बिजनौर में घर के झरोखे में मिले उल्लू के 6 बच्चे, वन विभाग ने किया रेस्क्यू – देखने वालों की लगी थी भीड़

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रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा 

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दीपावली की सफाई के दौरान एक घर के झरोखे में उल्लू के छह बच्चे मिलने का मामला सामने आया है। कृष्ण विहार कॉलोनी में हुई इस घटना के बाद मकान मालिक ने वन विभाग को सूचना दी। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी छह बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। फिलहाल इनकी देखभाल वन विभाग के रेंज कार्यालय में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बड़े होने और प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए तैयार होने के बाद इन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

दीपावली की सफाई के दौरान दिखे उल्लू के बच्चे

जानकारी के मुताबिक, बिजनौर की कृष्ण विहार कॉलोनी में दीपावली के त्योहार को देखते हुए घर की सफाई की जा रही थी। इसी दौरान मकान के एक झरोखे में उल्लू के छह बच्चे दिखाई दिए। अचानक पक्षियों के बच्चे नजर आने पर मकान मालिक जगदीश कुमार ने मामले की जानकारी वन विभाग को दी।

इसके बाद वन विभाग की टीम ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टीम ने सावधानीपूर्वक सभी छह बच्चों को रेस्क्यू किया, ताकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखकर उनकी देखभाल की जा सके। इस तरह समय रहते वन विभाग को सूचना मिलने से पक्षियों के बच्चों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था हो सकी।

बार्न आउल प्रजाति के हैं सभी छह बच्चे

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, झरोखे में मिले सभी छह बच्चे बार्न आउल (Barn Owl) प्रजाति के हैं। इनमें चार नर और दो मादा बताए गए हैं। उनकी उम्र लगभग ढाई महीने है। बार्न आउल उल्लू की एक प्रजाति है, जो अपने विशिष्ट चेहरे और रात के समय सक्रिय रहने के लिए जानी जाती है।

उल्लू प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मुख्य रूप से छोटे जीवों और चूहों जैसे कृंतकों का शिकार करते हैं। इस कारण खेती और आसपास के पर्यावरण में इनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, इनके बच्चों या घोंसलों के आसपास किसी भी प्रकार की अनावश्यक छेड़छाड़ से बचना चाहिए।

रेंज कार्यालय में की जा रही देखभाल

रेस्क्यू किए जाने के बाद उल्लू के छह बच्चों को वन विभाग के रेंज कार्यालय में रखा गया है। यहां उनकी देखभाल की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे सुरक्षित रहें और आगे प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए तैयार हो सकें।

अधिकारियों के मुताबिक, जब ये बच्चे बड़े हो जाएंगे और प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने के योग्य होंगे, तब इन्हें उपयुक्त स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखना वन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस घटना में मकान मालिक की सतर्कता भी अहम रही। सफाई के दौरान पक्षियों के बच्चे दिखाई देने पर उन्हें स्वयं हटाने या नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग को सूचना दी गई। इससे प्रशिक्षित टीम को मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू करने का अवसर मिला।

वन्यजीव दिखने पर क्या करें?

घरों, छतों, झरोखों या अन्य स्थानों पर पक्षियों के बच्चे अथवा किसी दूसरे वन्यजीव के दिखाई देने पर घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में वन विभाग या संबंधित वन्यजीव बचाव दल को सूचना देना उचित रहता है।

इसके अलावा, पक्षियों के बच्चों को बिना विशेषज्ञ सलाह के उठाने, उन्हें भोजन या पानी जबरन देने और उनके संभावित घोंसले को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। यदि कोई वन्यजीव घायल दिखाई दे, तो उसे सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की सहायता लेनी चाहिए।

बिजनौर की कृष्ण विहार कॉलोनी में उल्लू के छह बच्चों का रेस्क्यू इसी बात का उदाहरण है कि समय पर सूचना और सावधानी से वन्यजीवों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी छह बच्चे वन विभाग की देखरेख में हैं। अब उनके बड़े होने के बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना है।

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