यूपी में 30 साल BJP की सरकार रहेगी, राहुल गांधी चुनाव नहीं जीतेंगे: अमित शाह
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। शाह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार लंबे समय तक बनी रहेगी और पार्टी को अगले 30 वर्षों तक कोई चुनौती नहीं दे पाएगा।
अमित शाह ने अपने संबोधन में भाजपा को उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत स्थिति में बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की ताकत के दम पर भाजपा लगातार आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा अंगद का पांव है, जिसे कोई हिला नहीं सकता। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और संगठन को मजबूत करने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को दी चुनौती
अमित शाह ने अपने संबोधन में वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने हैं तो उसे संसद में आकर इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए।
शाह ने कहा कि वह राहुल गांधी और अखिलेश यादव को चुनौती देते हैं कि दोनों संसद में आएं और वोट चोरी के मुद्दे पर चर्चा करें। उन्होंने विशेष सत्र बुलाकर इस विषय पर बहस कराने की बात भी कही। शाह के मुताबिक, भाजपा इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्षी नेता संसद में चर्चा करने से बच रहे हैं।
वोट चोरी के आरोपों पर भाजपा का जवाब देने का दावा
विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया और वोट चोरी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भाजपा इन आरोपों पर सदन के भीतर चर्चा करने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी भी मुद्दे पर सवाल उठाने का उचित मंच संसद है और वहां तथ्यों के साथ चर्चा होनी चाहिए।
दरअसल, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर भाजपा तथा विपक्षी दलों के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती रही है।
ऐसे में अमित शाह का यह बयान इस राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, वोट चोरी से जुड़े आरोपों और उनके जवाबों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी बैठक
लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दो दिवसीय बैठक में प्रदेशभर से पार्टी के पदाधिकारी, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और संगठन से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं।
बैठक का आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। इसमें पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा, आगामी चुनाव की रणनीति और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा होनी है। पार्टी की ओर से करीब 2,850 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके साथ ही बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और आगामी चुनाव के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बैठक के समापन सत्र को संबोधित करने वाले हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया एकजुट रहने का संदेश
अमित शाह ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संगठन की ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीतिक मजबूती का आधार उसके कार्यकर्ता हैं। पार्टी की नीतियों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रहती है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार लंबे समय तक बने रहने का दावा करते हुए कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उनके बयान में संगठन की मजबूती और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने पर विशेष जोर दिखाई दिया।
विपक्ष और भाजपा के बीच तेज हो सकती है राजनीतिक बयानबाजी
अमित शाह के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। एक ओर भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन और बूथ स्तर पर अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही हैं।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को संसद में वोट चोरी के मुद्दे पर चर्चा की चुनौती देकर शाह ने विपक्ष को सीधे तौर पर घेरने की कोशिश की है। वहीं, भाजपा के अगले 30 वर्षों तक सत्ता में बने रहने का उनका दावा राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है।
फिलहाल लखनऊ की प्रदेश कार्यसमिति बैठक के जरिए भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने का संकेत दिया है। अब देखना होगा कि विपक्ष अमित शाह की चुनौती और उनके राजनीतिक दावों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

