महिलाओं के अपमान पर भड़के जाट महासभा अध्यक्ष सोमेंद्र ढाका, बोले- ऐसे लोगों का समाज नहीं करेगा समर्थन

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रिपोर्ट – हैदर मलिक

बागपत: महिलाओं के सम्मान, किसानों के अधिकार और सामाजिक सद्भाव के मुद्दे पर जिला जाट महासभा के अध्यक्ष एडवोकेट सोमेंद्र ढाका ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जाट समाज किसी भी ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं करेगा, जो किसानों के सम्मान को ठेस पहुंचाए, महिलाओं का अपमान करे या धर्म और जाति के नाम पर समाज में नफरत फैलाने का प्रयास करे। उनका कहना है कि समाज की पहचान आपसी भाईचारे, सम्मान और एकजुटता से होती है, न कि किसी के प्रति भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार से।

जिला जाट महासभा के अध्यक्ष एडवोकेट सोमेंद्र ढाका ने अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विभिन्न सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर हर्ष चिकारा और पिंकी चौधरी के बीच चल रही जुबानी जंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को समाज की प्रतिष्ठा और सामाजिक मूल्यों से जोड़कर देखने से पहले उसके पीछे के आचरण और तथ्यों को समझना जरूरी है।

धर्म के नाम पर भेदभाव को बताया गलत मानसिकता

प्रेस वार्ता के दौरान सोमेंद्र ढाका ने धर्म के आधार पर भेदभाव करने वालों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल उसके मुस्लिम होने के कारण भोजन देने से इनकार करने जैसी सोच समाज के लिए उचित नहीं है। इस तरह का व्यवहार सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है। यहां अलग-अलग धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग वर्षों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। ऐसे में धर्म और जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके धर्म या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और कर्मों के आधार पर होना चाहिए। समाज में सभी लोगों को समान सम्मान मिलना चाहिए। इसके अलावा, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों की जिम्मेदारी भी है कि वे अपने बयानों और व्यवहार से आपसी सद्भाव बनाए रखें।

किसान आंदोलन के दौरान महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया

एडवोकेट सोमेंद्र ढाका ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए महिलाओं और बेटियों के सम्मान से जुड़े मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं ने किसानों के अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्तरों पर अपनी आवाज बुलंद की है।

उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन या सामाजिक गतिविधि में महिलाओं के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी या दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना था कि महिलाओं का सम्मान समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है और जो व्यक्ति महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, उसे सामाजिक समर्थन नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी आंदोलन में विचारों का विरोध हो सकता है, लेकिन विरोध के नाम पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है। असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, मगर इसका प्रदर्शन मर्यादा और सम्मान के दायरे में रहकर होना चाहिए।

हर्ष चिकारा और पिंकी चौधरी विवाद पर रखी राय

सोशल मीडिया पर हर्ष चिकारा और पिंकी चौधरी के बीच चल रही जुबानी जंग के संदर्भ में भी जिला जाट महासभा अध्यक्ष ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने और सामाजिक एकता की बात करने वाले लोगों को अपने आचरण में भी उसी भावना का परिचय देना चाहिए।

सोमेंद्र ढाका के मुताबिक, समाज के नाम पर किसी भी गलत व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता। किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, सामाजिक पहचान या संगठन से जुड़ाव उसके आचरण को सही साबित नहीं करता। इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों में सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखे।

उन्होंने संकेत दिया कि समाज में किसी भी विवाद को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या जातीय पहचान का मुद्दा बनाने के बजाय उसके वास्तविक पहलुओं पर चर्चा होनी चाहिए। इससे अनावश्यक तनाव और आपसी मतभेदों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

गलत आचरण के खिलाफ एकजुट होने की अपील

प्रेस वार्ता में सोमेंद्र ढाका ने अपना संदेश स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका विरोध किसी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। बल्कि वे गलत आचरण, नफरत फैलाने वाली सोच, महिलाओं के अपमान और किसानों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जाट समाज की परंपरा में सम्मान, भाईचारा और सामाजिक एकता का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इन मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। समाज के नाम पर ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए, जो लोगों के बीच दूरी पैदा करें।

उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक संगठनों की भूमिका केवल अपने समुदाय के हितों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक सोच, समानता और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भी आगे आना चाहिए।

सामाजिक एकता और महिलाओं के सम्मान को बताया प्राथमिकता

जिला जाट महासभा अध्यक्ष एडवोकेट सोमेंद्र ढाका का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर विभिन्न मुद्दों को लेकर सार्वजनिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं। ऐसे माहौल में उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति या समूह का समर्थन करने से पहले उसके व्यवहार और विचारों पर ध्यान दें।

उन्होंने दोहराया कि महिलाओं का सम्मान, किसानों की प्रतिष्ठा और सभी धर्मों के लोगों के प्रति समान व्यवहार सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। किसी भी समुदाय की वास्तविक मजबूती आपसी सहयोग और सम्मान से आती है।

कुल मिलाकर, सोमेंद्र ढाका ने अपने बयान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने के बजाय गलत व्यवहार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। साथ ही, महिलाओं की गरिमा और किसानों के सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।