कानपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर विनोद कुमार बिंद का इलाज के दौरान निधन, मेडिकल कॉलेज में शोक की लहर

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा

कानपुर: गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक चिकित्सा महाविद्यालय (जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज) में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. विनोद कुमार बिंद के उपचार के दौरान निधन की घटना ने चिकित्सा जगत को गहरा दुख पहुंचाया है।

इस घटना के बाद चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की है। प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें उपलब्ध सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं प्रदान की गईं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लगातार उपचार किया। इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत

मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डॉ. विनोद कुमार बिंद (27 वर्ष) अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक्स) विभाग में द्वितीय वर्ष के जूनियर रेजिडेंट थे। 15 और 16 जुलाई 2026 की मध्य रात्रि में वह आकस्मिक विभाग (इमरजेंसी) में अपनी निर्धारित ड्यूटी कर रहे थे।

इसी दौरान, सुबह लगभग 5 बजे उन्हें पेट के ऊपरी मध्य भाग में दर्द महसूस हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल अस्पताल के मेडिसिन इमरजेंसी एवं आईसीयू में पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता ली। चूंकि उनके लक्षण गंभीर प्रतीत हो रहे थे, इसलिए डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी।

ईसीजी और अन्य जांच सामान्य रहीं

प्रेस नोट के अनुसार, चिकित्सकों ने हृदय संबंधी गंभीर बीमारी की संभावना को देखते हुए तत्काल ईसीजी (ECG), ट्रोपोनिन-आई (Troponin-I) सहित अन्य आवश्यक जांचें कराईं। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट सामान्य आईं और उनमें हार्ट अटैक की पुष्टि नहीं हुई।

इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम ने उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए उपचार जारी रखा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी और आवश्यक दवाएं तथा चिकित्सकीय सहायता समय-समय पर उपलब्ध कराई गई।

स्थिति लगातार बिगड़ती गई

हालांकि शुरुआती जांच सामान्य आने के बाद भी डॉ. विनोद कुमार बिंद की तबीयत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके विपरीत उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई। ऐसे में मेडिकल कॉलेज ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों को उपचार में शामिल किया।

मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता, निश्चेतना (एनेस्थीसिया) विभाग के प्रोफेसर डॉ. अपूर्व अग्रवाल तथा हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौतम वाजपेई के संयुक्त नेतृत्व में उनका इलाज किया गया। सभी विशेषज्ञों ने उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों के साथ लगातार उपचार जारी रखा।

सीपीआर और टेम्परेरी पेसमेकर का भी लिया गया सहारा

जब मरीज की स्थिति और अधिक गंभीर हुई तो चिकित्सकों ने उनकी हृदय गति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) दिया। इसके साथ ही उनकी स्थिति को स्थिर करने के उद्देश्य से टेम्परेरी पेसमेकर भी लगाया गया।

हालांकि इन सभी प्रयासों के बावजूद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में कोई सकारात्मक सुधार नहीं हो सका। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपचार के दौरान वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम लगातार सक्रिय रही और सभी आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

प्रशासनिक अधिकारी भी रहे मौजूद

मेडिकल कॉलेज ने अपने बयान में बताया कि उपचार के दौरान संस्थान के प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्या, प्रमुख अधीक्षक तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक लगातार अस्पताल में मौजूद रहे। सभी वरिष्ठ अधिकारी उपचार व्यवस्था की निगरानी करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय या प्रशासनिक कमी न रहे।

इसके अलावा गंभीर स्थिति को देखते हुए संबंधित विभागों के विशेषज्ञों के बीच निरंतर समन्वय भी बनाया गया।

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हृदय रोग संस्थान पहुंचाया गया

जब मेडिकल कॉलेज में उपचार के बावजूद मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तब उन्हें बेहतर विशेषज्ञ उपचार के लिए हृदय रोग संस्थान भेजने का निर्णय लिया गया।

प्रेस नोट के अनुसार, हृदय रोग संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ. एम. रजी और डॉ. एस.के. सिन्हा से समन्वय स्थापित किया गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा कर्मियों तथा स्वरूप नगर थाना पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिससे मरीज को कम से कम समय में एएलएस (Advanced Life Support) एम्बुलेंस के माध्यम से हृदय रोग संस्थान पहुंचाया जा सके।

एम्बुलेंस के साथ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्या और प्रमुख अधीक्षक भी हृदय रोग संस्थान पहुंचे।

अथक प्रयासों के बावजूद नहीं बचाई जा सकी जान

हृदय रोग संस्थान पहुंचने के बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपचार जारी रखा। हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद डॉ. विनोद कुमार बिंद की जान नहीं बचाई जा सकी। मेडिकल कॉलेज के अनुसार, सुबह लगभग 11 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

प्रेस नोट में उल्लेख किया गया है कि चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए संभावित रूप से हृदयाघात (हार्ट अटैक) को मृत्यु का कारण माना गया है। हालांकि अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष संबंधित जांच प्रक्रिया के अनुरूप ही निर्धारित किया जाएगा।

डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से भी थे पीड़ित

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने यह भी बताया कि उपचार के दौरान डॉ. विनोद कुमार बिंद के साथियों ने चिकित्सकों को जानकारी दी थी कि वह पिछले कुछ महीनों से डायबिटीज (मधुमेह) और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से भी प्रभावित थे।

प्रशासन के अनुसार, उपचार के दौरान उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी को ध्यान में रखते हुए ही इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

परिजनों को लगातार दी जाती रही जानकारी

प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डॉ. विनोद कुमार बिंद की स्वास्थ्य स्थिति में होने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण बदलाव की सूचना उनके परिजनों को दूरभाष (फोन) के माध्यम से लगातार दी जाती रही। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपचार प्रक्रिया के दौरान परिवार को समय-समय पर स्थिति से अवगत कराया गया।

मेडिकल कॉलेज ने दी आधिकारिक जानकारी

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मरीज को उपलब्ध सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं प्रदान की गईं। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों की टीम ने संयुक्त रूप से उपचार किया तथा आवश्यकता पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान भी भेजा गया। इसके बावजूद चिकित्सकीय प्रयास सफल नहीं हो सके और डॉ. विनोद कुमार बिंद का निधन हो गया।

यह घटना चिकित्सा समुदाय के लिए अत्यंत दुखद है। अस्पताल प्रशासन ने दिवंगत डॉक्टर के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उपचार के दौरान सभी आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं का पालन किया गया।

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