आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, मैलानी-फरधान के इंस्पेक्टर सस्पेंड
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शासन ने सख्त रुख अपनाया है। आईजीआरएस (समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली) के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के बाद प्रदेश के नौ जिलों में तैनात 10 थाना प्रभारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में लखीमपुर खीरी जिले के मैलानी और फरधान थानों के इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई से पूरे महकमे में जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश गया है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। समीक्षा के दौरान आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की स्थिति और संबंधित अधिकारियों के कामकाज का आकलन किया गया। इसमें शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई को प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनहित के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि अब थाना स्तर पर शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के कामकाज की भी गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।
आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बनी कार्रवाई की वजह
आईजीआरएस पोर्टल सरकार की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को उनकी शिकायतों के समाधान के लिए एक पारदर्शी और सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध कराना है।
हालांकि, केवल शिकायत दर्ज कर लेना ही प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित विभाग और अधिकारियों का दायित्व है कि शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई करें और शिकायतकर्ता को उसकी समस्या के समाधान की जानकारी दें।
इसी क्रम में पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों का निस्तारण संबंधित थाना और अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। यदि किसी नागरिक ने पुलिस से जुड़ी समस्या को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराया है, तो उसका निष्पक्ष परीक्षण और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसके बावजूद कई मामलों में शिकायतों के निस्तारण को लेकर लापरवाही या अपेक्षित गंभीरता की कमी सामने आती है। ऐसे में उच्च स्तर पर समीक्षा के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
लखीमपुर खीरी के मैलानी और फरधान थाने भी कार्रवाई की जद में
प्रदेशव्यापी कार्रवाई में लखीमपुर खीरी जिले के दो थानों के इंस्पेक्टरों का निलंबन स्थानीय पुलिस महकमे के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। मैलानी और फरधान थानों के इंस्पेक्टरों पर हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनशिकायतों के निस्तारण में थाना स्तर पर बरती जाने वाली लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
दरअसल, आम नागरिकों का पुलिस व्यवस्था से सीधा संपर्क थानों के माध्यम से होता है। ऐसे में थाना प्रभारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। थाने में आने वाले फरियादियों की समस्याओं को सुनना, उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई करना और आईजीआरएस के माध्यम से प्राप्त मामलों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
हालांकि, मैलानी और फरधान के दोनों अधिकारियों के खिलाफ किन विशिष्ट शिकायतों में कमी पाई गई और निलंबन आदेश में क्या विस्तृत कारण दर्ज किए गए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
केवल कागजी निस्तारण से नहीं चलेगा काम
आईजीआरएस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। इसलिए किसी शिकायत को केवल पोर्टल पर निस्तारित दिखा देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता को उसकी समस्या के समाधान से संतुष्टि मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति ने पुलिस से संबंधित समस्या दर्ज कराई है, तो संबंधित अधिकारी को मामले की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता को उचित जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
इसके अलावा, शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना भी जरूरी है। यदि शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उसका पुलिस प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो सकता है। यही वजह है कि शासन स्तर पर आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा को गंभीरता से लिया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के लिए जवाबदेही का स्पष्ट संदेश
डीजीपी राजीव कृष्ण की समीक्षा के बाद नौ जिलों के 10 थाना प्रभारियों पर हुई कार्रवाई को प्रदेश पुलिस के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि थानों में तैनात अधिकारियों को अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ-साथ ऑनलाइन जनशिकायतों के निस्तारण पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
वहीं, इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य थानों में भी आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही, पुलिस अधिकारी शिकायतों को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर उनके वास्तविक समाधान को प्राथमिकता देंगे।

