसरी ओर, दूसरा पक्ष भी जांच प्रक्रिया में सहयोग करने की बात कह रहा है। ऐसे में अब पूरे मामले का समाधान प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण पर निर्भर करेगा।
श्रावस्ती के लोधनपुरवा गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर उत्पन्न विवाद ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। ग्रामीणों ने सार्वजनिक मार्ग पर कब्जे का आरोप लगाते हुए इकौना तहसील में प्रदर्शन किया और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। वहीं, दूसरे पक्ष ने चकबंदी के दौरान भूमि अपने हिस्से में आने का दावा किया है।
प्रशासन ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद निष्पक्ष जांच और दोबारा पैमाइश कराने का आश्वासन दिया है। अब राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य तथ्यों के आधार पर विवाद का समाधान कर क्षेत्र में शांति और सामान्य आवागमन सुनिश्चित करना है।

