राष्ट्रीय एकता दिवस पर मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दिलाई एकता की शपथ

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रिपोर्ट – आशीष कुमार

गोण्डा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गोण्डा मंडल के आयुक्त कार्यालय में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का आयोजन आयुक्त कार्यालय स्थित महाराजा सुहेलदेव सभागार में किया गया, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर देश की एकता एवं अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सरदार पटेल के योगदान को किया याद

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया गया। सरदार पटेल को देश की एकता और अखंडता का मजबूत स्तंभ माना जाता है। उन्होंने आजादी के बाद देश की विभिन्न रियासतों को एक सूत्र में पिरोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों के कारण भारत एक मजबूत और संगठित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सका।

इसी योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन देशभर में सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न संगठनों की ओर से एकता, अखंडता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मंडलायुक्त ने दिलाई राष्ट्र की एकता और अखंडता की शपथ

समारोह के दौरान मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलाई। सभी ने देश की एकता और संप्रभुता की रक्षा करने तथा राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मंडलायुक्त ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, दृढ़ इच्छाशक्ति और एकता की भावना का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अपने कार्यों और दूरदर्शी नेतृत्व से देश को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

देश की एकता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है। समाज के प्रत्येक वर्ग को आपसी भाईचारे, सहयोग और सद्भाव की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और रीति-रिवाज होने के बावजूद सभी नागरिक एक राष्ट्र की भावना से जुड़े हुए हैं। इसलिए हमें आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ करें। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा की भावना को प्राथमिकता देना आवश्यक है। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी शासन की योजनाओं तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके कार्यों में कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की भावना दिखाई देनी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की रही सहभागिता

आयुक्त कार्यालय के महाराजा सुहेलदेव सभागार में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रशासनिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अपर आयुक्त प्रशासन मीनू राणा, अपर आयुक्त न्यायिक राजेश कुमार यादव तथा संयुक्त विकास आयुक्त राकेश कुमार पाण्डेय प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इसके अलावा आयुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के महत्व को समझते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का अवसर भी है। सरदार वल्लभभाई पटेल के विचार आज भी देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने के लिए प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र की मजबूती के लिए सामाजिक सद्भाव, आपसी सहयोग, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा बेहद जरूरी हैं। साथ ही सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह भी याद दिलाया गया कि जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

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