राष्ट्रीय एकता दिवस पर कानपुर में अधिकारियों-कर्मचारियों ने ली शपथ, सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने का संकल्प
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कानपुर नगर। भारत रत्न एवं लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर कानपुर नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नवीन सभागार में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से शपथ ली।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देशवासियों को राष्ट्रीय एकता के महत्व से परिचित कराना तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना रहा। इस दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए देशहित में पूरी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया।
सरदार पटेल के योगदान को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सरदार पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही आजादी के बाद देश को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया।
दरअसल, 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तो देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विभिन्न देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराना था। उस समय देश में अनेक रियासतें थीं, जिनका एकीकरण आसान कार्य नहीं था। ऐसी परिस्थितियों में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता, राजनीतिक सूझबूझ और कुशल नेतृत्व का परिचय देते हुए रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत की एकता और अखंडता को मजबूत आधार मिला। यही कारण है कि उन्हें देश में राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार और लौहपुरुष के रूप में याद किया जाता है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता की दिलाई गई शपथ
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण की। इस दौरान सभी ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित रखेंगे।
इसके साथ ही देशवासियों के बीच आपसी सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई गई। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राष्ट्र की एकता को बनाए रखने में अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे।
शपथ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता में निहित है। देश में अलग-अलग भाषा, संस्कृति, परंपरा और रहन-सहन के बावजूद सभी नागरिक एक राष्ट्र के नागरिक हैं। इसलिए आपसी सम्मान, सहयोग और सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में सरदार पटेल के आदर्शों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती केवल उसकी सीमाओं या संसाधनों से नहीं, बल्कि नागरिकों के बीच एकता, विश्वास और सहयोग की भावना से निर्धारित होती है। ऐसे में राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक और राष्ट्रीय दायित्वों को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल अपने विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की भी आवश्यकता है। जब सभी विभाग आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करेंगे, तभी विकास और सुशासन के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्राप्त किया जा सकेगा।
इसके अलावा, सरदार पटेल का जीवन हमें यह भी प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही सहभागिता
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी, अपर नगर मजिस्ट्रेटगण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प दोहराया। साथ ही अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ दायित्वों का निर्वहन करने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्रीय एकता दिवस के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देश की अखंडता और मजबूती बनाए रखना केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। सरदार पटेल के विचारों को अपनाकर ही एक मजबूत, समृद्ध और एकजुट भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

